December 25, 2012

Poem on Sparrow Bird in Hindi


मेरी चिड़िया मुझको ला दो
(कृषि गोल्डलाइन में प्रकाशित)

मैं जब छोटी गुड़िया थी
अंगना में आती चिड़िया थी। 

चुग्गा चुगने जब वो आती
उसे देखकर मैं मुस्काती। 

फुदक-फुदक वह गाना गाती
मैं उसको वह मुझे नचाती। 

अब जब मैं हो गयी सयानी
क्यों नहीं आती चिड़िया रानी?

सूना हो गया अंगना आज
ना देती चिड़िया आवाज़। 

कहाँ गयी हो चिड़िया रानी 
चुग लो दाना, पी लो पानी। 

चिड़िया के रैन बसेरों को
मानव ने काटा पेड़ों को। 

घर ना छीनो चिड़िया का
बचपन ना छीनो गुड़िया का। 

फिर से तुम कुछ पेड़ लगा दो
मेरी चिड़िया मुझको ला दो। 

Monika Jain 'पंछी'
(25/12/2012)

Poem on Sparrow Bird in Hindi

December 24, 2012

Poem on Butterfly in Hindi


तितली आई

कल घर में एक तितली आई
उसे देखकर मैं मुस्काई।

मैंने बोला तितली रानी -
शरबत लोगी या फिर पानी?

वो बोली - कोई फूल खिला दो
मुस्कान मेरे चेहरे पर ला दो।

फूलों का मैं गमला लायी
जिसे देख तितली हर्षायी।

मैंने पूछा तितली से -
इतने रंग लायी हो कैसे?
मुझको भी उड़ना सिखलादो
रंग मुझे भी कुछ दिलवादो।

तितली मेरे पास में आई
कलम पे मेरी वो मंडराई -
कलम तुम्हारी उड़ान भरेगी
इस जग का हर रंग लिखेगी
पंख और रंग दोनों है इसमें
तभी तो मुझको लिखा है इसने।

बात मेरी जब समझ में आई
कलम पे मेरी मैं इतराई।

Monika Jain 'पंछी'
(10/06/2012)

December 17, 2012

Stop Rape Status in Hindi

Stop Rape Status

  • 11/08/2016 - कविता है...कविता नहीं है…
    क्रांतिकारी कविता है...अश्लील कविता है…
    कवि से कविता है...कविता से कवि है…
    कवि पुरुष है...कवि स्त्री है…
    फेक आई डी की कविता है...पाठक ही फेक है…
    ये तमाम द्वन्द्व स्वाभाविक हो तब भी बहुत अस्वाभाविक हो जाते हैं जब बस कवि और कविता बचती है, उसके शब्द बचते हैं लेकिन उसका विषय और उसकी पृष्ठभूमि नदारद हो जाती है। बलात्कार होता है, यह हमारी चिंता का विषय नहीं। हमारी चिंता का विषय उस पर लिखी गयी कविता है। और इस 'हम' से न लेखक अछूते हैं, न पाठक।
  • 19/07/2014 - बहुत हो लिए हम सब शर्मसार! कितना शर्मसार होएँगे और कब तक होते रहेंगे? शर्म आने के लिए दुनिया में शर्म जैसी कोई चीज बची भी है? इस शब्द को कुछ दिन खूँटी पर टांगते हैं और सीधा मुद्दे पर आते हैं। आज से, और अभी से हम सब लोग अपने जीवन में या खुद से जुड़े लोगों के जीवन में ऐसा कौनसा बदलाव करने वाले हैं जिससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन घटनाओं में कुछ तो कमी आये? ये बलात्कारी आसमान से तो टपक रहे नहीं है। हमारे ही घरों में पैदा हो रहे हैं। या फिर ये बलात्कार पुरुषों के किसी नए फैशन के रूप में आया है, वैसे ही जैसे ये शर्मशार शब्द आजकल बड़ा चलन में है। जो भी हो पर मैं जानना चाहती हूँ, शर्मसार होने के अलावा हमारी और क्या-क्या भूमिका होनी चाहिए? 
  • 23/01/2014 - बलात्कार! बलात्कार! बलात्कार! आखिर कब तक सुनना पड़ेगा ये शब्द?...कब तक? जिस शब्द को सुनकर, देखकर और पढ़कर ही रूह काँप उठती है, उसे अंजाम देने वाले दरिन्दे कौनसी दुनिया से आते हैं? अब तो उन्हें कोई अपशब्द कहना उन शब्दों का भी अपमान लगता है। जिस तरह से ये बलात्कार शब्द हमारे जीवन में अन्य सामान्य से शब्दों की तरह घुलता जा रहा है...बहुत डर लगता है। कहाँ जा रहा है हमारा समाज? कोई तो अंत हो ऐसी घटनाओं का? कभी तो ऐसा दिन आये जब ये शब्द सुनने को ना मिले...कभी तो? 
  • 18/12/2012 - हर बलात्कार की घटना पूरी नारी जाति की स्वतंत्रता और सहजता के घेरे को छोटे से छोटा करती जाती है और कहीं न कहीं हमारी मासूमियत का खात्मा भी। खुद का कहूँ तो कुछ समय पहले तक रात के 9-10 बजे भी अकेले घर से बाहर निकलने में कोई हिचक नहीं होती थी। परीक्षा के समय रात के 2-3-4 बजे भी छत पर अकेले पढ़ लेती थी। घर से दूर अनजाने शहर में कई जगह अकेले चले जाती थी। माँ-पापा के जरुरी काम से बाहर जाने कई बार अकेले घर पर रह चुकी हूँ। आवश्यक होने पर लड़कों से भरी क्लास में अकेले पढ़ चुकी हूँ। बाहरी दुनिया से इतनी अनजान कि कोई कुछ पूछे तो उसका सीधा-सीधा और सही जवाब देना ही आता था। कुछ छिटपुट घटनाएँ होती रही लेकिन उन्होंने तब तक कोई डर पैदा नहीं किया था। लेकिन अब जैसी घटनाएँ सुनने में आ रही है...कभी-कभी वह भी सोचना पड़ता है जो कभी नहीं सोचना चाहती थी। क्या स्त्री होना कोई अपराध है? या फिर समाज की नज़रों से परिभाषित तथाकथित स्त्री के तमगे को भूलकर एक इंसान की तरह जीने की ख्वाहिश कोई जुर्म? 
  • 29/12/2012 - मौत दामिनी की नहीं हुई है, मौत हुई है इंसानियत की। वह इंसानियत जो आज हर गली, हर चौराहे, हर नुक्कड़, हर घर और हर दिल में दम तोड़ती नज़र आ रही है। मैंने कई बार पढ़ा है कि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है और मानव जीवन बहुत दुर्लभ है जो 84 हजार योनियों में भटकने के बाद मिलता है। लेकिन यदि यह तथाकथित सभ्य मानव समाज ऐसा है तो नहीं चाहिए ऐसा दुर्लभ मानव जन्म! दामिनी के साथ जो हुआ वह तो वीभत्स था ही...लेकिन मेरी सोच और समझ से बाहर है वे बलात्कार की घटनायें जो अभी भी बदस्तूर जारी है। पिता का बेटी के साथ दुष्कर्म, पड़ोसी का पड़ोसी के साथ दुष्कर्म, 6 महीने की बच्ची का बलात्कार ...क्या हो गया है लोगों को? दो पल की भूख के लिए किसी की जिंदगी नर्क से भी बद्दतर बना देने में नहीं हिचकते। एक छोटी मासूम सी बच्ची जिसे देखकर सिर्फ ममता उमड़नी चाहिए उसे भी अपनी दरिंदगी का शिकार बना देने वाले लोग कौनसी दुनिया के हैं?
  • 17/12/2012 - कल से देहली गैंग रेप पर कई पोस्ट्स पढ़ चुकी हूँ। हर बार कुछ भी पढ़ने के बाद बहुत कुछ होता है जो दिल से बाहर निकलना चाहता है, पर शब्दों के मामले में इतना असहाय खुद को कभी भी महसूस नहीं किया। किस अधिकार से कुछ भी कहूँ जबकि जानती हूँ कि कहने के अलावा क्या कर पाऊँगी मैं? अगर मेरा लिखा नहीं बदल सकता दूषित मानसिकताओं को तो ऐसा लिखना निरर्थक ही है न? 

Monika Jain ‘पंछी’

To stop rape is an issue that demands complete change of the system. Let’s start with our home and surrounding. 

December 2, 2012

Poem on Air Pollution in Hindi


प्रदूषण से तार-तार 

सांसों को भी मिलना मुश्किल
शुद्ध हवा का झोंका 
विकास और विज्ञान के नाम पर
कैसा है ये धोखा? 
अपना चैन-ओ-अमन हमने 
कैसी आग में झोंका
हे मानव! अपने क़दमों को
क्यों न तुमने रोका?

