March 31, 2011

मेरी चाह - Poem on My Wish (Dream) in Hindi

मेरी चाह 


शब्दों को नहीं आँखों को पढ़ना चाहती हूँ
लफ़्ज़ों को नहीं ख़ामोशी सुनना चाहती हूँ
हर कोई खुली किताब नहीं होता
मैं तो बंद किताबें पढ़ना चाहती हूँ। 

ख़ामोश सवालों को पढ़ना चाहती हूँ
अनकहे ख़यालों को सुनना चाहती हूँ
सच होते हुए सपनों को नहीं
मैं तो अधूरे ख्वाबों को पढ़ना चाहती हूँ। 

चेहरे की सच्चाई पढ़ना चाहती हूँ
बातों की गहराई सुनना चाहती हूँ
हर किसी का दिल पाक नहीं होता
मैं तो नापाक दिलों के इरादे पढ़ना चाहती हूँ। 

दबी हुई आवाज़ सुनना चाहती हूँ
रोके गये आगाज़ सुनना चाहती हूँ
थिरकते कदमों की ताल नहीं
मैं तो तड़पते दिलों का हाल सुनना चाहती हूँ। 

Monika Jain 'पंछी' 


कलम से अपनी मैं कागज पर 
आग लिखना चाहती हूँ 
कितनी ताकत है शब्दों में 
आजमाना चाहती हूँ। 

चाहती हूँ जल जाये इसमें 
नफ़रत के सारे सौदागर 
चाहती हूँ बन सोना निखरे 
प्यार के है जो ढाई आखर। 

चाहती हूँ मैं चिता जलाना 
अन्याय और अनीति की 
चाहती हूँ मैं ज्योत जलाना 
प्यार और प्रीति की। 

बरस पड़े अंगारे बनकर 
शब्द मनुजता के दुश्मन पर 
टिम-टिम करते तारे बनकर 
भारी पड़े अंधेरों पर। 

रोशन कर दे जहाँ जो सारा 
वो दीपक बनना चाहती हूँ 
कलम से अपनी मैं कागज पर 
आग लिखना चाहती हूँ। 

Monika Jain 'पंछी'


आज लिखना चाहती हूँ मैं वह सब 
जो बहुत कुछ लिखते हुए भी 
अनलिखा रह जाता है। 

लिखना चाहती हूँ वह दर्द 
जो अक्सर मुस्कुराते होठों में 
छिपा रह जाता है। 

लिखना चाहती हूँ वह प्यार 
जो इजहार-ए-मोहब्बत में भी 
बयां नहीं हो पाता है। 

हाँ लिखना चाहती हूँ वह द्वेष 
जो दिलों में पाता है पनाह 
पर नज़र नहीं आता है। 

हाँ-हाँ लिखना है मुझे वह आक्रोश 
जो बेरहम मजबूरियों के तले
दबा रह जाता है। 

क्यूँ ना लिखूं मैं वह जहर 
जो बड़ी ख़ामोशी से 
अपना असर दिखाता है। 

लिखूंगी मैं वह ममता 
जिसे एक अहसान फरामोश
नहीं समझ पाता है। 

लिखना ही होगा वह स्वार्थ 
जो बड़ी आसानी से 
स्थानांतरित हो जाता है। 

लिखनी है वह मासूमियत 
जिसे एक धूर्त बड़ी चालाकी से 
निगल जाता है। 

उफ़! कब से लिख रही हूँ 
पर जो कहना है मुझे 
वह सदा अनकहा ही रह जाता है। 

Monika Jain 'पंछी'

Lots of things remain unrevealed in this world. Lots of dreams are unfulfilled. Lots of voices are suppressed. There are many eyes questioning about the incidents happening around the world without speaking a single word. People wear mask to hide their reality. They carry smile, gentleness, respect, humility and seems very decent, but as soon as they get chance they execute their evil intentions. Here is a wish to read eyes, a wish to listen silence, a wish to hear suppressed screams, a wish to read unfulfilled dreams, a wish to feel, understand and share the pain of broken hearts and a wish to understand the evil intentions too.

