December 2, 2011

Moral Story on Beauty in Hindi

Moral Story on Beauty in Hindi
 नयना
(बालहंस में प्रकाशित)

मायूस सा चेहरा और कांपते से कदम उठाये वह अपने स्कूल की तरफ बढ़ रही थी। आज नयना का नए स्कूल में पहला दिन था। कुदरत ने भी क्या भद्दा मजाक किया था नयना के साथ। बचपन में एक हादसे में उसने अपनी एक आँख खो दी थी और एक तरफ का चेहरा पूरा जल गया था। तभी से हमेशा खिलखिला कर हँसते रहने वाली नयना के जीवन में उदासी छा गयी थी।

कई बार वह अपना उपहास बनते हुए देखती। अपने सहपाठियों को हँस-हँस कर कानों में फुसफुसाते हुए देखा था उसने। इन सब बातों ने उसके मनोबल और आत्मविश्वास को खत्म सा कर दिया था। पर एक चीज ऐसी थी जो नयना में नयी स्फूर्ति भर देती थी, वह था नृत्य से उसका लगाव। मानो नृत्य में उसकी आत्मा बसती हो। नयना घंटों अकेले कमरे में नृत्य का अभ्यास करती थी। नृत्य ही उसके जीवन में अब उसका सबसे सच्चा और अच्छा साथी था।

नयना के नए स्कूल में एक जिला स्तरीय नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन होने वाला था। जब क्लास में एक टीचर नृत्य प्रतियोगिता में इच्छुक विद्यार्थियों के नाम लिखने आई तो नयना से बड़ी हिम्मत से अपना हाथ खड़ा किया। अध्यापिका विचित्र सी नजरों से उसे घूरकर और नाम लिखकर चली गयी। पीछे से एक छात्र बोला, ‘अब यह एक आँख वाली डांस करेगी। कहीं किसी से टकराकर गिर पड़ी तो?’ उस लड़के की बात सुन क्लास के सभी विद्यार्थी जोर-जोर से हंसने लगे। नयना को रोना आ गया।

विद्यालय की ओर से प्रतिनिधित्व करने के लिए एक छात्र/छात्रा को नृत्य के लिए चुना जाना था। अगले दिन सभी रूचि रखने वाले विद्यार्थियों को बारी-बारी से अपनी प्रस्तुति देने के लिए कहा गया। आखिर में नयना की बारी थी। पर उसका नाम आते ही टीचर ने कहा, ‘आज समय खत्म हो चुका है और नृत्य प्रतियोगिता के लिए उमा को चुन लिया गया है।’ यह कहकर अध्यापिका चली गयी। नयना उदास मन से घर आ गयी।

नृत्य प्रतियोगिता का दिन भी आ गया। उमा जिसे प्रस्तुति देनी थी वह नयना की पड़ौसी थी और उसने नृत्य के कई गुर नयना से ही सीखे थे। वह जानती थी नृत्य में नयना का कोई सानी नहीं था। उमा प्रतियोगी कक्ष में पहुँच गयी। तैयार होने में उसकी मदद के लिए नयना उसके साथ थी। अचानक उमा का पाँव फिसल गया और उसके पाँव में भयंकर मोच आ गयी। वह ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। अपने दर्द से ज्यादा उसे इस बात का भय सता रहा था कि अब वह नृत्य कैसे करेगी और टीचर से क्या कहेगी। उसमें किसी को भी चोट के बारे में बताने की हिम्मत नहीं थी। अचानक उसकी नज़र नयना पर पड़ी। उसने नयना से कहा, ‘तुम तुरंत मेरी पोशाक पहन लो और तैयार हो जाओ। आज मेरी जगह तुम्हें ही नृत्य करना होगा।’ यह कहते हुए उसने पोशाक नयना के हाथों में थमा दी।

नयना के हाथ कांपने लगे। उसके अन्दर छिपी प्रतिभा बाहर आने को छटपटाने लगी पर वह इतना साहस नहीं जुटा पा रही थी कि उमा की जगह नृत्य करने चली जाए। जब उमा रोने लगी तो नयना को वह पोशाक पहननी पड़ी। उसने जब दर्पण में अपना चेहरा देखा तो उसका मनोबल फिर गिरने लगा। लेकिन उमा के आसुंओं को देखकर उसने अपनी आँखों पर एक पट्टी बाँधी और जब उमा का नाम पुकारा गया तो वह मंच पर चली आई।

संगीत बजता इससे पहले ही उसने नृत्य करना शुरू कर दिया। उसके घुँघरू वैसे भी संगीत की ही रचना कर रहे थे। किसी को आभास भी नहीं हुआ कि संगीत नहीं बज रहा। उसकी प्रस्तुति में सभी मंत्र मुग्ध हो गए। ऐसा लग रहा था मानों वर्षों से नयना के ह्रदय में बसा तूफ़ान आज नृत्य के माध्यम से निकल रहा था। अपमान के कड़वे घूंट पीते-पीते जो दुःख, दर्द और रोष उसके अन्दर बसा था आज उसकी दासता उसका नृत्य सुना रहा था। बहुत देर हो गयी पर उसके पाँव नहीं रुके।

नयना की माँ भी नृत्य प्रतियोगिता देखने वहां आई थी। माँ की नज़र नयना के पांवों से बहते खून पर पड़ी। वह दौड़कर तुरंत मंच पर पहुंची और अपनी बेटी को गले से लगा लिया। माँ का स्पर्श पाते ही अपनी आँखों पर बंधी पट्टी हटाकर नयना फफक-फफककर रो पड़ी और बोली, ‘माँ, ईश्वर ने मुझसे मेरी सुन्दरता क्यों छीन ली? मैं थक चुकी हूँ लोगों के ताने सुन-सुनकर। मेरे साथ से सभी को शर्म महसूस होती है। इससे पहले कि सब मुझपे हंसने लगे आप मुझे घर ले चलो।’

माइक की वजह से नयना की आवाज़ सभी को सुनाई पड़ रही थी। उसका उपहास करने वाले सभी विद्यार्थी और अध्यापिका शर्म से सर नीचे झुकाए खड़े थे। सभागार जो पहले नयना की प्रस्तुति देखकर तालियों की घड़घड़ाहट से गूँज रहा था, नयना के शब्द सुनकर चारों तरफ चुप्पी छा गयी और सभी की आँखें भर आई।

प्रतियोगिता का मूल्यांकन करने वाली जज महोदया अपनी कुर्सी से खड़ी हुई और नयना को गले लगाकर बोली ‘बेटी, तुम कुरूप नहीं तुम तो सुन्दरता का प्रतीक हो। तुम्हारे नृत्य की सुन्दरता ने सभी का मन मोह लिया है। तुम तो इस विद्यालय के प्रांगण में चमकने वाला सूरज हो, इस विद्यालय का सम्मान हो।’

यह कहकर जज महोदया ने जैसे ही प्रथम पुरस्कार की घोषणा करने के लिए माइक हाथ में लिया, चारों ओर से नयना-नयना के स्वर सुनाई देने लगे। जज महोदया ने नयना के हाथ में पुरस्कार थमाया और प्यार से उसके सर पर हाथ फेर उसे आगामी जीवन के लिए शुभकामनाएं दी। इतना प्यार और सम्मान देखकर नयना ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थी। अब वह विद्यालय में सबकी चहेती बन गयी थी। नृत्य ने उसे नया जीवन जो दे दिया था।

Monika Jain ‘पंछी’
(02/12/2011)