कुछ पाने की कीमत 
कितनी बड़ी ये हमने चुकाई है 
खुद अपनी सांसों को 
जहरीली हवा हमने पिलाई है। 
विज्ञान और विकास की ये 
कैसी आंधी आई है
खुद अपने हाथों ही हमने 
अपनी चिता सजाई है। 

नित रोज नए रोगों से लड़ना 
है हमको स्वीकार 
लेकिन कभी ना रोकेंगे 
हम विकास की रफ़्तार। 
प्रदूषण जब तक कर दे ना 
धरती को तार-तार 
तब तक रुकना नहीं हमें 
बिल्कुल भी स्वीकार। 

Monika Jain 'पंछी' 
(11/2012)

December 1, 2012

Poem on Blood Donation in English

(1)

Make Few More Blood Relations

To do a good deed
For someone who is in need
Donate your blood
It’s a great work indeed.

It’s priceless
It’s painless
Providing blood to a bloodless
is sign of kindness.

Donating blood is a gift from us
in the name of humanity
Blood donation is a noble act
It’s also a one way of
losing unwanted weight.

Donating blood is a satisfying feat
Our few pints of blood
can save some few lives
Our little time can give a person
second chance to survive.

Blood donation is not hazardous
It proves to be a healthy habit
It reduces the risk of heart diseases
By donating blood regularly
one can remain fit.

It transcend you above all barriers of
caste, creed and religion
It gives your life a true meaning
and It makes few more blood relations.

Monika Jain ‘Panchhi’
(12/2012)

(2)

Feel Good

Mom!
Don't be angry
It's something to feel proud
Your son doesn't give blood
In fact he takes blessings of many mothers around.

Mom!
There is nothing to worry about
Please try to realize
There is no weakness because of blood donation
In fact it saves someone's life.

Mom!
Our body is able to generate
the amount of donated blood
just within the next 24 hours
and This new blood spread
new energy and new power.

In every three months
We can donate blood
You can also try mom
It will really make you feel good.

Monika Jain 'Panchhi'
(Translation of a Poem)
(12/2012)

November 2, 2012

Poem on Child Labour in English


Save Childhood


Today I saw a child working in a hotel

In my childhood
I used to get food in shining pots
How those dishes were shining
that I never thought.

For me labour was just
to carry my bag to school
and Get tired of playing
with my dudes.

My mom taught
Fruits of labour are so sweet
But for me
Labor was just to read.

I wish that every child
gets pure childhood
Children don't have to work
for their livelihood.

Monika Jain 'Panchhi'
(11/2012)

The issue of child labour is immoral and inhumane but in poor families every member has to work for his/her food. Little children instead of enjoying their school and games have to work to earn money. We can see such children at tea stalls, small restaurants, in mechanic shops, cleaning cars and working as shoeshines and in industries like match making, candle making etc. Child labour is a problem that can not be dealt only by making it illegal. This law is not able to fill the hungry stomachs of the poors. No child does this labour for fun. It is their necessity not the choice which make them work. So to stop child labour there is a need to provide basic necessities to these poor families and to make the education free and compulsory for each and every child. Childhood is the most beautiful and innocent phase in human life. But many children are losing their childhood for the sake of their livelihood. Measures need to be taken to stop this crime against these children.

22/11/2017 - Note : This is my old poem. I want to add something. The exploitation of children by too much labor is absolutely wrong. I didn't do much indoor/outdoor work in my childhood but today i can do all general things/tasks perfectly. But it doesn't happen in case of every child. That's why children (boy and girl both) should do little indoor and outdoor work since childhood. Till they grows they should know doing all general tasks. It's necessary for their overall development and for making them self dependent. It will also easy for them to help old and needy people and they won't be careless and upset at the time of necessity

November 1, 2012

Poem on Feelings and Emotions in English

Sky Dwells in Heart

Sky dwells in heart
Shows different castes.

Clouds of pain rain sometimes
Stars of joy twinkle at times.

Sometimes fog covers the heart
At times light shoos the dark.

Birds of dreams fly with wings
Sometimes frustration too pings.

Sometimes pleasant air flows
At time windstorm blows.

Sometimes rainbow spread colors
At times problems make them blurred.

Up and downs are part of life
In all the odds we should survive.

Whether sorrow or enjoyment
None of these are permanent.

Monika Jain 'Panchhi'
(11/2012)

October 25, 2012

Story of Two Sisters in Hindi


रीना और टीना
(बालहंस में प्रकाशित)

रीना और टीना दोनों जुड़वा बहनें थी पर स्वभाव से बिल्कुल अलग। रीना जहाँ शांत, मृदु और कोमल स्वभाव की थी वहीं टीना बहुत शैतान थी। दोनों आठवी क्लास में पढ़ती थी। रीना पढ़ाई में बहुत होशियार थी और हमेशा क्लास में अव्वल आती थी, जबकि टीना पढ़ाई की चोर थी। वह सजने-सँवरने, खेलने-कूदने और शैतानी में ही सारा समय निकाल देती थी। उसकी शैतानियों की वजह से उसके मम्मी पापा, टीचर और पड़ौसी सभी परेशान थे। हर रोज कोई न कोई उसकी शिकायत लेकर आ जाता था। मम्मी पापा कभी उसे प्यार से समझाते और कभी डांटते पर उस पर कोई असर न होता। जबकि रीना हमेशा अपने मम्मी पापा का कहना मानती और मन लगाकर पढ़ाई करती। इसलिए घर, स्कूल, पड़ौस हर जगह रीना की ही तारीफ होती।

टीना को बहुत बुरा लगता जब हर कोई रीना की ही तारीफ करता। वह सोचती सभी रीना से ही प्यार करते हैं मुझे कोई नहीं चाहता। वह मन ही मन रीना से कुढ़ने लगी थी। उसका रीना से व्यवहार अच्छा नहीं था और हमेशा वह रीना को नीचा दिखाने की कोशिश में रहती।

परीक्षा के दिन आने वाले थे। रीना हमेशा की तरह बहुत मेहनत कर रही थी। वह एक कॉपी में सभी विषयों के संक्षिप्त नोट्स बनाती जा रही थी ताकि परीक्षा के समय वह इन नोट्स को पढ़ सके जिससे उसके समय की भी बचत हो और वह ज्यादा भी पढ़ पाए।

टीना जब रीना को पढ़ते हुए देखती तो मन ही मन जल जाती। वह सोचती इस बार भी अगर ये अव्वल आएगी तो सभी इसकी तारीफों के पुल बांधते न थकेंगे। परीक्षा शुरू होने के एक दिन पहले टीना ने रीना की वह कॉपी छिपा दी जिसमे उसने सभी विषयों के नोट्स बनाये थे।

रीना ने कॉपी बहुत ढूंढी पर उसे कहीं भी न मिली। वह बहुत परेशान हो गयी क्योंकि उसकी सारी मेहनत बेकार चली गयी थी।

मम्मी ने टीना से पूछा, ‘बेटा तुमने रीना की कॉपी कहीं देखी है?’

टीना झल्ला उठी और बोली, ‘मां, मुझे इसकी कॉपी से क्या मतलब है? मैंने कहीं नहीं देखी।’

रीना को जब कॉपी नहीं मिली तो वह किताब लेकर ही पढ़ने बैठ गयी और रात भर जागकर उसने पढ़ाई की। उसके पेपर अच्छे जा रहे थे।

आज गणित का पेपर था। मम्मी ने दोनों का ज्यामेट्री बॉक्स तैयार करके दोनों को दे दिया। रीना तैयार होकर हॉल में बैठी टीना का इंतजार कर रही थी। टीना ने तैयार होने में देर लगा दी तो मम्मी ने उसे आवाज़ दी और कहा, ‘टीना जल्दी नीचे आओ वरना पेपर के लिए लेट हो जाओगी।’

टीना ने अपना बैग उठाया और नीचे आ गयी और दोनों बहने स्कूल के लिए निकल गयी।

स्कूल पहुँचते ही परीक्षा कक्ष में पहुँचने की घंटी बज गयी। टीना ने ज्यामेट्री बॉक्स निकालने के लिए बैग खोला पर बॉक्स वहां नहीं था। तभी उसे याद आया की वह तो अपना बॉक्स बेड पर ही भूल गयी है। टीना बहुत डर गयी। सभी बच्चे परीक्षा कक्ष में जा चुके थे। जब रीना को पता चला तो उसने तुरंत अपना बॉक्स टीना को दिया और कहा, ‘तुम क्लास में जाओ मैं अभी बॉक्स लेकर आती हूँ।’

‘पर घंटी तो बज चुकी है’, टीना ने कहा।

‘कोई बात नहीं मैं जल्दी ही आ जाउंगी।’ यह कहकर रीना घर के लिए निकल गयी।

टीना क्लास में पहुँचकर अपना पेपर करने लगी।

रीना को वापस आने में २० मिनट लग गए। जब वह परीक्षा कक्ष में पहुंची तो टीचर ने उसे लेट आने के लिए बहुत डांटा, पर वह चुपचाप अपनी सीट पर आकर पेपर करने लगी।

टीना ने जब ये सब देखा तो उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने सोचा, ‘जो बहन उससे इतना प्यार करती है उसने उसी के मेहनत से बनाये नोट्स छिपा दिए थे।’ उसे अपनी गलती और व्यवहार पर बहुत पछतावा हुआ।