March 27, 2011

Poems about Life Struggles in English


Life is a Game

Life is a game
You may be a player or
You may be a toy.
Always be a player
Never be a toy.
If you will be player
You can rock the world
And if you will be a toy
You will be played by
each and every one.

Monika Jain ‘Panchhi’


What is Life?

What is life?
Flowing water...
A never ending story...
After departure.

Thirst of flying bird
Search of misguided traveller
Hope of crying eyes
Feel of pain and pleasure.

Bread of poor
Castle of rich
Peak of mountain
Pearl of deep.

Sleeping in thorns
Sleeping in flower bed
Sometimes sad and
Sometimes glad.

What is life?
Flowing water...
A never ending story...
After departure.

Monika Jain 'Panchhi'


Who Makes The History?

Life is not interesting to those
Who always live in shadow of flowers
Life is enjoyable to them
Who also know the pain of thorns.

Food is tasty for the one
Who can live without eating for some days
Nights are calm for the one
Who works hard whole the day.

Who never dry in the sunlight
can't find the nectar in water
Who is sitting on the edges
can't bring pearls from the water.

Who is not the part of rat race
and makes his own way and pace
His guts, courage and determination
takes him to the destination.

One who count his blessings instead of his crosses
One who count his gains instead of the losses
He always enjoy the life instead of his woes
His failures takes him on the way to success.

Who always greet life with a cheer
Who is courageous enough to fight with the fears
Who don’t give up when everything is wrong
Only he can make the life a beautiful song.

One who takes all the constraints in a positive way
One who keeps all the negative thoughts far away
He can live life to the fullest
and only he can get happiness and success.

One who keeps the hopes alive
and never afraid of difficult time
He makes the history
who faces all the odds to survive.

Monika Jain 'Panchhi'
(Inspired by Ramdhari Singh Dinkar)


Keep Going

Life is challenging at every step
Keep going without any wait.

Whether you don't get any message of hope
Whether to climb on mountain there is no rope
Whether there is no lamp in the dark
Whether there are no stars to spark.

But don't afraid of any threat
Keep going without any wait.

Whether the destination is far away
Whether thorns are scattered on the way
Whether the path is filled with dust
Whether there is no one to trust.

There is nothing you can’t get
Keep going without any wait.

Monika Jain 'Panchhi'

With joy, happiness, pleasure and success life also comes with challenges, problems, sorrow, defeat and constraints. But life is beautiful. We only need to face all the challenges and adversities with a positive attitude. We must get ready to deal any ups and downs with courage and patience. Instead of sitting and crying about anything bad happens with us, we should learn to overcome it. We should become optimistic and see the bright side of things. Hard times come and go. Perceive it in such a way that it make yourself a stronger and better person. There can be no gain without pain. So strive hard to get success in life.

March 22, 2011

Poem on About Me, Myself, I in Hindi

पहेली हूँ मैं

दुनिया की भीड़ में अकेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

आकाश कवि की कविता
दिशा विहीन एक सरिता
अदृश्य ख्वाबों की सहेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

पंख बिना ही उड़ने वाली
दिशा बिना ही बहने वाली
बिना राह की चलने वाली अलबेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

शब्द विहीन एक परिभाषा
सोयी आँखों की जाग्रत भाषा
ख़ामोश ज़ुबा की भाषा अनकही हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

Monika Jain 'पंछी'

Poem about Myself, Me and I in English

I Am A Poem...

I am a puzzle no one can solve
I am a notion no one can evolve.

I am a river with no direction
Flying bird with no restrictions.

Feel alone in worldly crowd
Poem of sky raining from clouds.

Friend of dreams never seen
Love to do that never been.

Like to walk without a way
Love to talk without a say.

Enjoy the fly without any wings
I am a cuckoo who love to sing.