December 1, 2011

Poem on Winter Season in Hindi

(1)


जाड़े की धूप

जाड़े की धूप 
टमाटर का सूप 
मूंगफली के दाने 
छुट्टी के बहाने 
तबीयत नरम 
पकौड़े गरम 
ठंडी हवा 
मुँह से धुँआ 
फटे हुए गाल 
सर्दी से बेहाल 
तन पर पड़े 
ऊनी कपड़े 
दुबले भी लगते 
मोटे तगड़े 
किटकिटाते दांत 
ठिठुरते ये हाथ 
जलता अलाव 
हाथों का सिकाव 
गुदगुदा बिछौना 
रजाई में सोना 
सुबह का होना 
सपनो में खोना। 

Monika Jain 'पंछी'
(01/2013)

(2)


सूरज भैया

सूरज भैया कहाँ छिपे हो 
जल्दी से तुम आओ ना 
ठण्ड लग रही हमको थर-थर 
गर्मी तुम दे जाओ ना। 

छत का कोना पड़ा है सूना 
इंतजार सब करते हैं 
छूट रही कंपकंपी हमारी 
राह धूप की तकते हैं। 

बैठ धूप में बड़े चाव से 
मूंगफली हम खायेंगे 
खेलेंगे पकड़म-पकड़ाई 
सर्दी दूर भगायेंगे।

Monika Jain ‘पंछी’ 
(01/12/2011) 

Every season comes with a beauty of its own and has its own charm. Winter, one of the most important season of India comes after the rainy season. It starts from november and lasts till the end of february. Basking in the warm sunshine, wearing different colored woolen clothes, sitting around the fire and chatting with friends and neighbours, eating dry fruits, peanuts, jalebis, sleeping on soft bed, using quilts and blankets, all add beauty to this season. We get variety of fruits and vegetables in this season, such as peas, carrots, brinjals, beans, cauliflowers, cabbages, guavas, oranges, grapes, apples etc. Dew drops on leaves look like pearls. Winter flowers like rose, sunflower, marigold, dahlia etc with their dazzling colors look beautiful. Falling snow covering the trees, mountains and rooftops, foggy sky all looks amazing. It is a pleasant and healthy season to eat, to work hard, to harvest and to enjoy many festivals and fairs. It’s a good time for students to play cricket, hockey, football, badminton etc. Dusshera, Diwali, Lohri, Christmas, Makar Sankranti, Pongal all are winter festivals. Let’s welcome the winter. 

November 24, 2011

Female Infanticide (Foeticide) Poem in Hindi


(1)

माँ! मुझे मत मार

गर्भ मे पलती बेटी, पल-पल करे गुहार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार। 

मैं भी दुनिया देखूँगी, चिड़िया सी मैं चहकूँगी 
तेरे आँगन की बन फुलवारी, फूलों सी मैं महकूँगी। 

गुड़ियों संग मैं खेलूँगी, कोयल सी मीठी बोलूँगी
पायल की छम-छम करती माँ, तेरे आँगन डोलूँगी। 

बन जाऊँगी माँ मैं तेरे, आँगन की झंकार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार। 

मिश्री सी बोली घोलूँगी, माँ तेरे कानों में
आँसू ना कभी आने दूँगी, माँ तेरी आँखों में। 

नन्हें हाथ बटाऊंगी, माँ तेरे कामों में
मलहम सी लग जाऊँगी, माँ तेरे घावों में। 

तेरे सुख की ख़ातिर दूँगी, अपना तन-मन वार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार। 

तेरे आँगन की तुलसी बन, मैं बढ़ती जाऊँगी
पूजा की कलसी का पानी बन, बहती जाऊँगी। 

तेरे घर आँगन की माँ, शोभा मैं बढ़ाऊंगी
बेटी, बहन, माँ, पत्नी, हर रिश्ते को निभाऊँगी। 

रोशन कर दूँगी घर आँगन, बन सूरज की दमकार 
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार। 

तेरे भीतर नन्हीं जान हूँ माँ!
तेरी ममता का सम्मान हूँ माँ!
स्नेह, प्यार और दुलार की
मैं ही तो पहचान हूँ माँ! 

बन जाऊँगी माँ मैं तेरी खुशियों का संसार
माँ! मुझे मत मार, ओ माँ! मुझे मत मार। 

Monika Jain 'पंछी'
(24/11/2011) 

(2)

मैं भी जीना चाहती हूँ

माँ, मैं कुछ कहना चाहती हूँ
माँ, मैं भी जीना चाहती हूँ। 

तेरे आँगन की बगिया में
चाहती मैं हूँ पलना
पायल की छमछम करती माँ
चाहती मैं भी चलना। 

तेरी आँखों का तारा बन
चाहती झिलमिल करना
तेरी सखी सहेली बन माँ
चाहती बातें करना। 

तेरे आँगन की बन तुलसी
चाहती मैं हूँ बढ़ना
मान तेरे घर का बन माँ
चाहती मैं भी पढ़ना। 

हाथ बँटाकर काम में तेरे
चाहती हूँ कम करना
तेरे दिल के प्यार का गागर
चाहती मैं भी भरना। 

मिश्री से मीठे बोल बोलकर
चाहती मैं हूँ गाना
तेरे प्यार दुलार की छाया
चाहती मैं भी पाना। 

चहक-चहक कर चिड़िया सी
चाहती मैं हूँ उड़ना
महक-महक कर फूलों सी
चाहती मैं भी खिलना। 

Monika Jain 'पंछी' 
(08/07/2012)

(3)

मैं एक लड़की 

एक ज़िन्दगी नहीं, फिर भी ज़िन्दा हूँ मैं
ख्वामखाह ही खुद से शर्मिंदा हूँ मैं
अपनी अनकही दास्तां तुमसे कहने जा रही हूँ
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ। 

मैं नैया पार ना कर सकूंगी
मुझ पर इतना सा ही भरोसा था
मेरे आने की खबर पर
मेरी माँ ने खुद को कोसा था। 

जब-जब तुम थकते मेरी बाहें आगोश होतीं
ज़िन्दगी के हर चौराहे भले ही मैं खामोश होती
जाने कितनी घुटन...मैं ज़माने से सहते आ रही हूँ
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ। 

कितनी अंधेरी रातों में, दीये सी जलती मैं
कुछ बेरहम मुट्ठियों से, रेत सी फिसलती मैं
बेशक मुझ पर तुम एक निगाह ना बख्शो
साथ तुम्हारे हर घड़ी किसी साये सी चलती मैं। 
मैं एक दुआ... जो सुर्ख लबों पे रहते आ रही हूँ
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ। 

तुम्हें रखती ज़माने से महफ़ूज, वो हिजाब थी मैं
सारी कायनात हो बयां जिसमे, वो किताब थी मैं
जीने की एक तमन्ना लेकर तो चली थी
पर जो उतर न सका कि नज़र में, वो ख़्वाब थी मैं। 
मैं एक नज़र...सब चुपचाप तुमसे कहते आ रही हूँ
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ। 

Malendra Kumar

November 14, 2011

Children's Day (Childhood) Poem in Hindi


(1)

यादें 

कुछ खट्टी, कुछ मीठी
कुछ कड़वी, कुछ तीखी
यादें तो यादें होती जो
कभी न मन से मिटतीं। 

कॉपी कलम उठा ले हाथ 
भावों को चेताया मैंने
याद आया वह मीठा बचपन
जिसे उतारा पन्नों में मैंने। 

लिखते-लिखते खो गयी मैं
बचपन की रंगीनी में
छिपा-छिपी का खेल खेलने लगी
पूरानी गलियों में। 

कितना सच्चा, कितना अच्छा
जीवन का वह लम्हा था
न तनाव, न चिंता सचमुच!
कितना प्यारा जीवन था। 

खिले फूल सा खिला वो बचपन
याद बहुत आता है
मुरझाये इस जीवन को
ग़मगीन बना जाता है। 

बचपन, बचपन क्यों न रहता 
क्यों बढता जाता है?
समय का पहिया क्यों न थमता 
क्यों चलता जाता है?