पेपर ख़त्म होने के बाद जब दोनों बाहर मिले तो टीना रीना के गले लिपट गयी और रोते रोते बोली, ‘तुम कितनी अच्छी हो रीना! मेरे लिए तुमने अपनी परीक्षा की भी परवाह नहीं की और मैं इतनी बुरी हूँ कि मैंने तुम्हारे इतनी मेहनत से बनाये नोट्स छिपा दिए। प्लीज मुझे माफ़ कर दो।’ टीना के मन की सारीरत उसके आंसुओ के साथ बह गयी।

आज पहली बार टीना ने अपनी बहन रीना को गले लगाया था। रीना की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए। उसने टीना का किया सब कुछ भुला दिया क्योंकि इतने दिनों बाद उसे अपनी बहन जो मिल गयी थी। दोनों ख़ुशी ख़ुशी घर चले आये।

Monika Jain 'पंछी'
(25/10/2012)

Story of Two Sisters in Hindi

October 4, 2012

Poem on First Love in Hindi


पहला प्यार 

बीते लम्हे, बीते दिन 
और बीते हैं कई साल
पर मेरी यादों में अब भी 
बसते तेरे ख़याल। 

आया था बन अजनबी
लगता था फिर भी जाना सा
रिश्ता न था तुझसे कोई
फिर भी था पहचाना सा। 

साँसों को सुर दे जाता था 
तेरा सपनो में आना 
सांझ की धीमी पुरवईयां बन 
जुल्फों को बिखराना। 

रोक न पाई तुझको मैं
करके कोई बहाना 
पहले प्यार का ये अहसास
मुझको था तुझे बताना। 

Monika Jain ‘पंछी’
(10/2012)

22/11/2017 - Note : This is my old creation and leading to spirituality, today I am not concerned with such writings.

October 3, 2012

Happy Birthday Poem in Hindi


जन्मदिन 

तेरे सपने सच हो जाए
खुशियाँ पलकों पर सज जाए
मुस्कान तेरे होंठों पर छाये
बार-बार ये दिन आए।

रोशन हर दिन तेरा हो 
दूर-दूर तक उजेरा हो 
आशाओं का डेरा हो
हर पल नया सवेरा हो।

सूरज उजियारा ले आए
पंछी मीठा गीत सुनाएँ 
फूल, तितलियाँ, भंवरे गाएँ
मिलकर तेरा जन्मदिन मनाएँ।

Monika Jain 'पंछी'
(10/2012)

October 1, 2012

Happy Birthday Poems in English


(1)


Happy Birthday Wishes for You

May happiness decorate your eyelids
May smile always shine on your lips.

May your every day be filled with hopes
May none of your ideas ever flop.

May your birthday become illuminating
May your life become fascinating.

May you never feel low
May you ever shine and glow.

May you live for thousands of years
May you never face the fear.

May your all dreams come true
Happy Birthday wishes for you.

Monika Jain 'Panchhi'
(10/2012)

(2)

Happy B’day to Someone

May your every day be filled with
the warmth of sunshine
The sounds of laughter
and happiness of smiles.

May you be blessed abundantly
today, tomorrow and the days to come
Have a fantastic birthday
and many more to come.

I hope you enjoy your day today
with your loved ones
Get everything you asked for
and have a great fun.

Hope this day become the most
memorable day of your life
May your b’day be bright from
morning till night.

May the love of god be with you
all day through his endless grace
May he richly bless your life with
much happiness and success.

May you enrich the lives of
everyone you touch
Happy b’day to someone
I love so much.

Monika Jain ‘Panchhi’
(11/2012)

September 21, 2012

Story of Sparrow and Squirrel in Hindi

Story of Sparrow and Squirrel in Hindi
Story of Sparrow and Squirrel in Hindi

चूंचूं

छत पर सूखे कपड़े लेने गयी तो देखा मोज़े की जोड़ी में से एक मोज़ा गायब था। इधर-उधर तलाश किया पर कहीं भी नज़र नहीं आया। अगले दिन कुछ सामान निकालने के लिए छत पर बने स्टोर को खोला तो अचानक एक गिलहरी फुदकती हुई बाहर निकली। एक पल के लिए मैं चौंक उठी। दूजे ही पल एक पुराने टायर के बीचोंबीच चूं-चूं की आवाज़ करते गिलहरी के चार-पांच नन्हें बच्चे दिखाई पड़े। उन्हीं बच्चों के नीचे मेरा कल का खोया मोज़ा, कुछ दिन पहले खोया एक रुमाल और छोटी-छोटी रंग-बिरंगी कपड़ों की कई कतरने पड़ी थी। उन नन्हें मासूमों को देखकर एक पल के लिए प्यार उमड़ आया पर तभी गिलहरी से अपनी सालों पुरानी दुश्मनी को याद कर मैंने मुंह फेर लिया।

बात तब की है जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ती थी। सर्दी के दिन थे। रोज की तरह मैं सड़क पर हमउम्र बच्चों के साथ खेल रही थी। खेलते-खेलते पानी की प्यास लगी तो दौड़कर घर आ गयी। बरामदे से गुजरते हुए पानी के टैंक के पास कुछ अजीब सा काला-काला नज़र आया। पास गयी तो देखा चिड़िया का एक नन्हा गुलाबी बच्चा जिसके पंख भी नहीं आये थे, ढेर सारी चींटियों से गिरा पड़ा था। शायद ऊपर रोशनदान में बने घोंसले से गिर गया था।

एक पल को मुझे लगा इतना ऊपर से गिरने और इतनी सारी चींटियों के चिपकने से यह तो मर चुका होगा और यह सोचकर मैं उदास हो गयी पर अगले ही पल उस चूजे की हल्की सी हलचल से मन में आशा की एक किरण जागी और मैंने किसी भी तरह उस बच्चे को बचाने के जतन करने शुरू कर दिए।

सबसे पहले फूंक मार-मारकर कई सारी चींटियों को उसके नाजुक गुलाबी शरीर से हटाया। पर इसके बाद भी कुछ चींटियाँ उस पर जस की तस चिपकी हुई थी। मैं भीतर दौड़कर रुई लेकर आई और रुई की मदद से उसके शरीर पर से बाकी चींटियाँ हटाने लगी। किसी चींटी को मारना नहीं था इसलिए लगभग ½ घंटे की मशक्कत के बाद मैं उसके शरीर पर से सारी चींटियाँ हटाने में कामयाब हो गयी। उसके बाद भीतर से दो गत्ते लायी और डरते-कांपते हाथों से उस चूजे को एक गत्ते की मदद से दूसरे गत्ते पर लिया और धीरे-धीरे चलते हुए उसे घर के भीतर ले आई।

उस चूजे की हालत बहुत ख़राब थी। वह एकदम दुबका हुआ था। शायद उसके दिमाग में अभी भी चींटियों का आतंक छाया होगा और उसे दर्द भी तो हो रहा होगा यही सोचते-सोचते मैंने उसे अपने कमरे की स्टडी टेबल पर एक रोयेदार नरम मोटा रुमाल बिछाकर उस पर रख दिया।

मैं रसोई में गयी और रुई का फाहा और एक कटोरी में दूध लेकर आई। डरते-कांपते हाथों से मैं दूध से भरा रुई का फाहा उस चूजे के मुंह के पास ले गयी। लेकिन वह तो डर के मारे टस से मस नहीं हो रहा था। हाथों की कंपकंपी की वजह से दूध कभी दायें गिरता कभी बाएं। कभी इत्तेफाकन उसकी चोंच पर गिरकर दोनों ओर लुढ़क जाता। पर उसने दूध पीने में रूचि नहीं दिखाई। थक हार कर थोड़ी देर मैं पास ही रखे पलंग पर बैठ गयी। फिर कुछ देर बाद रसोई से एक छोटा सा चम्मच लेकर आई और फिर उसे दूध पिलाने की कोशिश करने लगी। कई बार की नाकामयाबियों के बाद एक बार अचानक उसने इतना बड़ा मुंह खोला कि डर के मारे मेरे हाथों से दूध का चम्मच छिटक कर नीचे गिर गया। चम्मच की आवाज़ से कुछ देर वो भी सहम गया पर इसके बाद जब भी मैं दूध से भरा चम्मच उसके पास ले जाती वह धीरे-धीरे अपनी चोंच में भरकर दूध पीने लगता।

मेरे लिए तो यह खेल सा बन गया था। थोड़ी-थोड़ी देर में मैं कभी दूध, कभी पानी तो कभी पानी में आटा गोलकर उसे खिलाने को लाने लगी। अब उसे मुझसे कोई डर नहीं था। मुझे भी उसमें अपना दोस्त नज़र आने लगा और मैं प्यार से उसे चूंचूं कहकर बुलाने लगी। पूरे दिन उसी में लगे रहने के बाद रात में जब सोने के लिए माँ की डांट पड़ी, तब जाकर उसे स्टडी टेबल पर रखकर मैं सो गयी।