Full of love, bright and coy
Affection and compassion are my joy.

Creative, self confident and smart
Sensitive and emotional at heart.

Love to write without any words
Love to draw wings of birds.

Lover of nature, sun and trees
A colored butterfly in cool breeze.

Lots of pain without relief
But I can hide all my grief.

Keep myself away from fears
Though fighting with struggles for many years.

I am stronger than any evil
Brave and courageous in the eye of a devil.

Battles in my heart shatters me apart
But I can stand adding pieces of my heart.

I am a flame no one can put out
I am a riddle no one can sort out.

I am a portrait no one can finish
I am a fire no one can extinguish.

I am a sky having no hillt.
I am a poem no one can complete.

Monika Jain 'Panchhi'

March 21, 2011

Poem on Tears in Hindi


अश्कों से मैं रो न सकी

दर्द ए दिल का हाल
ज़ुबा से बयां मैं कर न सकी
दिल में बहुत रोई 
पर अश्कों से मैं रो न सकी। 

भीगा है मन मेरा
पर सूनी है ये निगाहें 
सिसक सिसकती रूह मेरी
कुछ भी ना कह पाए। 

इस गम को ज़ज्ब किया मैंने
पर लफ़्ज़ों से कुछ कह न सकी
दिल में बहुत रोई
पर अश्कों से मैं रो न सकी। 

मुस्काते होठों में भी 
गम का एक साया है
ख़ामोश ज़ुबा का दर्द
क्या कोई समझ पाया है?

कोई सुन ले मेरी ख़ामोशी
पर शब्दों से मैं कह न सकी
दिल में बहुत रोई
पर अश्कों से मैं रो न सकी। 

Monika Jain ‘पंछी’


कब तक अश्कों को पीती रहूँ मैं?

कब तक खुद से दगा करती रहूँ मैं 
कब तक सपनों में जीती रहूँ मैं 
अधरों की फीकी मुस्कान के लिए
कब तक अश्कों को पीती रहूँ मैं? 

पलकों में छिपे आंसू पूछते हैं मुझसे
क्यों हमें बहने नहीं देती 
होठों में छिपा दर्द पूछता है मुझसे
क्यों मुझे कहने नहीं देती?

कब तक दिल की आवाज़ 
अनसुनी करती रहूँ मैं 
कब तक सपनों में जीती रहूँ मैं 
अधरों की फीकी मुस्कान के लिए
कब तक अश्कों को पीती रहूँ मैं?

आंधियाँ आती है, तूफ़ान आते हैं
पलकों में छिपे मोती गिरना चाहते हैं
तड़पती रूह, सिसकती आँहे
हर कदम पे दम तोड़ती मेरी राहें। 

कब तक उन राहों को ढूँढती रहूँ मैं 
कब तक सपनों में जीती रहूँ मैं 
अधरों की फीकी मुस्कान के लिए
कब तक अश्कों को पीती रहूँ मैं?

छाया है घनघोर अँधेरा
पास नहीं कोई भी मेरा
घुट-घुट कर जीने को मजबूर
काँपता है ये दिल मेरा। 

कब तक टूटे दिल की धड़कने 
सुनती रहूँ मैं 
कब तक सपनों में जीती रहूँ मैं 
अधरों की फीकी मुस्कान के लिए
कब तक अश्कों को पीती रहूँ मैं?