हे ईश्वर! मुझको पहुंचा दो
बचपन के उस आँचल में
हे ईश्वर! मुझको दे दो
जीवन के वे सच्चे क्षण। 

Monika Jain 'पंछी' 
(09/05/2002)

(2)

बचपन कितना अच्छा था

दिन वो मस्त मोला मस्तियों के 
जब खुशियों को हमने पुकारा 
आंसुओं को हमने नकारा। 

मस्त रहते अपनी मस्ती में 
चाहे आग लगे बस्ती में। 

झूम-झूम कर झूलों की 
मस्ती में आता था सावन 
हर तरफ मिलता था अपनापन 
कुछ इस तरह बीता मेरा बचपन। 

पहले खिलौना टूटता था 
तो आंसू आते थे 
आज दिल टूटता है 
तो आंसू आते हैं। 

खिलौना तो पापा नया दिलाकर 
समझा देते थे 
पर अब कौन समझाये 
दिल का ये दर्द किसे सुनाये?

सच! बचपन कितना अच्छा था -
बारिश में गीला होना 
दिन भर धूल में खेलना 
बिना किसी चिंता के 
दिन भर घूमते रहना। 

माँ को चिंता मेरे खाने की 
बहन को चिंता मेरे पढ़ने की 
और मुझे पड़ी रहती सिर्फ खेलने की
सच! बचपन कितना अच्छा था। 

Vikas Jain 

(3)

एक दौर था

मायूस जिसके दर से कोई परिंदा नहीं लौटा
ख़ुद में जिंदादिली का वो मकां रखते थे हम
ख़्वाब आँखों में, होठों पे बागबां
एक दौर था मुट्ठी में आसमां रखते थे हम। 

चहचहाते परिंदों से याराना था अपना 
मिट्टी के घरोंदों में आशियाना था अपना
होता था बुजुर्गों की बाहों का बिस्तर 
वो भी क्या खूबसूरत फ़साना था अपना। 

तब ज़िन्दगी कुछ इतनी संजीदा भी नहीं थी
हर कदम पे शौक से इम्तिहाँ रखते थे हम
किसी गिले की शिकन कभी चेहरे पे न रही 
एक दौर था मुट्ठी में आसमां रखते थे हम। 

होता था नशा सा बेखौफ शैतानी में 
था अक्स जिंदगी का दरिया की रवानी में 
छोटी खुशियाँ समेटे वो लमहे भी खूब थे 
जब डुबाते थे कश्ती को बारिश के पानी में। 

तन्हा रात में वो शामें बहुत याद आती हैं
जब साथ हर कदम पे कारवां रखते थे हम
मासूमियत की थी वो कोरी दास्तां 
एक दौर था मुट्ठी में आसमां रखते थे हम। 

Malendra Kumar

05/03/2018 - Note : These are old writings and leading to spirituality today I am not much concerned with such writings. Childhood is the blissful time of anyone’s life. It’s the most joyful time. A time of no stress and no worries, a time full of innocence. We all wish to live those days again. But living in past is not a good thing. It’s better to step towards awakening flawlessness than to ignorant innocence. 

November 7, 2011

Save Animals (Stop Cruelty) Poem in Hindi


(1 )

बलि 

धर्म के नाम पर निर्दोष पशुओं की बलि
रज़ा हो नहीं सकती ये तेरी अली। 

उस निरीह की आँखों मे देखो
जीने का ख़्वाब वहाँ भी पलता है 
उस बेबस के दिल मे झाँको
तुम्हारा ख़ुदा वहाँ भी बसता है। 

दिल के एक कोने में मेरे
टीस सी ये उठ चली
धर्म के नाम पर निर्दोष पशुओं की बलि
रज़ा हो नहीं सकती ये तेरी अली। 

ये ज़मीं उसकी भी है
आसमाँ उसका भी है
चाँद, सूरज और हवा
सब पे हक उसका भी है। 

बन के उसके मन की आवाज़
कलम ये मेरी चली
धर्म के नाम पर निर्दोष पशुओं की बलि
रज़ा हो नहीं सकती ये तेरी अली। 

काट जो देते हो धड़
काँपते नहीं क्या कर
चीख सुनकर उस निरीह की
क्या कुछ भी ना होता असर?

जान लेने की रीत ये कैसी चली
धर्म के नाम पर निर्दोष पशुओं की बलि
रज़ा हो नहीं सकती ये तेरी अली। 

Monika Jain 'पंछी'
(07/11/2011)

(2 )

जीना सबको ही भाता है

एक समय था 
जब पशु थे मानव की जीविका का आधार 
पर जब से इंसान ने की है तरक्की 
पशु हो रहे हैं हिंसा के शिकार।

पशुपालन में रूचि ना रही 
मिलावटी उत्पादों ने जगह बनायी है
जैविक उर्वरकों को छोड़ 
रासायनिक खाद अपनायी है। 

चरागाहों पर भवन निर्माण 
पशु हो रहे बेघर हैं 
मांसाहार का बढ़ता उपभोग 
जबकि शाकाहार ही बेहतर है। 

सम्मान करें जीवों का हम 
प्रकृति उनकी भी माता है 
इतनी निर्दयता ठीक नहीं 
जीना सबको ही भाता है। 

Monika Jain 'पंछी'
(21/07/2013)

13/10/2017 - नोट : कुछ सालों पहले पशु परिवार का हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन जिस बेरहमी से आज पशु-पक्षियों को पाला जाता है, उसे देखकर मैं पशु पालन का भी पूर्ण समर्थन नहीं कर सकती। दूसरी ओर प्रकृति की चक्रीय व्यवस्था को देखते हुए मांसाहार कोई भी व्यक्ति ना करे यह अपेक्षा भी सही नहीं है। हम सभी एक दूसरे पर निर्भर हैं। लेकिन हमें जरुरी और गैर जरुरी आवश्यकताओं को पहचानने की जरुरत तो है ही। व्यक्तिगत स्तर पर यदि शाकाहार अपनाया जा सके तो जरूर अपनाया जाना चाहिए, लेकिन हम दूसरों पर प्रतिबन्ध नहीं लगा सकते। पर हाँ, जब पशु हमारी इतनी आवश्यकताएं पूरी करते हैं तो कम से कम उनके प्रति निर्दयता और हिंसा को कम से कम तो किया ही जा सकता है।   

Stop Animal Cruelty Poems in English


(1)

Stop Animal Cruelty

Slaughtering of animals
in the name of religion
It's beyond my thinking
and above my imagination.

It can't be the desire of God
Please make your thinking little bit broad.
Look inside the heart of that creature
What are you doing
for the sake of your pleasure?

See his innocence and feel his pain
By killing an innocent nothing you will gain.
Listen his scream and listen his cry
How can you make your heart so dry?

Seas for the fishes
Air for the birds
Forests for the animals
But their nature is reversed.
For research
they are treated as a scientific tool
For entertainment
they are kept in cages and swimming pools.