सुबह उठी तो सबसे पहले नज़र स्टडी टेबल पर पड़ी। वहां जगह-जगह चूंचूं की बीठ नज़र आ रही थी पर चूंचूं कहीं नहीं दिख रहा था। मैं घबरा कर उठ खड़ी हुई और टेबल के ऊपर-नीचे, दायें-बाएं सब जगह चूंचूं को तलाश करने लगी। तभी नज़र पास ही लगे दरवाजे के पीछे पड़ी जहाँ चूंचूं कोने में दुबका बैठा था। एक गत्ते में उठाकर मैं उसे बाहर खुले आँगन में ले आई। कुछ देर तक यह सोचकर वहां उसे रखा कि उसकी माँ उसे तलाश रही होगी और वहाँ आ जायेगी। पर काफी देर इंतजार के बाद भी कोई चिड़िया नज़र नहीं आई।

पापा तब बाहर थे। मैंने यही सोचा कि जब पापा वापस आयेंगे तो इसे घोंसले में रख देंगे ताकि यह अपनी माँ से भी मिल पायेगा और यह सोचते-सोचते मैं फिर उसे कुछ खिलाने-पिलाने के उपक्रम करने लगी। खिलाने-पिलाने के इस उपक्रम में अचानक चूंचूं पर कुछ दूध गिर गया। वह थोड़ा भीग गया। सर्दियों के दिन थे। खुद भी धूप खाने और चूंचूं को भी थोड़ी सुबह की गुनगुनी धूप खिलाने की सोचकर मैं उसे छत पर ले आई। छत पर मैंने उसे बीच में बनी एक दिवार पर रख दिया और खुद टहलने लगी।

कुछ देर बाद सामने से एक गिलहरी आते हुए नज़र आई। गिलहरी से चूंचूं को किसी भी ख़तरे से मैं अनभिज्ञ थी इसलिए मैंने गिलहरी को नहीं भगाया। पर यह क्या...पलक झपकते ही वह गिलहरी सर्र सी दौड़ती हुई चूंचूं के पास आई और उसे मुंह में दबाकर उसी तेजी से दौड़ गयी। मेरी आँखें और मुंह खुला का खुला रह गया। मैं तेज दौड़कर गिलहरी के पीछे गयी पर कुछ ही देर में वह जाने कहाँ गायब हो गयी। नीचे आकर पीछे गली में जिस ओर गिलहरी गयी थी मैंने चूंचूं को बहुत तलाशा पर चूंचूं मुझे कहीं भी नज़र नहीं आया। मेरा गला रुंध गया और आँखों में आंसू भर आये। मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था। बार-बार एक ही ख़याल दिमाग में आ रहा था कि काश! मैं चूंचूं को लेकर छत पर ना जाती। उस गिलहरी पर भी बहुत गुस्सा आया। पूरा दिन मैं बहुत उदास रही। अकेले अपने कमरे मैं बैठी रही। आँखें बार-बार कमरे में चूंचूं को तलाश रही थी। सुबह जो हुआ उस पर विश्वास नहीं हो रहा था। रात में सोते समय भी बार-बार नज़रे स्टडी टेबल पर जा रही थी, जिसे चूंचूं ने अपनी बीठ से कितना गन्दा कर दिया था। अचानक नज़र फिर दरवाजे के पीछे गयी, पर चूंचूं वहां नहीं था। मैंने करवट बदली और आँखों से आंसू लुढ़क पड़े।

आज उन नन्हें-मुन्हें गिलहरी के बच्चों को देख सालों पुरानी बात याद आ गयी। गिलहरी से सालों पुरानी उस नाराजगी की वजह से मुंह तो फेर लिया पर उनकी चूं-चूं की आवाज़ सुन ज्यादा देर उन्हें देखे बिना नहीं रह पायी। सोचा, क्या पता इन्हीं में से कोई चूंचूं हो जो आज फिर मुझसे मिलने आया हो और इस तरह सालों बाद आज फिर मेरी गिलहरी से दोस्ती हो गयी।

Monika Jain ‘पंछी’
(21/09/2012)

September 14, 2012

हिंदी दिवस पर कविता


(1)

जन-जन तक हिंदी पहुँचा दूँ

कल रात हिंदी को 
मैंने सपने में देखा 
उसके मुखमंडल पर छायी थी 
गहरी उदासी की रेखा। 

मैंने पूछा हिंदी से - 
इतनी गुमसुम हो कैसे?
अब तो हिंदी दिवस है आना
सम्मान तुम्हे सब से है पाना। 

हिंदी बोली यही गिला है
वर्ष का इक दिन मुझे मिला है
अपने देश में मैं हूँ परायी
ऐसा मान न चाहूँ भाई। 

मेरे बच्चे मुझे न जाने
लोहा अंग्रेजी का माने
सीखे लोग यहाँ जापानी
पर मैं हूँ बिल्कुल अनजानी। 

हिंदी की ये बात सुनी जब
ग्लानि से भर उठी मैं तब
सोचा माँ की पीर बटा दूँ
जन-जन तक हिंदी पहुँचा दूँ। 

मोनिका जैन 'पंछी'
(09/2012)

(2)

हिंदी है उत्थान की भाषा 

शब्दों, वर्णों और छंदों की 
हिंदी है अनंत धरोहर 
है असीम इसकी प्रस्तुति 
अनुपम है इसका हर स्वर। 

हिंदी बहता नीर है 
धीर, वीर, गंभीर है 
नहीं है यह मात्र एक भाषा 
हिंदी है जन-जन की आशा।

भाषा नहीं भावना है यह 
अभिव्यक्ति का है आसमान 
परिवर्तन की चिर शक्ति इसमें 
यह है देश का स्वाभिमान। 

स्वतंत्रता आन्दोलन में उभरी 
बन हिंदी एक सशक्त हथियार 
राष्ट्रीय एकता और क्रांति की 
थी यह अनोखी सूत्रधार।

हिंदी है विज्ञान की भाषा 
कला और ज्ञान की भाषा 
जन-जन के उत्थान की भाषा 
गौरव और सम्मान की भाषा। 

मोनिका जैन 'पंछी'
(14/07/2013)

19/03/2018 - नोट : पुरानी कवितायेँ हैं। थोड़ी अतिश्योक्ति है। निश्चित रूप से हिंदी एक समृद्ध भाषा है, लेकिन जबरन उसे पूरे राष्ट्र पर थोपा नहीं जाना चाहिए। न ही किसी अन्य भाषा की प्रतिद्वंदी के रूप में इसे उभारना चाहिए। सभी भाषाएँ अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। हाँ, हम हिंदी से प्रेम करते हैं, उसे बचाना चाहते हैं तो उसके प्रसार में, उसे और अधिक समृद्ध करने में, ज्ञान-विज्ञान के सभी क्षेत्रों का साहित्य और सूचना हिंदी भाषा में उपलब्ध करवाने में हमें प्रयासरत रहना चाहिए। 

September 4, 2012

Poem on Parents (Home, Family) in Hindi


(1)

अपना घर है सबसे प्यारा

घर से निकली पंख पसार
देख लिया सारा संसार
उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम
कर आई चहुँ ओर भ्रमण।

सुन्दर था जग का हर कोना
फिर भी मुझको पड़ा लौटना
सुन्दरता जग की ना भायी
घर की मुझको याद सतायी।

नैना मेरे थे बेचैन
घर लौटी तब आया चैन
माना मेरे दिल ने यारा
अपना घर है सबसे प्यारा।

Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)


(2)

मेरा आसमां 

घर मेरा एक बरगद है
मेरे पापा जिसकी जड़ हैं 
घनी छाँव है मेरी माँ
यही है मेरा आसमां। 

पापा का है प्यार अनोखा
जैसे शीतल हवा का झोंका
माँ की ममता सबसे प्यारी
सबसे सुन्दर, सबसे न्यारी।

हाथ पकड़ चलना सिखलाते
पापा हमको खूब घुमाते
माँ मलहम बनकर लग जाती
जब भी हमको चोट सताती। 

माँ पापा बिन दुनिया सूनी
जैसे तपती आग की धूनी
माँ ममता की धारा है
पिता जीने का सहारा है। 

Monika Jain 'पंछी' 
(09/2012)

September 3, 2012

Breakup (Separation) Poem in Hindi


(1)

क्यों बदल गयी ये कहानी? 

एक दौर था जब
हर बात मेरी
तारीफ़ तेरी पा जाती थी
एक दौर था जब…

फूलों से भी ज़्यादा मेरी
ख़ुशबू तुझको भाती थी
कोयल से भी ज्यादा मीठी
मेरी बोली तुझे लुभाती थी
एक दौर था जब…

मोती बिखर पड़े हों जैसे
मेरी हंसी तुझे यूँ रिझाती थी
जैसे चंदा ने बरसाई चांदी
मुस्कान मेरी यूँ लुभाती थी
एक दौर था जब...