Monika Jain 'पंछी'


एक नदी 

मेरी आँखों में बसती थी कभी एक नदी…

छलक आता था उसका पानी 
जब भी देखा करती थी वे 
80 पार की उस बुढ़िया को अकेले ही 
झोपड़ी में चूल्हे के सामने खांसते हुए। 
अपने पेट की आग को 
बुझाने के उपक्रम में 
जल जाते थे उसके हाथ 
सिकती रोटियों की भाप से
और छलक आते थे मेरे आंसू 
उसके दु:खों के ताप से। 

मेरी आँखों में बसती थी कभी एक नदी…

भीग गए थे मेरी पलकों के कोर 
जब मैं बीमार बिस्तर पर लेटी 
और तुम मेरे हाथों को थामे 
घंटों बैठे रहे थे मेरे पास 
मेरे सर को सहलाते तुम्हारे हाथों का 
कितना मीठा सा था अहसास। 

मेरी आँखों में बसती थी कभी एक नदी…

चिड़ियों का उजड़ा घरौंदा हो 
या एक चींटी को भी किसी ने रौंदा हो 
एक फूल का जीवन छूटा हो 
या स्वप्न किसी का टूटा हो
इन आँखों का नम हो जाना आम था 
जरा सी बातों पर पिघल जाना 
मेरे दिल का अजीज काम था। 

मेरी आँखों में बसती थी कभी एक नदी…

पर वक्त के कुछ आघातों ने 
और अपनों की कुछ घातों ने 
सुखा दिया है इनका पानी 
अब नहीं छलककर आती हैं ये आसानी से 
सुनी हो चाहे इन्होंने
कोई कितनी भी उदास कहानी। 

मेरी आँखों में बसती थी कभी एक नदी…

Monika Jain ‘पंछी’

Broken Heart Poetry in English


How Long?

How long I'll betray myself
How long I'll live in dreams
for the sake of this fake smile
How long I'll hide my scream?

My hidden tears often ask me
Why don't you let us flow
My hidden pain often complain
Why don't let others know?

How long I'll fool my heart
My whole world has fallen apart
How long I'll be in illusion
I know it’s not the real solution.

I wanna cry, I wanna scream
I wanna forget all my dreams
I wanna erase all bitter memories
I wanna end all painful stories.

Monika Jain ‘Panchhi’


I Wanna Cry

Darkness surrounds me is getting bold
I am alone with no one to hold.
My world is left only with pain
Everything is lost, nothing to gain.

I am frightened and trapped
living a torturous nightmare
My life is filled with
emptiness and despair.

Now it’s difficult to wear smiling mask
Laughing in pain is the most difficult task.
Now this angel has lost her grace
The situations are too difficult to face.

I wanna cry for everything i have lost
I wanna cry because I’m tired of being strong.
I wanna cry because i can’t pretend anymore
I wanna cry because I am fed up for sure.

I wish I could be a kid again
I wish there would be someone to share my pain.
I wanna cry for hours, days and weeks
I wish there would be someone
to kiss tears of my cheeks.

Monika Jain ‘Panchhi’


Old Memories Will Always Remind

Happiness! don't knock my door
I can't welcome you
Dreams! please search for other eyes
I am unable to hold you.

My heart is filled with pain
My eyes are filled with tears
How to welcome you both
When life is full of fears.

With so many broken dreams
I can't dare to dream again
With pieces of broken heart
I am unable to love again.

Love is not a game
that can be played any number of times
However hard you try
The old memories will always remind.

Monika Jain ‘Panchhi’ 


Keep Your Sympathy

I don't need your sympathy
I don't need your condolence.
No one can take others pain
in exchange of happiness.
This is just a trade of deception
Love is a lie and mere illusion.

I am standing on the way
at the end of that  
there is always a new question.
Will you walk with me knowing that
We will never reach to any destination.

I know you are scared
and wanna neglect your promises.
That’s why I said,
‘Keep your sympathy with you sweetheart!
That can never heal wounds of my heart.’

Monika Jain ‘Panchhi’


It’s Too Late

Your empty promises and lies
left me with broken and shattered heart
My trust and hope all is lost
It’s me who is paying the cost.
You say sorry and do it again
Finally I realized I made a mistake
But alas! it’s too late.