They have the same feelings
and experience the same
depth of love and pain
When they are loved deeply
their loyalty, love and affection
in many folds is our gain.

They have the equal right
on earth and sky
They don’t have voice
but they also cry.
Be the voice for creatures
who can not speak up for themselves
Be the strength of those
who are completely helpless.

Respect the rights of other living beings
Stop financing their death trade
Love all creations of nature
and Make sure
no animal around us is being exploited.

Monika Jain 'Panchhi'
(07/11/2011)

(2)

I Don't Need Next Life

My day begins in sorrow
And day ends in tears.

Sitting alone on a lonely tree
My little house on the top branch
Sometimes, I cry.

When I see
My childs are dying
But there's no one who would help.

Humans are not less than animals
Now I'm enough tired to walk
My wing is broken in half.

And now I see
Where I'm heading
And I'll ask this question to my Lord.

Why you created
This monster on earth
Their edacity is out of control.

See, a human hit me with a gun
I didn't hurt him
But he hurted me just for a fun.

I don't need next life on earth
If there is a human
He would not hesitate to kill me twice.

Chetan K Dheer
(08/05/2014)

Animals are beaten for no reason. They are forced to do something they don’t want to do for the entertainment and pleasure of we humans. They are slaughtered for religious practices, fur, skin etc. This must be stopped. Let’s be the voice of these innocent creatures.

November 6, 2011

यादें ~ Poem on Love Memories in Hindi


(1)

तुम याद आते हो

रिमझिम बारिश की बूँदें जब छूती है मेरी पलकें
अश्क बनकर मेरी आँखों से तुम बह जाते हो। 

भीगी मिट्टी की खुशबू जब महकाती मेरी सांसें
बन खुशबू मेरी साँसों में तुम महक जाते हो। 

सूरज की पहली किरण जब दस्तक देती मेरे द्वारे
बन सवेरा हर तरफ बस तुम ही छा जाते हो। 

कोयल की कूँ-कूँ और मयूरे की पीहूं
बन सरगम मेरे दिल के तार छेड़ जाते हो। 

सांझ के सूरज को जब तकती है मेरी आँखें
बन झोंका हवा का मेरी जुल्फें बिखराते हो। 

चांदनी रातों में जब टूटता है कोई तारा
बंद आँखों में तुम मेरी ख्वाहिश बन जाते हो। 

गरजते हैं बादल जब कड़कती हैं बिजलियाँ
काँपते मेरे दिल की तुम धड़कन बन जाते हो। 

नींद जब लेती है आगोश में मेरी आँखों को
बन सपना मेरी आँखों में तुम ही बस जाते हो। 

जब भी उठती है कलम कुछ लिखने की चाहत में
बन शब्द तुम ही मेरी कविता सजाते हो। 

जब भी पढ़ती है कोई कविता मेरी आँखें
हर शब्द में बस मुझे तुम ही नज़र आते हो। 

हर पल, हर घड़ी, हर लम्हा मेरी यादों को
बस तुम याद आते हो, बस तुम याद आते हो। 

Monika Jain 'पंछी'
(11/09/2011)

(2)


मैं याद आऊंगी 

कल-कल करती पानी की धारा जो तुझे छू जाएगी 
बन आँसू तेरी आँखों का मैं धीमे से बह जाऊँगी। 

कूँ-कूँ करती कोयल जब तेरे द्वारे गाएगी 
मिश्री की डली मेरी बोली तेरे कानों में घुल जाएगी। 

फूलों की कोई क्यारी जब तेरे आँगन खिल आएगी 
बन खुशबू तेरी साँसों को मैं महकाती जाऊँगी। 

अनजानी सूनी राहों पे जब हवा तुझे छू जाएगी 
मेरी यादें तेरा हथ थामे दूर तलक तक जाएगी। 

रिमझिम बारिश की बूँदें जब तेरा तन भिगाएगी 
बन सिहरन तेरे तन-मन में मैं अहसास जगाऊँगी। 

साँझ के ढलते सूरज पर जब तेरी नज़रें जाएँगी 
मेरे चहरे की धुँधली सी एक छवि नज़र तुझे आएगी। 

भीड़ में भी जब तनहाई रह रह कर तुझे सताएगी 
मेरी ख़ामोशी तेरी ख़ामोशी से घंटों बतियाएगी। 

इन्द्रधनुषी रंगों को जब तेरी पलकें निहारेगी 
बन गुलाल तेरी यादों को उन रंगों से रंग जाऊँगी। 

हर पल तेरी यादों को हर लम्हा तेरी बातों को 
मैं याद आऊँगी, तुझे मैं याद आऊँगी। 

Monika Jain 'पंछी'
(06/11/2011)

05/03/2018 - Note : Love for your sweetheart is that feeling like someone who owns all the world. When you are away from your beloved, you feel his/her presence in each and everything around you. Nature plays a crucial role for the feeling of attachment with your lover. Sun, moon, rain, rivers, wet soil, birds chirping, cool breeze, clouds all add flavour to love. But living in past is not a good thing. Leading to spirituality today I am not much concerned with such writings. As spiritualism is a journey from dependence to independence.

November 3, 2011

Poem on Child Labour in Hindi


(1)

छोटू

आज जब छोटू को होटल में प्लेट धोते देखा
अपने बचपन के उसी समय में झांक कर मैंने देखा।

रोज नए चमचमाते बर्तनों में
मिल जाता था मुझे मनचाहा खाना
नहीं सोचा कभी भी
कैसे चमकते हैं ये बर्तन रोजाना?

श्रम मेरे लिए होता था बस
अपना स्कूल बैग स्कूल ले जाना
और दोस्तों के साथ
खेलते-खेलते थक जाना।

कागज के नोट तब समझ में न आते थे
पिग्गी बैंक में बस सिक्के ही छनछ्नाते थे।

मेहनत का फल होता है मीठा
माँ ने मुझे सिखाया था
पर मेहनत का मतलब बस
पढ़ना ही तो बताया था।

क्यों छोटू का बचपन, नहीं है बचपन जैसा
काश! न होता इस दुनिया में कोई बच्चा ऐसा।

Monika Jain 'पंछी'
(11/2012)


(2)

फूल जो खिले ही थे

फूल जो खिले ही थे कुम्हला गए
और कहीं से धूल के कण आ गए
भेंट भ्रमरों से भी तो ना हो सकी
कोमल ह्रदय पे शूल कैसे छा गए।

दिन तो थे ये बाग़ में महकने के
पंछियों के संग-संग चहकने के
बहती हवा के संग-संग बहकने के
और सूरज की तरह लहकने के।
फिर कहाँ से ये अँधेरे छा गए
फूल जो खिले ही थे कुम्हला गए।

मासूमियत कहाँ ये इनकी खो गयी
थी जो बचपन की रवानी सो गयी
मुस्कान जाने किधर इनकी बह गयी
इक कहानी जो अधूरी रह गयी।
मोड़ ये जीवन में कैसे आ गए
फूल जो खिले ही थे कुम्हला गए।

Monika Jain 'पंछी'
(02/03/2013)