आँखों में मेरी एक गहरा सा
तुझे सागर नज़र जो आता था
घंटो देखा करता मुझको
और मुझमे डूब जाता था
एक दौर था जब…

तेरी ग़लती पर मेरा गुस्साना 
तेरा हँसना और मनाना था
मेरी चुप्पी, मेरा गाना
हर बात का तू ही दीवाना था
एक दौर था जब…

क्यों बदल गया है दौर वो अब?
क्यों बदल गया है पानी?
क्यों बदल गया है तू बिल्कुल?
क्यों बदल गयी ये रवानी?

तेरा ख़्वाब हुआ करती थी मैं
क्यों वहां रही न ये दीवानी?
कुछ भी न रहा पहले जैसा
क्यों बदल गयी ये कहानी?
क्यों बदल गयी ये कहानी?

Monika Jain 'पंछी'
(01/06/2012)

(2)

सूखा गुलाब 

डायरी के पन्नों में रखा वह गुलाब
सूख गया है हमारे रिश्ते की तरह
पर उसमे से आती भीनी ख़ुशबू
आज भी ज़िन्दा है तेरी यादों की तरह। 

ख़ामोश ही रोई, ख़ामोश ही चिल्लाई 
नामंजूर थी मुझे तेरी जुदाई 
हर पल तड़पाती रही मुझे तनहाई
पर कम्बख़्त मौत फिर भी न आई। 

धीरे-धीरे कोशिश की जीने की 
तेरी याद में आया हर आँसू
बिना बहाये पीने की
मनाया दिल को
प्यार सभी का ना पूरा होता है
इसका तो पहला अक्षर ही अधूरा होता है। 

नहीं बहते अश्क अब मेरी आँखों से
जीवन नहीं रुकता
रह-रह कर याद आती तेरी यादों से
रोना भूलने का एक बड़ा दाम जो चुकाया है
मुस्कान को भी सदा के लिए
मेरे होंठों ने भुलाया है। 

आज जब देखा उस सूखे गुलाब को
धीरे-धीरे दम तोड़ते, मेरे हर ख़्वाब को 
आँसू का एक मोती, जाने कहाँ से बह आया
शायद बरसों के इंतज़ार में बहने से रुक ना पाया। 

Monika Jain 'पंछी' 
(09/2012)

09/12/2017 - Note : These are my old writings and leading to spirituality, today I am not concerned with such writings. As spiritualism is a journey from expectations to acceptance, from complaints to responsibility, from dependence to independence, from innocence to flawlessness and from ignorance to awakening. No matter, whoever is in front of us, whatever wrong he did with us, how difficult our situations are, in spiritualism there is no other.

September 2, 2012

Poem on Education System in Hindi


हम हैं पढ़े लिखे अनपढ़

हम पढ़े लिखे सभ्य
अपनी एसी गाड़ियों में चलते हुए
फेंकते हैं कूड़ा-करकट सड़कों पर
मानो फेंक रहे हैं 
अपनी नकली सभ्यता का 
मुखौटा उतार कर। 

हम पढ़े लिखे साक्षर
'यहाँ थूकना मना है' पढ़कर भी
सालों से वहीँ थूकते आ रहे हैं
मानो थूक रहे हैं
अपने साक्षर होने के 
प्रमाण पत्र पर। 

हम पढ़े लिखे शिक्षित
डॉक्टर, इंजीनियर, सीए बनकर
बिकते हैं दहेज के बाजार में ऊँचे दामों पर
हम तो उनसे भी आगे हैं जो
बेचती हैं अपने शरीर को
रोटी के दो टुकड़ों की चाह में। 

क्या सच में हैं हम सभ्य?
क्या सच में हैं हम शिक्षित?
क्या सच में हैं हम साक्षर?

नहीं, हम हैं पढ़े लिखे अनपढ़। 
हाँ, हम हैं पढ़े लिखे अनपढ़। 

Monika Jain 'पंछी'
(09/2012) 

Lack of proper education is the reason of all sorts of evils in our country. Learning should be closely linked to nature and life. But the modern education system is confined to classrooms only, so the link with nature is broken. Education should develop a spirit of rational thinking among people but today's education just help the students to acquire degrees and jobs. Current education system is not able to teach moral values, ethics and humanity. Teaching moral values is very necessary for the overall development of a person. It includes discipline, manners, control over oneself, love, care, sensitivity, politeness, speaking truth, no stealing, being a good citizen etc. To make the children responsible citizens, moral values should be imparted through education. Only then we can fulfill the dream of making India incredible. 

September 1, 2012

Poem on Parents in English

Parents the Unsung Heroes

My house is a banyan tree
My father is the root of this
My mother is the dense shade
It remains till my last breath
It’s my only wish.

Father’s love is unique
Soft as the breeze
Mother’s love is sweetest
Distinct and prettiest.

Mom and Dad
You are the unsung heroes of my life
When I am in dark
You are always there to show me light.

You encourage me
When I am crashing in
You always turn to me
to forgive all my sins.

To fight with my fears
When I am lonely with my tears
To care when I am ill
You are always there
to fulfill my wills.

You both are the reason
Why I’m so strong
With your blessings
Nothing could go wrong.

You are irreplaceable
Your love will never pale
I know, no one can love me
more than you mom and dad
So I need forever
again and again your lovely shade.

Thank you for giving birth to me
Thank you for coloring the rainbow of my life
Thank you for putting the rhythm in my soul
Thank you for standing always by my side.

Monika Jain ‘Panchhi’
(09/2012)

05/03/2018 - Note : These poems are from a kid point of view. As we grow we come to know that our parents are a normal human beings with their good and bad. Expecting idealism from them is not right. Better we improve ourselves for the better tomorrow.

August 5, 2012

Essay on Humanity in Hindi

Essay on Humanity in Hindi

मानवता
(डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में प्रकाशित)

04/2012 - अक्सर ऐसा होता है मंदिर में दर्शन हेतु जाने वाले दर्शनार्थी भीख माँगने वाले गरीब बच्चों के जमावड़े से पीछा छुड़ाते हैं, उन पर झल्लातें है और बिना उनकी मदद किए आगे बढ़ जाते हैं। भगवान की मूर्ति के समक्ष मेवा प्रसाद चढ़ाते हैं, उन्हें वस्त्र आभूषणों से सजाते हैं। दान पेटी में डालने के लिए उनकी जेब से 10,20 या 50-100-500 के नोट भी निकल जाते हैं। मानो, ऐसा करने से ईश्वर उन्हें आशीर्वाद देंगे और उनके कष्टों को हर लेंगे। ये तो ऐसा हुआ जैसे ईश्वर के घर में भी बस पैसे की ही पूछ है तो फिर इंसान और ईश्वर में क्या अंतर रहा?

मंदिरों के निर्माण कार्य में कई लोग करोड़ों का दान कर देते हैं, ईश्वर को खुश करने और समाज में अपना मान सम्मान और रुतबा बढ़ाने के लिए। पर जब प्रश्न किसी गरीब का उठता है तो उस समय कुछ लोगों की मानसिकता उस गरीब की गरीबी से भी ज्यादा गरीब बन जाती है। 

कई बार मेरे जेहन में ये प्रश्न उठते है की मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण कार्य पर करोड़ों रुपये बहाना धर्म है या फिर दर-दर भटकने वाले निराश्रितो के लिए आश्रय का कोई स्थल बनवाना धर्म है? भगवान की मूर्ति के सामने मावे- मेवा का प्रसाद चढ़ाना धर्म है या फिर किसी भूखे गरीब के लिए दो वक्त के खाने की व्यवस्था करना, उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना धर्म है? एक पत्थर की मूर्ति को नये नये आभूषण और वस्त्रों से सजाना धर्म है या फिर एक फटे कपड़ो से ढके अधनंगें तन को कपड़े पहनाना धर्म है? आख़िर क्या है सच्चा धर्म? 

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और ना जाने कितने धर्मों में मनुष्य और भगवान को बाँट कर हम अपनी ढपली अपना राग बजाते रहते हैं, पर अगर ये सब करने की बजाय हमनें मानवता को अपना धर्म बनाया होता और ईश्वर को मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों मे सजाने की बजाय अपने दिल मे बसाकर समाज के दीन- दुखी, निर्धन,निराश्रित तबके के उत्थान के लिए कुछ कदम उठाए होते तो आज हमारा समाज कितना खुशहाल होता और तब शायद हम सच्चे अर्थों में अपना धर्म निभा पाते। 

कुछ गरीब लोग की गयी मदद का अनावश्यक फायदा उठाते हैं और भीख माँगने को ही अपना पेशा बना लेते हैं। गलत कार्यो में धन का उपयोग करते हैं। ये सब तर्क अपनी जगह सही हैं, पर इन सब तर्कों से हम अपने कर्तव्यों से भाग नहीं सकते। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही हमे अपना मानव धर्म निभाना चाहिए। इसके लिए पैसों का दान करने की बजाय हम उनके लिए कुछ ऐसा करें जिससे वे स्वाभिमान के साथ अपना जीवन यापन कर सके।