Monika Jain ‘Panchhi’

March 16, 2011

Romantic Love Poem in Hindi


तुम मिले 

तुम मिले तो लगा जैसे
सोया ख़्वाब मेरी पलकों में फिर से जागा है 
दम तोड़ चुका मेरे होने का अहसास फिर से जागा है 
जागे हैं अधूरे सपने पूरे होने की ख्वाहिश में 
चलने लगी हैं सांसें तुझसे मिलने की चाहत में। 

तुम मिले तो मिल गया मुझे मझधार में एक किनारा 
अरमां मेरे यूँ थामने तू आया है बन सहारा 
मुस्कुराहटें तेरी मेरे होंठों पर खिलने लगी 
रोशन तेरी ये आँखें मेरी आँखों में मिलने लगी। 

ख़्वाब जो सोये थे अब तक पलकों में जगने लगे हैं 
अरमान जैसे बनके घुंघरू पैरों में बजने लगे हैं 
अब ना रोक पायेगा कोई भी हमारा मिलन 
इस आस में ये फूल देखो सेज पर सजने लगे हैं। 

तेरे हाथों की छुअन से महकते मेरे लोम हैं 
पंख मेरे जी उठे तेरी बाहों में जो व्योम है 
तेरे स्नेह के बादल की बारिश में भीग जाने को 
खिल उठा, पुलकित हुआ मेरे तन-मन का रोम-रोम है। 

शाम जैसे बन गयी है सुरमई सुहानी 
गा रही है कोकिला तेरी मेरी कहानी
बदली-बदली सी निशायें, बदला मेरा व्यवहार है 
खुशियों की जैसे बारिश हो, ऐसा तेरा ये प्यार है। 

टिकते नहीं हैं पाँव मेरे इस जमीं पर आजकल 
तेरे नशे में उड़ रही हूँ हर घड़ी मैं हर पल 
तितलियाँ और फूल, भँवरें अब मुझे भाने लगे हैं 
गम, उदासी और आंसू दूर अब जाने लगे हैं। 

बन गया हर दिन मेरा जैसे कोई त्योहार है 
बसंत ही बसंत है, बहार ही बहार है 
चांदनी बिखरी पड़ी जिस ओर भी नज़रें उठे 
तू चाँद मेरा बन गया ये तारों की पुकार है। 

Monika Jain ‘पंछी’


बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास

बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास
फिर हम तुम सवार हो चलेंगे उसके पास 
नीदों में उसे जी भर के देखेंगे 
सपनों में छोड़ आयेंगे मुस्कुराहटों की उजास
बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास। 

सपनों में होगी एक बादलों की दुनिया
बादल ही नाव और बादल ही नदियाँ 
बादलों की ओट में उसकी-मेरी लुकाछिपी 
पल-पल बढ़ाएगी मिलने की प्यास 
बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास। 

छिपते-छिपाते जब होंगे हम सामने 
चमका के बिजली तुम यूँ गरजना
सहम के उसके सीने से लग जाऊँ 
बनकर यूँ पानी फिर तुम बरसना
हर बूँद के साथ लाना भरोसे का अहसास 
बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास। 

बारिश में नाचेंगे बन के मयूर 
बूंदों से छलकेगा प्यार का नूर 
नूर में होंगे विश्वास के मोती 
प्रेममयी दुनिया की आस के मोती
इन मोतियों को लुटाना है जब तक है सांस 
बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास। 

बादल के पंखों से भरके उड़ान 
उस संग मैं गाऊँगी प्रेम का गान 
नफरत की मिट्टी को बूंदों से धोकर 
ईर्ष्या और घृणा को हर दिल से खोकर 
हर फिर जगायेंगे प्रेम की आस 
बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास। 

हर दिन यूँ उसके सपनों में जाकर 
जगाना है मुझको उसमें भी प्रेम 
प्रेम में कितनी होती है शक्ति 
इसका उसे दिलाना है विश्वास 
बादल तुम रात चुपके से आना मेरे पास
फिर हम तुम सवार हो चलेंगे उसके पास। 

Monika Jain ‘पंछी’