22/11/2017 - नोट : पुरानी कवितायेँ हैं। कुछ नया जोड़ना चाहती हूँ। छोटे-छोटे बच्चों से बहुत ज्यादा काम करवाकर बच्चों का शोषण तो बिल्कुल गलत है। मैंने बचपन में घर के बहुत ज्यादा काम नहीं किये। अभी सारे काम बहुत अच्छे से आते हैं और जरुरत होने पर कर लेती हूँ। लेकिन हमेशा हर बच्चे के साथ ऐसा नहीं होता। इसलिए मैं समझती हूँ कि बच्चों का (लड़का और लड़की दोनों) बचपन से ही घर और बाहर के छोटे-छोटे काम सीखना और करना जरुरी है। बड़े होने तक हमें घर और बाहर के सभी जरुरी काम आने चाहिए। यह हमें आत्मनिर्भर बनाता है। हम घर के वृद्धों और बड़ों की सहायता से और आवश्यकता होने पर जी नहीं चुराते और आलस आड़े नहीं आता।    

October 20, 2011

Poem on Poverty (Poor People) in Hindi


(1)

पेट भर सकने का सपना 

निकलता है घर से पेट भर सकने की चाह में वह 
अनिश्चितता के मकड़जाल में बुनता रहता है सपना वह। 

कभी सपना उसका पार पा जाता है
और पेट भर सकने जितना वो कमा पाता है
कभी भूखे पेट ही संग उसके 
उसका सपना भी सो जाता है। 

हर बार उसके दिल में जगायी उम्मीदें 
नेता के भाषण, वादों, जीत और कुछ भी न बदलने के चक्र में
दम तोड़ती नज़र आती है। 
पदलोलुपता, महत्वाकांक्षा और भ्रष्टाचार के शासन तले
लात हर बार उसके पेट पर ही मारी जाती है। 

नहीं समझ पाता वो
बढती महंगाई में भी, शेयरों के भाव क्यों गिरते हैं?
उसके जीवन में जब कुछ भी नहीं बदलता
तो हर रोज ये नेता क्यों बदलते हैं?

आटे, दाल, आलू, प्याज के भावों पे नज़र डाल
कोसता है अपने भाग्य को वह मिट्टी का लाल। 

सूरज की किरणे जब सकपकाती सी 
घुस आती है कोठरी में उसकी
तो निकल पड़ता है फिर से वह
उसी अनिश्चितता की राह में
पेट भर सकने का सपना लिए। 

Monika Jain 'पंछी'
(20/10/2011)

(2)

गरीब बच्चे का सपना : पैसे 

काश हमें भी मिल जाते 
खूब सारे पैसे 
सच हो जाते फिर तो मन के 
सपने कैसे-कैसे।

खाते लड्डू, पेड़े, बर्फी 
रसगुल्ले की मिठाई 
चॉकलेट और टॉफी के संग 
करते मौज मनाई।

नए-नए खिलौने लाते 
हम तो करते मस्ती 
हाथ कटोरा लेकर फिर ना 
फिरते बस्ती-बस्ती।

कूड़े और कचरे में हम ना 
बचपन अपना खोते 
आधी सूखी रोटी खाकर 
भूखे हम ना सोते।

स्कूल पढ़ने जाते हम भी 
नया-नया बस्ता लेकर 
पढ़ लिखकर बन जाते अफसर 
नहीं मारता कोई ठोकर।

जाते पिकनिक, सैर-सपाटा 
कुल्लू और मनाली 
जेबे रहती गरम-गरम 
कभी ना होती खाली।

Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

Poem on Poverty in English

A Dream of Filling the Stomach

He leaves the home
in the hope of filling his stomach...
weaving the dreams
in the net of uncertainty.

Sometimes
his dreams come true
and he is able to earn
as much that can win his hunger.
At times his dreams gets sleep
with his empty venter.

Every time the hopes raised in his heart
appears to die in the cycle of
leader’s speeches, fake promises and victory.
Under the rule of corruption and ambitions
his stomach is kicked frequently.

He can’t understand!
How the shares fall while the inflation is rising?
When nothing is changed in his life
then why these leaders keep changing.

By putting eyes on the prices of
flour, lentils, potatoes and onions
The son of the soil curses his fate.
He walks out again on the path of uncertainty
carrying the dream of filling his stomach
When the nervous sun rays enters his closet.

Monika Jain ‘Panchhi’
(20/10/2011)

Poverty is a curse. A section of society in our country is not able to fulfill even their basic needs. The above poem is reflecting the pain of such people, who are even not sure to get the food to fulfill their hunger. Their dreams are confined to just calm their hunger. The worm of corruption eats the share of these poor people while executing the development programs and schemes. Because of the injustice and corruption, economic disparity is increasing day by day, that is a bad sign for our economy. There is a need to eradicate the poverty from the roots.

October 14, 2011

Inspirational Poems in English


(1)

Never Give Up in Life

Never give up in life man!
Never give up in life.

Life is the greatest gift
No one is here misfit.

We need to know our goal
and Nicely play our role.

Why to fear with dark
When there are millions stars.

Why to sink in despair
When hope resides everywhere.

What a path without a turn
What a flower without a thorn?

What a joy without sadness
What a goal without weariness?

Everything is for a reason
Like we need every season.

Face the hurdles with a smile
Never give up in this life.

Monika Jain 'Panchhi'
(05/2012)

(2)

Hopes in My Heart will Never Die

I am walking on a thorny path
My only love has broken my heart
My truth is being considered a lie
But hopes in my heart will never die.

My life has become a horrible question
I wish I could find any solution
Everyone is making me cry
But hopes in my heart will never die.

Don't know when the situation will change
Don't know who is taking revenge
I can say with deep sigh
Hopes in my heart will never die.

My luck is not in my favor
But I will continue my endeavors
With all the odds, I would survive
Hopes in my heart will never die.

Monika Jain 'Panchhi'
(05/2012)

(3)

Just Move On

O sailor!
Don't frighten with storms
Waves will come and go
You just move on.

Don't afraid of fire
Don't fear of thorns
Your self confidence
will defeat all storms.

If truth and courage are your weapons
Have faith, nothing bad will happen
If hope resides in your eyes
You can win all the fights.

Your dreams will come true
You will reach to destination
You will light up the whole world
with Your courage and determination.

Monika Jain 'Panchhi'
(14/10/2011)

Life is not like fairy tales. Life is strange and full of surprises. Life is not only black and white or can’t be defined by two sides of the coin. Life has lots of shades and aspects. Whatever we wish many times we don’t get . Whatever we get, we never thought of that. But still life is beautiful and this beauty gives us courage to face all the hurdles and challenges at every step of life. Just like the joy, happiness, success, pleasure and comfort...sorrow, defeat, misery, failures etc are also the parts of life. One should always be ready to face all the challenges with courage, patience and determination, as these problems are the test of our inner strength and character. One should never give up in life. One should never let the hopes die. One should fight till his/her last breath.