08/2012 - आज हमारे मानव समाज में जो भी धर्म प्रचलित हैं, वे अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहे हैं। किसी भी धर्म का उद्देश्य होता है मानव को मानव और ईश्वर के निकट लाना और शांति स्थापित करना, पर आज धर्म हमें एक करने की बजाय बाँट रहे हैं। एक धर्म ही कई हिस्सों में बंटा हुआ है। जब धर्म खुद ही इतने हिस्सों में बंटे हुए हैं तो वह हमें एकता और शांति का पाठ कैसे पढ़ायेंगे? कई लोगों के लिए तो धर्म मात्र एक व्यवसाय बन गया है। धर्म विशेष के प्रति कट्टरता व्यक्ति को संकीर्ण विचारों वाला बना देती है और वह सत्य को स्वीकार नहीं कर पाता। धार्मिक कट्टरपंथियों ने तो हिंसा को ही धर्म का हिस्सा बना दिया है और धर्म के नाम पर अशांति फैला रहे हैं और हमारी स्वतंत्रता और ख़ुशियों को तबाह कर रहे हैं। 

ऐसे समय में यह बहुत जरुरी है कि हम एक ऐसे धर्म को अंगीकार करे जो सभी धर्मों का सार हो और हम सभी को एकता के सूत्र में बाँध सके। मानवता (अहिंसा/प्रेम) ही एक मात्र ऐसा धर्म है जो इस संसार को रहने योग्य और शांतिपूर्ण बना सकता है और धर्म के वास्तविक उद्देश्य को पूरा भी कर सकता है। धर्म ने मानव को नहीं बनाया बल्कि मानव ने धर्म को बनाया है और सत्य तो यही है कि संसार के सभी प्राणी मूल रूप से एक से तत्वों से मिलकर बने हैं। रास्ते भले ही अलग हो पर हमारी मंजिल तो एक ही है। 

एक नवजात शिशु सिर्फ प्यार की भाषा जानता है। जन्म के साथ वह किसी भी जाति, धर्म या सम्प्रदाय का हिस्सा नहीं होता बल्कि जिस घर में और जिन लोगों के बीच उसका लालन पालन होता है, उन्हीं के धर्म, परम्पराओं आदि को स्वीकार करने को वो बाध्य होता है। अगर उसी बच्चे का पालन-पोषण किसी और घर में होता तो वह उस घर के धर्म और जाति को अपनाता। इससे यह सिद्ध है कि कोई भी मनुष्य किसी धर्म या जाति विशेष के साथ पैदा नहीं होता। 

मानवता धर्म की सबसे अच्छी बात यह है कि यह सभी लोगों को चाहे वे आस्तिक हो या नास्तिक एक कर सकता है। ईश्वर है या नहीं इसकी चिंता करने की बजाय हमें एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए। अगर हम एक अच्छे इंसान हैं तो फिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम ईश्वर में विश्वास करते हैं या नहीं। अगर हम प्यार शांति और ख़ुशी के बीज बोयेंगे तो बदले में हमें भी ढेर सारा प्यार, ख़ुशी और शांति मिलेगी। 

मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है जो अहंकार, ईर्ष्या, क्रोध और निर्दयता से भरे होते हैं पर फिर भी धार्मिक अनुष्ठानों में निर्लिप्त दिखाई देते हैं। इनमे से कई ऐसे होते हैं जो ईश्वर की भक्ति को सभी बुरे कार्यों को करने का लाइसेंस मानते हैं। क्या ऐसे लोग सच में धार्मिक हैं? कुछ धर्मों में पशुओं की बलि दी जाती है। मुझे आज तक समझ नहीं आया कि किसी की हत्या के द्वारा हम ईश्वर को खुश कैसे कर सकते हैं? 

अगर हम मानवता का अनुसरण करेंगे तो सभी भेदभावों से परे और खुले विचारों वाले बनेंगे। सभी प्राणी हमारे लिए समान होंगे और जरुरतमंद की सहायता ही हमारा धर्म होगा। इससे हम खुद को ईश्वर के ज्यादा निकट पाएंगे और सच्चे अर्थों में ख़ुशी और शांति पा सकेंगे। 

Monika Jain 'पंछी' 

21/11/2017 : नोट : पुराना लेख है। आज भी कई बातों से सहमत हूँ, लेकिन पूरी तरह नहीं। मानवता, अहिंसा और प्रेम के दायरे में मैं सिर्फ मनुष्यों को शामिल नहीं मानती। मानवता, अहिंसा, प्रेम इनकी सीमा हम कहाँ तक तय करते हैं, यह व्यक्ति दर व्यक्ति बदलता जाता है, लेकिन जिसके लिए जितना संभव हो पाए उतना उसे करना चाहिए। समाज सुधार, समाज सेवा ये सब चीजें जरुरी हैं, लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं है। स्थायी समाधान की ओर हमें अध्यात्म ले जाता है। जब तक हम मन के विकारों से पूर्ण मुक्त नहीं होते, तब तक हम सच्चे अर्थों में किसी के लिए कुछ नहीं कर सकते। मानसिक मदद, जागरूकता का तो कोई सानी नहीं है। और जिस क्षण जो चीज हमारे पास न हो वह हम दूसरों को दे ही नहीं सकते। इसलिए अध्यात्म का समावेश जरुरी है। इसके अलावा रास्ते चाहे जितने भी भिन्न हो, सुविधा के लिए नामकरण कुछ भी हो, लेकिन जो वास्तव में धर्म को समझते हैं, उनके लिए ये भेद मायने नहीं रखते। सार और मूल तो एक ही रहता है। हमें उसे ही समझने की जरुरत है। 

August 4, 2012

Poem on Eyes in Hindi

नैन परिंदे

नैन परिंदे भर उड़ान पहुँच गए आकाश
मतवाले पगले ये नैना जाने करते क्या तलाश। 

इन्द्रधनुष से रंग चुराकर ख़्वाब सजाये सपनीले
बदरा संग खेले आँख-मिचौनी ये दो नैन सजीले। 

बदरा से बरसी बूंदे, धरती की प्यास बुझाये 
सूखे रह गए मेरे नैना, जाने किसकी आस लगाये। 

सांझ का काजल भर अंखियन में करते है श्रृंगार 
रस्ता देखे जाने किसका, ना चैन ना करार। 

रात को टिमटिम तारों से करते ये हंसी-ठिठोली
पर चंदा से नज़र चुराए ये दोनों हमजोली। 

शायद चंदा दिखलाता वो ही अनजाना चहरा
फिर हर पल यादों पे हो जाता उस अनजाने का पहरा। 

Monika Jain 'पंछी'
(08/2012)

August 3, 2012

Essay on Humanity in English

Humanity : The Best Religion

Humanity : the only religion that can make this world worth living as the religions we are following today are not serving their real purpose. Religions today are developing as a business and for some people religions are just a product to sell and to market. Spreading love and peace and bringing us closer to ourselves and to God should be the purpose of a religion but instead of uniting religions today are dividing us. Even a single religion has so many divisions.The attachment to a particular religion makes an individual narrow minded and prejudiced towards others and thus keep him away from the truth. Because of his attachment to a particular religion doesn't allow himself to be a liberal and an open minded person. Religious extremists are destroying our peace, freedom and happiness. We should understand what the religion originally desire from us. The essence of all the religions is humanity and we all should practice only humanity to serve the real purpose of all the religions.

Man is not the creation of these religions but religions are created by man. The truth is that all the living beings and our human body is the constituent of five elements kept alive by heat and light. Our source is one and our destination is one. Thus why to adopt different paths? Why to pursue different ideologies?

The best thing about humanity is that it can unite all, whether they are atheists or theists. Love, peace, happiness and God (atheist can replace god with good) all are within us so we don't need to search it anywhere. If we will sow the seeds of love, peace and happiness we will reap tons of love, peace and happiness. A person should not bother himself for the existence of God. One should become a good human being first then it won't matter whether he/she believe in god or not.

I find many people who are full of pride, anger, jealousy, cruelty are also engaged in spiritual pursuits. Most of these worship god to attain materialistic success and some of them have a false notion that ritualistic worship would give them the license to do whatever they like. Such people are not religious at all.

A selfish man who always care for himself, his family, his religion and party can never become impartial, open minded and well wisher of others. Such a man is not useful and advantageous to the humanity in general. I saw some people who don't give food to dogs or poor and search for cows. May be their religion prefers the needs of cows over dogs and humans. I can never understand the logic behind this.

In some religions innocent animals are killed in the name of 'bali'. I can never understand how killing can make god happy. But when you follow humanity all the living beings are alike for you. Humanity is about equality, well wishing of all and selfless thinking. Humanity not only take us closest to god it also helps us in our personal growth.

No religion is greater than humanity. So let's embrace humanity and begin a new way of life full of love, peace and happiness.

Monika Jain 'Panchhi'
(08/2012)

August 2, 2012

Raksha Bandhan Essay in English (Rakhi Celebration Ideas)

Raksha Bandhan (Rakhi) Celebration Ideas

Raksha Bandhan is the indian festival of celebrating bond between brothers and sisters. On this occasion sisters tie rakhi on the wrist of their brothers and pray for the happiness, long life and success of their brothers and brothers take the responsibility of protecting their sisters. This sacred thread of rakhi is considered even stronger than the iron chain. It’s the sign of love and trust between siblings. So how are you going to celebrate this rakhi? This festival is an occasion to make your relation stronger and lively with your siblings and can add some beautiful moments in your life. So don't celebrate this festival as a formality but it should be an unforgettable celebration. Here I am telling you some ideas to make the rakhi celebrations special for your family and siblings.
  • What can be better than a handmade rakhi greeting card and a handmade rakhi thread. If your brother is a kid then you can use cartoon figures to decorate the cards and rakhi threads. Write some thoughtful and cute messages on the greeting card and decorate it with beads, images, glitter and colorful flower pictures.
  • You can prepare a special unique dish for your brother/sister on this occasion. Prepare delicious cuisine and sweets keeping in mind the taste and choice of your brother/Sister or can take your siblings to a restaurant and have a grand lunch and dinner party. 
  • You can celebrate rakhi with your relatives and can plan a small function and fill it with enjoyment by dancing, playing games, cracking jokes, singing songs etc. You can also plan a family picnic or a family movie and dinner. 
  • Without gifts we can't imagine a festival so choose a special unique gift for your brother or sister. You need not to buy an expensive gift beyond your budget but it should be straight from your heart because your feelings behind the gift are much more important than the price of the gift. For your kid brother you can choose games, toys, chocolates and cute kids wears and for elders brother you can choose shirts, watches, mobiles, perfumes, portfolio bags, jackets, wallets, belts, ties, cufflinks and a nice novel if he is fond of reading. For your kid sister you can buy cute teddy bears, chocolates, barbie dolls and cute kids wears and for elder sister you can go for jewelry items like rings, bracelet, anklet, earrings, necklaces, fancy tops etc. If there is anything your sibling has been planning to purchase for a long time but not managed to purchase it yet then it’s a better day to surprise him/her by making his/her wish come true. 
  • You can make a photo collage of your childhood memories with your brother or sister. Gift it to your sibling and see the expressions of his/her face. You can also make a video of the beautiful childhood moments captured in photos. 
  • Wear a traditional outfit on this occasion. You can also gift a unique traditional outfit to your sister or brother. Ask them to wear it then celebrate the whole day with joy and happiness. 
  • In today's busy life festivals bring the moments of happiness in our life. So these festivals should be celebrated in such a way that can leave remarkable and unforgettable impressions on the mind of our loved ones. I wish this festival of Raksha Bandhan will bring lots of happiness in your family. Wish you all a very Happy Rakhi :)

Monika Jain 'Panchhi'
(08/2012)

August 1, 2012

How to Heal a Broken Heart (in English)

How to Heal a Broken Heart

How the heart feels when it is broken by someone? You may feel your life is meaningless. You no longer feel any joy with your family, friends and hobbies. But this is not the end. Here I’m telling you some steps to heal your broken heart and come out of your pain.
  • Our heart suffers mostly because of the attachment we have with the one we love most. So try to detach with the person who broke your heart. Detachment with that person will surely lead to peace and happiness.
  • Checking his/her facebook wall or taking information about him/her from your mutual friends won't make you feel good. So instead of doing this create the list of the activities that make you feel good and involve yourself in such activities. 
  • Till now she/he was your world but now create a new world of new friends who don't know him/her. You can find these friends in hobby classes, libraries, clubs, blog etc. 
  • Jogging, exercising, meditation, yoga, walking all will affect you in a positive ways. 
  • Erase everything related with him/her. Erasing his/her gifts, pictures, messages etc won't erase your memories associated with him/her but it will surely help you in getting out of your pain. 
  • Whenever you start thinking of him/her just say stop and focus on different things and activities. You should develop some hobbies like reading books, writing diary, dancing, sketching, painting, singing etc. 
  • Share your feelings and pain with your close and true friends. Don't hold the pain in your heart. Cry if you want to cry. 
  • Forgive the one who broke your heart because forgiveness will surely release yourself from the captivity of negative and stressful thoughts. Forget and forgive and do a fresh beginning of your life. 
  • Involve yourself in helping the needy ones. Because when you think about the pain of others and try to help them you forget about your pain. 
  • There are many other important things in life than romantic love. So use this opportunity to nurture your friends, family and self. 
  • Think about the positive sides of your break up. 
  • You can't change your past but you can learn from your mistakes. Never repeat these mistakes. 
  • Do one favor with yourself whenever you think about the good things and memories of your relationship also think about the bad memories and bad things he/she did with yourself. It will help in detaching yourself with him/her. 
  • Alter your pain in something very constructive and good things. You can pen down your pain in form of poems, songs, drawings, stories etc. 
  • When you feel you are ready to open your heart again then move on and find someone else to be with.

Monika Jain 'Panchhi'
(08/2012)

July 15, 2012

बेटी ~ Poem on Daughter in Hindi

बेटी 
(अग्र वंदन में प्रकाशित)

(1)

…बेटी…
परियों का रूप है
पावन सी धूप है। 

…बेटी…
एक ठंडी हवा का झोंका है
हर ताप को जिसने सोखा है। 

…बेटी…
भोर का उजेरा है
चिड़ियों का बसेरा है। 

…बेटी…
पंछी की चहचहाहट है
होंठों की मुस्कराहट है। 

…बेटी…
चंदा की चांदनी है
सूरज की रौशनी है। 

…बेटी…
फूलों की बगिया है
बहती हुई नदियां है। 

…बेटी…
स्नेह है प्यार है
मीठा सा दुलार है। 

...बेटी...
मधुर सा संगीत है
खुशियों का गीत है। 

Monika Jain 'पंछी'
(15/07/2012)

(2)

त्याग की सूरत है बेटी
ममता की मूरत है बेटी। 

सस्कारों की जान है बेटी
हर घर की तो शान है बेटी। 

खुशियों का संसार है बेटी
प्रेम का आधार है बेटी। 

शीतल सी एक हवा है बेटी
सब रोगों की दवा है बेटी। 

ममता का सम्मान है बेटी
मात-पिता का मान है बेटी। 

आँगन की तुलसी है बेटी
पूजा की कलसी है बेटी। 

सृष्टि है, शक्ति है बेटी
दृष्टि है, भक्ति है बेटी। 

श्रद्धा है, विश्वास है बेटी
जीवन की एक आस है बेटी। 

Monika Jain 'पंछी'
(07/2012)

17/12/2017 - Note : रचनाओं में अतिशयोक्ति है व अनावश्यक काल्पनिक भार डाला गया है बेटी पर। वर्तमान में वैचारिक तौर पर इनसे खुद को अधिक सम्बद्ध नहीं पाती।
Poem on Daughter (Beti) in Hindi

July 9, 2012

Poem on Save Girl Child in Hindi


कलियों को खिल जाने दो

(1)

कलियों को खिल जाने दो
मीठी ख़ुशबू फ़ैलाने दो
बंद करो उनकी हत्या अब
जीवन ज्योत जलाने दो।

कलियाँ जो तोड़ी तुमने तो
फूल कहाँ से लाओगे?
बेटी की हत्या करके तुम
बहु कहाँ से लाओगे?

माँ धरती पर आने दो
उनको भी लहलाने दो
बंद करो उनकी हत्या अब
जीवन ज्योत जलाने दो।

माँ दुर्गा की पूजा करके
भक्त बड़े कहलाते हो
कहाँ गयी वह भक्ति जो
बेटी को मार गिराते हो।

लक्ष्मी को जीवन पाने दो
घर आँगन दमकाने दो
बंद करो उनकी हत्या अब
जीवन ज्योत जलाने दो।

Monika Jain 'पंछी'
(09/07/2012)

(2)

वंश-वंश करते मानव तुम
वंश बेल को काट रहे हो
एक फल की चाहत में तुम
पूरा बाग उजाड़ रहे हो।

फूल रहे ना धरती पर तो
फल तुम कैसे पाओगे?
अंश काटकर अपना तुम
कैसे वंश बढ़ाओगे?

उम्र की ढ़लती शाम में जब
बेटा खड़ा ना होगा साथ
याद करोगे अंश को अपने
खुद मारा जिसको अपने हाथ।

न कुचलों नन्हीं कलियों को
उनको भी जग में आने दो
बनकर फूल खिलेंगी एक दिन
जीवन उनको पाने दो।

Monika Jain 'पंछी'
(07/2012)

July 2, 2012

Save Girl Child Essay in English

Live and Let Live

Life is considered as an expression of God. Everyone wants to live and we don't have any right to take anyone's life then how can we kill a totally defenseless and innocent being? Mother's womb is considered as the safest place on this earth for a child but polythene bags stuffed with the body parts of female fetuses and newly born babies are the question mark on this statement.

India an IT superpower and one of the fastest developing country represent one of the most adverse Child Sex Ratio (CSR) amongst the southeast asian countries. The child sex ratio in the country is now 914 females per 1,000 males, said to be the lowest since Independence. The government has banned prenatal sex determination tests since 1996 but, as the data shows, this hasn't been very effective. According to a study, up to 8 million unborn females may have been killed either before or immediately after birth during the last ten years. Thus the number of girls is continuously decreasing.