Motivational (Inspirational) Poem in Hindi

(1)


नाविक

तूफ़ानों से घबराकर नाविक! पथ से ना डिग जाना 
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना। 

चाहे हो आंधी की बयार, चाहे हो तूफ़ानी वार
चाहे हो अग्नि की मार, चाहे हो काँटों की धार
तू न कभी घबराना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना। 

सच और साहस को अपना शस्त्र बनाकर
दियें आशाओं के नयनों में जलाकर
आत्मविश्वास को हृदय में बसाकर
हर विषमता में धैर्य को अपनाकर
तू न कहीं रुक जाना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना। 

आंधी जो आये तो तू , बन पर्वत टकरा जाना
सागर जो आये तो, बन कश्ती तू अड़ जाना
काँटों के पथ को राही, फूल समझ बढ़ते जाना
अंधियारी राहों में तू, बन दीपक जलते जाना
तू ना कहीं बुझ जाना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना। 

पूर्वा भी आएगी, मस्ती भी छाएगी
तेरे ख्वाबों को पूरा करने, मंजिल तुझे बुलाएगी
तेरे साहस और हिम्मत से, सब सपने सच हो जायेंगे 
जमीं, आसमां और फिज़ा, तेरी जीत का जश्न मनायेंगे
तू बस जीत का गीत सुनाना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना। 

Monika Jain 'पंछी' 
(14/10/2011)

(2)


मुश्किलों को पार कर

चल रही है ये धरा 
चल रहा है ये गगन 
एक क्षण भी ना रुके जो 
चल रही है वो पवन 
तू भी ना रुकना कभी 
ऐ मुसाफिर हार कर 
सांस जब तक चल रही है 
मुश्किलों को पार कर। 

दर्द के बादल हैं छाये 
गम के ये साये रुलाये 
पर इन्हें तू ना बनाना 
बैठ जाने का बहाना 
गम के इन सायों में डूबा 
तू समय बेकार ना कर 
साँस जब तक चल रही है 
मुश्किलों को पार कर।

Monika Jain 'पंछी' 
(29/01/2013)

(3)

कभी-कभी 

खयालों के समंदर में खोयी सोचती हूँ कभी-कभी -

क्यों रौशनी हर रात अंधेरे में समा जाती है?
क्यों ओस की बूंदे भाप बनकर उड़ जाती हैं?
जब लौटना ही है किनारों पे आकर
तो क्यों लहरें बार-बार थपेड़े खाती हैं?

सवालों के ज़वाब कुछ यूं भी मिलते हैं कभी-कभी - 

जो न होता अँधेरा तो रौशनी को कौन सराहता?
जो न उड़ती ओस तो उसकी सुन्दरता कौन निहारता?
जो न लौट कर आती लहरे किनारों पे फिर से
तो तूफानों में फँसा नाविक हौंसला कहाँ से पाता ?

Monika Jain 'पंछी'
(17/04/2011)

October 12, 2011

Poem on Humanity in Hindi

जरुरत है तो बस एक इंसान की 

न मज़हब की न भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की। 

गूँज रही चीखों और चीत्कारों को जो सुन पाये
टूट रहे सपनों के टुकड़ों को जो चुन पाये
अंधियारी राहों में खोयी आशाएं जो बुन पाये
ऐसे दयावान की। 

न मज़हब की न भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की। 

कदम-कदम पे सरहद की दीवारों को जो फोड़ सके
जाति, धर्म, समाज की दरारों को जो जोड़ सके
जंग लगे दिल के दरवाजों के ताले जो तोड़ सके
ऐसे ऊर्जावान की। 

न मज़हब की न भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की। 

इक प्यासे की प्यास बुझाने को जो पानी बन जाये
डूबे सपने पार लगाने को जो कश्ती बन आये
निर्बल का मान बचाने को बन रक्षक जो तन जाये
ऐसे दिल के धनवान की। 

न मज़हब की न भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की। 

नफरत, शोषण, लालच, हिंसा का तांडव जो रोक सके
आतंकवादी राहों पे चलते कदमों को टोक सके
दहशतगर्दों की दहशत को बन लाठी जो ठोक सके
ऐसे शक्तिमान की। 

न मज़हब की न भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की। 

निजी स्वार्थ की सीमाओं से परे जो सोच सके
खून से लथपथ मानवता के दामन को पोंछ सके
जिससे बिखरी खुशियों को भर सारी दुनिया नाच सके
ऐसे करुणानिधान की। 

न मज़हब की न भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की। 

Monika Jain 'पंछी'
(12/10/2011)

Poem on Humanity in English

(1)

Humanity is Going on a Wrong Path

The fire of hatred is burning in our hearts
Envy, malice and hate are doing us apart
Life is short for even love
But humanity is going on a wrong path.

By favoring racism and regionalism
We are losing our identity
Neither 'Hindu' nor 'Muslim' nor 'Christians'
First we should become the followers of humanity.

The business of religion is deceiving us at last
The politics of criminals is flourishing very fast
Life is short for even love
But humanity is going on a wrong path.

The blood of innocent people
is being shed in the game of politics
For the sake of vote bank
Such issues prove boon for the opportunist.

These things are bothering me day and night
I wish! soon peace will take place in my heart
Life is short for even love
But humanity is going on a wrong path.

Monika Jain 'Panchhi'
(10/09/2013)

(2)

We Need A Human

We don't need any God or religion
We need a human filled with love and affection.

Who is compassionate and moralistic
Yet strong and energetic.

Who can listen the suppressed screams
Who can collect the broken dreams.

Who can show the path in darks
Who can break the border walls.

Who can find the lost hopes
Who can break the heart locks.

Who can stop the violence and threats
Who can think beyond his interests.

Monika Jain 'Panchhi'
(12/10/2011)

September 13, 2011

Poem on Rain (Rainy Season) in Hindi


यूँ तो हर उम्र में बारिश से जुड़े अपने ही खट्टे-मीठे अहसास और अनुभव होते हैं। पर बचपन की बरसात से जुडी यादें कुछ अलग ही होती हैं। कागज़ की नावों को तैराने के हौसले कितने मासूम होते हैं। मिट्टी के घरौंदे बनाने के सुख के सामने महलों के सूख फीके पड़ जाते हैं। मयूरों के नृत्य का प्राकृतिक अहसास और इद्रधनुष के रंगों से सजा आकाश, सब कितने मनोरम लगते हैं। ओलों को लूटने की भागदौड़ बड़े होकर भौतिक साधनों के पीछे दौड़ने वाली ज़िन्दगी का परिहास करती मालूम होती है। सच! बचपन से जुडी ऐसी यादों का कोई सानी नहीं होता। तभी तो हर कोई फिर से अपने बचपन में लौट जाना चाहता है। 

बारिश और यादें 

(1)

रिमझिम बारिश से भीगी मिट्टी 
और मिट्टी की सौंधी खुशबू से महकी यादें
खेल-खेल में बनते बिगड़ते मिट्टी के घरौंदों की यादें। 

यादें पानी में बहती-डूबती कागज़ की नावों की 
और छप-छप करते नन्हें पैरों में बजते घुंघरू की यादें। 

चेहरे पे गिरती पानी की बूंदों से बंद आँखों में सिमटी यादें 
बारिश में शोर मचाते, भागते- दौड़ते बचपन की यादें। 

यादें टर-टर शोर मचाते, उछलते- कूदते मेंढकों की 
और पंख फैलाकर छत पे नाचते मयूरों की यादें। 

बूंदों को छूते हाथों की बंद मुट्ठी में कैद यादें
बारिश में गिरते ओलों से बचती-बचाती यादें। 

यादें इन्द्रधनुष के रंगों को पहचानती नन्हीं आँखों की 
और मस्ती में झूमते, गाते, थिरकते बचपन की यादें। 

यादें बस यादें... 
हर पल याद आती यादें। 

Monika Jain 'पंछी' 
(13/09/2011)

(2)

ये बारिश की बूँदें
सिर्फ पानी की बूँदें नहीं है मेरे लिए 
इनमें बसे हैं ना जाने कितने लम्हें 
जो जीए थे मैंने सिर्फ तेरे लिए। 

मेरी आँखों पर इनकी छुअन 
जगा देती है उन ख्वाबों को 
जो हम तुम मिलकर देखा करते थे 
और होठों पर इनका स्पर्श पाकर 
गुनगुनाने लगती हूँ वो सारे गीत 
जो तुम बस मेरे लिए गाते थे। 

ये सिर्फ मुझे नहीं भिगोती 
भिगो देती हैं मेरी रूह को कुछ ऐसे 
बुझते अंगारों पर डाले हो 
घी के छींटे किसी ने जैसे। 

काश! मौसम की इस पहली बारिश को 
देख पाती तुम्हारे साथ 
जीती उन सारे लम्हों को फिर से 
तेरे हाथों में देकर अपना हाथ। 

Monika Jain 'पंछी'
(17/06/2013)

15/02/2018 - Note : These are old writings and leading to spirituality today I am not much concerned with such writings. Childhood is the blissful time of anyone’s life. It’s the most joyful time. A time of no stress and no worries, a time full of innocence. We all wish to live those days again. But living in past is not a good thing. It’s better to step towards awakening flawlessness than to ignorant innocence.