The process of abortion is a painful reality. Sometimes doctors have to cut the baby into several pieces in order to get it out. The larger parts are cut into smaller pieces and spooned out piece by piece and then discarded. American Portrait Films educational presentation 'The Silent Scream' is a film which depicts the story of abortion. It shows how the fetus during abortion attempts to defend themselves. Mother also feels this hustle and bustle of the baby who is being killed.

Murder is murder whether the person killed is 60 years old, 6 years old, 6 months old or a 6 weeks fetus. The unborn baby is also a human being. He/she is not a potential human being rather he/she is a human being with potential. Any of them can become Mother Teresa, Kalpana Chawla, P. T. Usha or Lata Mangeshkar.

The possible causes of this crime are poverty, ignorance of family planning, some traditions and dowry system etc. But instead of removing these causes we are involving ourselves in another crime of killing unborn daughters. Is it reasonable? Why don't we kill the demon of dowry? Why don't we make people aware about family planning? Why innocent beings have to suffer for our doings? How a doctor who has taken an oath to preserve life can perform abortion?

It is said that God created mothers because he could not be present everywhere but I am failed to understand how a mother (in some cases where she is not helpless) can be so ruthless and vulnerable?

Monika Jain 'Panchhi'
(07/2012)

July 1, 2012

Poem on Raksha Bandhan (Rakhi) in Hindi

 (1)

राखी लाये खुशियाँ पूरी

कुमकुम रोली और मिठाई
राखी की थाली सज आई
बहन आज फूली न समाई
संग राखी खुशियाँ घर आई।

बांध हाथ राखी का धागा
और लिया भैया से वादा
भैया मुझको भूल न जाना
जीवन भर तुम साथ निभाना।

भैया बोला बहना प्यारी
तू है मेरी राजदुलारी
आंच न आने दूंगा तुझपे
ये मेरा है वादा तुझसे।

बना रहे ये प्यार सदा
रिश्तों का अहसास सदा
कभी ना आये इसमें दूरी
राखी लाये खुशियाँ पूरी।

Monika Jain 'पंछी'
(07/2012)

(2)

राखी

कच्चे धागों से बनी पक्की डोर है राखी
प्यार और मीठी शरारतों की होड़ है राखी।

भाई की लम्बी उम्र की दुआ है राखी
बहन के प्यार का पवित्र धुआं है राखी।

भाई से बहन की रक्षा का वादा है राखी
लोहे से भी मजबूत एक धागा है राखी।

जांत-पांत और भेदभाव से दूर है राखी
एकता का पाठ पढ़ाती नूर है राखी।

बचपन की यादों का चित्रहार है राखी
हर घर में खुशियों का उपहार है राखी।

रिश्तों के मीठेपन का अहसास है राखी
भाई-बहन का परस्पर विश्वास है राखी।

दिल का सुकून और मीठा सा ज़ज्बात है राखी
शब्दों की नहीं पवित्र दिलों की बात है राखी।

Monika Jain 'पंछी'
(07/2012)

(3)

रहे न बचपन के अहसास

रहे ना बचपन के अहसास
रही ना अब रिश्तों में मिठास
रक्षाबंधन का पर्व रहा ना
पहले जैसा खास।

भाई है अब व्यस्त बहुत
बहना को रही ना फुर्सत
राखी के कच्चे धागों की
अब ना किसी को जरुरत।

रहे ना रिश्तों में ज़ज्बात
रही ना पहले जैसी बात
रक्षाबंधन अब ना लाता
खुशियों की सौगात।

रफ़्तार भरा है ये जीवन
पल भर भी ठहरना नामुमकिन
राखी आती जाती रहती
पर ना थमते भाई-बहन।

लौटा दो बचपन का वो प्यार
रक्षाबंधन का त्यौहार
खट्टी मीठी नोंक-झोंक और
प्यार भरी तकरार।

Monika Jain 'पंछी'
(07/2012)

June 30, 2012

If I were a Bird Poem in Hindi


काश! मैं पंछी होती 

काश! मैं पंछी होती
मेरी हर ख्वाहिश पूरी होती
उन्मुक्त गगन को छूने की
चाह मेरी पूरी होती
काश! मैं पंछी होती।

जाति, धर्म, समाज की
दीवार कोई ना मैं ढ़ोती
ना सरहद की सीमाओं में
बंधी-बंधी मैं रोती 
काश! मैं पंछी होती।

मंदिर, मस्ज़िद, गिरिजाघर 
हर दीवार मेरा डेरा होती
बन हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई 
पहचान मेरी मैं ना खोती 
काश! मैं पंछी होती। 

ना दहेज की ज्वाला में 
मुझको झुलसाया जाता
ना बाल विवाह की बलिवेदी पर 
मुझको सुलगाया जाता
काश! मैं पंछी होती। 

भ्रष्टाचार के दलदल में
मैं ना घसीटी जाती
आतंकवादी साये में
नित रोज ना मारी जाती
काश! मैं पंछी होती। 

ना वोट-वोट करते नेता 
मुझको बहलाने आते 
और जीत का ताज पहन अपने 
वादे सारे भूल ही जाते
काश! मैं पंछी होती। 

ना धन के लालच में आकर 
अपनों का खून बहाया जाता 
ना रिश्वत का खंज़र मुझ पर 
बार-बार चलाया जाता 
काश! मैं पंछी होती। 

ना अमीर की कोठी होती 
ना गरीब की कुटिया
सबसे अलग, सबसे ज़ुदा 
होती मेरी दुनिया 
काश! मैं पंछी होती। 

Monika Jain 'पंछी'
(06/2012)

June 29, 2012

Father's Day Poem in English

Father is one of the most important persons in our life. He shares very deep and faith filled relation with us. Father’s day is celebrated in the honor and respect of all the fathers on the third sunday in the month of june. The below poems are dedicated to all the fathers of this world. Let’s make this day special for our daddies.

(1)

As The Father He is God

Who teaches us to walk
secures us like rock.

Who never looks for praises
every time who encourages.

Who teaches us to read
who is best friend indeed.

Who brings us new toys
with which we all enjoy.

Who loves us a lot
scolds at our faults.

Who is loving and kind
can read our minds.

Who shows us true ways
to brighten our days.

Who is patient, helpful and strong
when the things go wrong.

Who helps us and hold
at the time of every odd.

Who makes us very bold
as the father he is God.

Monika Jain 'Panchhi'
(06/2013)

(2)

Father is Outstanding

Who is gentle, polite and intelligent
Gives us information about the world’s incidents.

Who is affectionate, dutiful and source of strength
Who is a driving force behind all our achievements.

Who listens, suggests and defends
and support like a best friend.

Who is responsible, caring and sometimes strict
Whenever we need he always assist.

Who is our guiding light
We turn to whom when things are not going right.

Who is outstanding for a variety of reasons
Who is always logical in making decisions.

Monika Jain ‘Panchhi’
(06/2012)

05/03/2018 - Note : These poems are from a point of view of a kid. As we grow we come to know that our father is just a normal person as other human beings. We may not find all the qualities in our father. Sometimes for some people situations may be worse. But the ways are always open for all the boys to be an ideal father for their kids. Instead of expecting It’s always better to become what we want to see. Happy Father’s Day to All. :) 

June 26, 2012

Poem on Save Trees in Hindi


(1)

सुनो-सुनो
(Published in India Link, Grand Rapids, Michigan)

सुनो-सुनो क्या नानी कहती
हवा सुहानी अब ना बहती। 

पेड़ों से जो थी हरियाली
घर का आँगन अब है खाली। 

चिड़िया अब ना गीत सुनाती
घर आँगन में अब ना आती। 

पेड़ों के कट जाने से
रूठे बादल बरसाने से

धरती माँ अब बाँझ हुई
घनघोर अँधेरी साँझ हुई। 

पंछी का रैन बसेरा छूटा
मीठा था जो ख़्वाब वो टूटा। 

विष में घुलती वायु है
घटती मानव की आयु है। 

पेड़ों से मानव प्यार करो
मित्रों सा व्यवहार करो। 

पेड़ लगाकर मानव तुम
खुद अपना उपकार करो। 

Monika Jain 'पंछी'
(26/06/2012)
Poem on Save Trees in Hindi

(2)

वृक्ष
(शरद कृषि, CITA में प्रकाशित)

वृक्ष धरा के भूषण हैं
करते दूर प्रदूषण हैं। 

हम सबको भाते हैं वृक्ष
हरियाली लाते हैं वृक्ष। 

पत्थर खाकर भी फल देते
हवा के विष को ये हर लेते। 

प्राणवायु हर पल ये देते
फिर भी हमसे कुछ ना लेते। 

क्या दुनिया में कोई भी
पेड़ों सा हितकारी है?

बिना स्वार्थ के सब कुछ देते
पेड़ बड़े उपकारी हैं। 

उपकार मानना दूर ये मानव
कितना अत्याचारी है। 

काट-काट कर पेड़ों को
खुद पाँव कुल्हाड़ी मारी है। 

Monika Jain 'पंछी' 
(26/06/2012)

 Poem on Save Trees in Hindi