September 12, 2011

Sad Poetry in English

Silent Cry

(1)

Neither overflow through tears
nor written on papers
There are some pains
that only resides within heart veins.

(2)

Tell the happiness not to knock my doors
I can’t even welcome them
Tell the dreams to search someone else's eyes
My eyes are moist can’t dare to weave them. 

(3)

Every night sleeps in your thoughts
Every morning begins with your dreams
You have given me so much pain
that my soul cries even during sleep. 

(4)

Your desires, I wish!
could see my difficulties
But in front of your ambitions
you can’t see anything else
Your game of making alive
which is dead
and killing that again
How much my soul suffers
do you have any guess?

(5)

If you stayed a stranger
so much would survive within me
The cost of knowing you
I paid losing myself
How to forgive you
How to forget everything
You character is still of disloyalty
wrapped in selfishness.

(6)

My efforts are continued to smile all the time
But these eyes are deceiving them
My efforts are continued to hide my wounds
But this world is digging into them.

(7)

Neither by thundering clouds
nor by sparkling lights
I startled when there is a silent noise
In spite of denying my breath hear it
In this silence
A heart cries loud making no voice.

(8)

No destination, no desire, not a dream anymore
I am simply doing that gives peace to my heart
There would be a reason why i am breathing
Just because of that I am moving on the path.

Monika Jain ‘Panchhi’

17/10/2017 : Note : These are my old writings and leading to spirituality, today I am not concerned with such writings. As spiritualism is a journey from expectations to acceptance, from complaints to responsibility, from dependence to independence, from innocence to flawlessness and from ignorance to awakening. No matter, whoever is in front of us, whatever wrong he did with us, how difficult our situations are, in spiritualism there is no other.

September 11, 2011

I Miss You Poem for Him in English


(1)

You Are My Entire World

When the raindrops touch my eyelids
It's you who flow as tears
When the wet soil spreads its fragrance
Your odor I feel everywhere.

When the sun rays knock my door
You become my morning
When I look at sunset
I feel you as the gust of evening.

The blue sky
reminds me your eyes
Remembrance of your naughtiness
is giving me butterflies.

You become the wish of my eyes
When I see at a shooting star
When the clouds roar
You become the beats of my heart.

I feel your presence
even in crowd
Distance keeps us apart
but you are always in my heart.

When I recall your voice
a smile comes on my face
I can feel the warmth
and gentleness of your embrace.

When I sleep at night
You become the dreams of my eyes
When I wish to write something
You become the words of my rhyme.

Lying in my bed
You are running in my head
You are not close many miles away
but you are always with me in thousand ways.

My love for you is endless
that can not be measured
You are my reason to live
and You are my entire world.

Monika Jain 'Panchhi'
(11/09/2011)

(2)

I’m Waiting...

You are not here
but your memories are with me forever.

Each of my talk is about you
All the time I think of you.

My every tear is in your memory
It's your feel that I always carry. 

In my dreams only you reside
My heart beats because you are inside.

You are the reason I breathe
It's your sweetness that shine on my teeth.

Every moment I'm waiting for you
Everything of mine is only for you.

Monika Jain 'Panchhi'
(09/2012)

05/03/2018 - Note : When you are in love and your loved one is not with you, everything around remind you of him/her. You miss and feel his/her presence, smile, laugh, warmth, touch and everything about him/her. But living in memories or past is not a good thing. Leading to spirituality today I am not much concerned with such writings, as spiritualism is a journey from dependence to independence.

August 1, 2011

मुस्कुराहट ~ Shayari on Smile in Hindi

मुस्कुराहट शायरी 

यूँ खयालों में बार-बार आया ना करो
देखो ना कितने ख़याल इंतजार में हैं बैठे
बेवजह यूँ मेरा बार-बार मुस्कुराना
लोग मुझे कहीं पागल ना समझ बैठे। 

बड़ी बेताब है ये मुस्कुराहट होठों पे खिलने को 
तेरी ख़ामोशी जो तोड़े वो पैगाम जरुरी है 
खयालों में नायाबी तेजी से जारी है 
बुनने को मीठे ख़्वाब, तेरे अल्फाज़ की दूरी है। 

एक उड़ते परिंदे के साथ 
तुम्हारी निश्चल मुस्कुराहट वाली तस्वीर! 
अपने हिस्से का प्रेम मैंने यूँ जी लिया। 

कोशिशे आज भी जारी है हर वक्त मुस्कुराने की 
पर कमबख्त ये आँखे धोखा दे ही जाती है
कोशिशे आज भी जारी है जख्मों को छिपाने की 
पर ये कमबख्त दुनिया उन्हें कुरेद जाती है। 

ये एक मुस्कुराहट बनती है
हजारों आँसूओं को पीकर
बनती है किसी की मलहम
अपने सौ जख्मों को सीकर।

मुस्कुराने को यूँ मुस्कुराती हूँ बहुत
पर भीगी है आज बारिश भी बहुत।

भरे थे जो आँखों की गहराइयों में कब से 
छिपाने की चाहत में बरबस बरस पड़े।

हाँ, तब भी इंतजार था बारिशों का
झूमने, नाचने और खिलखिलाने को
आज आंसू तकते हैं राह बूंदों की
संग उनके छुपके से बह जाने को। 

इस बारिश में भी मैं नाची
झूमी और खूब खिलखिलाई
कब से ठहरे थे पलकों पर जो आंसू
बूंदों संग छुपके से उन्हें भी बहा आई। 

हंसी तो रहती है चेहरे पर अक्सर
पर दिल से उसका नाता हो यह कह नहीं सकती
रोती भले ही न हो मेरी आँखें
पर दिल रोये तो कुछ कर नहीं सकती। 

आँखों से अशहार के छलकने से पहले
चुरा लाती है उन्हें मेरी सिसिकियाँ
सिसकियों की आहट होने से पहले
होठों में जड़ जाती है मोती की लड़ियाँ। 

ये हंसी, ये ख़ुशी, ये ख़्वाब, ये हासिल...कितने छिछले हैं
जब भी हंसती हूँ बड़ी देर तक…
मन फूट-फूट कर रोने को करता है। 

उदास हो तो भी मुस्कुराओ
हताश हो तो भी मुस्कुराओ
मुस्कुराहट के रूह तक पहुँच जाने तक
अभिनय ही सही तुम मुस्कुराओ। 

किसने कहा शायरी उदास तबीयत का काम है
'खुशमिजाज शायरा' अपना तो अब से यही नाम है। 

चंद चीजों से छुटकारा और उस फकीर की मुस्कुराहट
आज सौदा ये बड़े फायदे का हो गया। 

अख्ज़ की मुस्कुराहट में वो सुकूं कहाँ?
जो अत्फ़ करने के दरमियां खिलती है। 

ऐसा कोई जहाँ मिले, हर चेहरे पर मुस्कान मिले
किसी एक की ख़ुशी बन मुस्कुराहट सबके चेहरों पर खिले।

Monika Jain ‘पंछी’

July 2, 2011

Poem on Moon in Hindi

चंदा मामा

चंदा मामा, चंदा मामा 
लुकाछिपी क्यों करते हो 
कभी अधूरे, कभी हो पूरे 
कैसा जादू करते हो?

गायब होने का ये जादू 
हमको भी सिखलाओ ना 
तारों के संग दुनिया की 
हमको भी सैर कराओ ना। 

माँ जब हमको डाटेंगी 
हम भी झट से छिप जायेंगे 
बरसायेगी जब अपनी ममता
फिर गोल मटोल हो जायेंगे। 

Monika Jain ‘पंछी’

July 1, 2011

मन ~ Poem on Mind in Hindi

(1)

जाने क्यूँ गुमसुम है मन 

जाने क्यूँ गुमसुम है मन?

निमिष मात्र में
जग का कोना नापनेवाला 
द्रुतिगत मन। 

गगन भेदकर
अंतरिक्ष में 
स्वछंद विचरने वाला मन। 

जाने क्यूँ गुमसुम है मन?

भूतल की गहरायी तक जा 
सहज पैठने वाला मन। 

चपला सा चंचल 
फिर भी 
जाने क्यूँ गुमसुम है मन?

प्रश्नों का उत्तर देनें में 
तत्पर अरु उत्साही मन। 

किंतु आज के प्रश्नों पर 
क्यूँ चुप्पी साधे बैठा मन?

शायद बहुतेरे प्रश्नों की 
लाज बचाता चुप्पी मन। 

जाने क्यूँ गुमसुम है मन?

Satyanarayan Singh 

(2)

मन

मन के आकाश में -

कभी बरसते हैं बादल दु:खो के
तो कभी टिमटिमाते हैं तारे ख़ुशी के।

कभी दूर-दूर तक घना कोहरा छा जाता है
तो कभी हर तरफ बस उजेरा नज़र आता है।

कभी उड़ते हैं तम्मनाओं के परिंदे पंख फैलाकर
तो कभी छा जाती है काली घटाएँ अचानक आकर।

कभी पूर्णिमा का चाँद जगमगाने लगता है
तो कभी अमावस का अंधेरा छाने लगता है।

कभी इंद्रधनुषी रंग गाने लगते हैं
तो कभी सुर ये सारे वीराने लगते हैं।

कभी सांझ की हवा सुहानी बहती है
तो कभी आँधी और तूफान की कहानी कहती है।

आकाश समाया है मन में
नित रोज बदलता अपने रंग
कभी सवेरा बन ये खिलता
कभी रात को लाता संग।

Monika Jain 'पंछी'
(11/2012)

June 9, 2011

माँ ~ Poem on Mother (Mother's Day) in Hindi

(1)

माँ की गोद 

माँ की गोद देती है 
सुरक्षा का आश्वासन 
और माँ की मुस्कुराहट 
इस आश्वासन के कायम रहने का सुकूं 
और इस सुकून की छाँव तले खिलते हैं
दो नन्हीं आँखों में 
कुछ खुशरंग सपने। 

Monika Jain 'पंछी'
(07/11/2017)

(2)


माँ

माँ!

कहाँ से लाती हो इतनी शक्ति 
कहाँ से लाती हो इतना प्यार
कहाँ से लाती हो इतना समर्पण 
और कहाँ से लाती हो इतना त्याग?

रोज सवेरे पहले उठकर 
और लेकर ईश्वर का नाम 
बिना स्वार्थ के लग जाती हो 
करने हम सबके तुम काम। 

चूल्हा-चोका, झाड़ू, बर्तन 
घर में होते ढेरों काम 
बन मशीन तुम चलती रहती 
तुम्हें नहीं कोई आराम। 

तुम्हें न देखा मैंने करते 
बीमारी का कोई बहाना 
जैसे हम बच्चे करते हैं 
ओढ़ के चद्दर झट सो जाना। 

नहीं तुम्हारी कोई इच्छा 
नहीं तुम्हारा कोई सपना 
हम सबके जीवन को तुमने 
मान लिया है जीवन अपना। 

बरसाती हो प्यार अनोखा 
जैसे शीतल हवा का झोंका
आने वाली हर विपदा को 
तुमने आगे बढ़कर रोका। 

तेरे आँचल की छाया में 
आती सबसे गहरी नींद 
हर संकट में बनती हो 
तुम सबसे पहली उम्मीद। 

हर मुश्किल में आती हो 
सबसे पहले तुम ही याद 
माँ मुझको तुम लगती हो 
ईश्वर की कोई फरियाद। 

Monika Jain ‘पंछी’
(10/02/2013)

(3)


तू सवेरा ज़ुदा है माँ 

तू धरती पर ख़ुदा है माँ 
तू सवेरा जुदा है माँ!

पंछी को छाया देते 
पेड़ों की डाली है तू
सूरज से रोशन होते 
चेहरे की लाली है तू
पौधों को जीवन देती 
मिट्टी की क्यारी है तू
सबसे अलग सबसे जुदा
 माँ सबसे न्यारी है तू। 

तू रोशनी का ख़ुदा है माँ 
तू सवेरा ज़ुदा है माँ!

सूरज से तपते आँगन में 
बारिश की बौछार है तू
जीवन के सूने उपवन में 
कलियों की बहार है तू
खतरों से रक्षा करती 
सदा खड़ी दीवार है तू
ईश्वर का सबसे प्यारा 
और सुन्दर अवतार है तू। 

तू फरिश्तों की दुआ है माँ 
तू सवेरा ज़ुदा है माँ!

Monika Jain 'पंछी'
(09/06/2011)

Poem on Mother's Day in English

Mother is the most important person in our life. Mothers are strong, loving, caring, kind, our best friend, teacher and like god for us. They are incomparable.

(1)

You’re Most Beautiful

Mother!
You are God on earth.
You are creator of universe
Who gives birth.

You are like tree
Who gives shadow to birds.
You are like sun
Who gives light to the world.

You are like soil
Who gives life to plants.
You are most unique
We can't live without.

You are like rain shower in summer
You are like spring in autumn of life.
You always protect us from dangers
You are most beautiful and divine.

Monika Jain 'Panchhi'
(09/06/2011)

(2)

A Tribute to Mom

Mom,
May be sometimes I embarrassed you
Probably, I didn't listen when you say something
But still you say you proud on me
Even though I made you angry.

Mom,
Now I realize and I'm sorry
If I ever hurt you or said anything stupid
And I'm way too old to cry.

Foster care, 
you did your best to raise your sons
Our every little wish you tried to fulfill
Been a Santa on all christmas's
But you never let us see what you are hiding.

So many stresses and pain behind your smile
Thank you for being my mom and dad
Mom, please accept this as a tribute
My life is always owe to you
But I know I can't repay you.

Now it's my responsibility
to treat you as a God
Give you every little thing
So just put finger on any spot
Even I would sell myself
No matter what the cost.

Now if I get a new life
One without any cause
I'd spend it to fulfill your hopes.

Though, if it's my last ride
I am not afraid to die
Remember Mama,
you made me strong
And if you get this message
after I gone
Just know, I proudly say
I am your son.

And I'll introduce myself to God
I'm Chetan Dheer and son of Suman
And pointing at you from there
There she is my Mom.

Chetan Dheer