December 17, 2012

Stop Rape Status in Hindi

Stop Rape Status

  • 11/08/2016 - कविता है...कविता नहीं है…
    क्रांतिकारी कविता है...अश्लील कविता है…
    कवि से कविता है...कविता से कवि है…
    कवि पुरुष है...कवि स्त्री है…
    फेक आई डी की कविता है...पाठक ही फेक है…
    ये तमाम द्वन्द्व स्वाभाविक हो तब भी बहुत अस्वाभाविक हो जाते हैं जब बस कवि और कविता बचती है, उसके शब्द बचते हैं लेकिन उसका विषय और उसकी पृष्ठभूमि नदारद हो जाती है। बलात्कार होता है, यह हमारी चिंता का विषय नहीं। हमारी चिंता का विषय उस पर लिखी गयी कविता है। और इस 'हम' से न लेखक अछूते हैं, न पाठक।
  • 19/07/2014 - बहुत हो लिए हम सब शर्मसार! कितना शर्मसार होएँगे और कब तक होते रहेंगे? शर्म आने के लिए दुनिया में शर्म जैसी कोई चीज बची भी है? इस शब्द को कुछ दिन खूँटी पर टांगते हैं और सीधा मुद्दे पर आते हैं। आज से, और अभी से हम सब लोग अपने जीवन में या खुद से जुड़े लोगों के जीवन में ऐसा कौनसा बदलाव करने वाले हैं जिससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन घटनाओं में कुछ तो कमी आये? ये बलात्कारी आसमान से तो टपक रहे नहीं है। हमारे ही घरों में पैदा हो रहे हैं। या फिर ये बलात्कार पुरुषों के किसी नए फैशन के रूप में आया है, वैसे ही जैसे ये शर्मशार शब्द आजकल बड़ा चलन में है। जो भी हो पर मैं जानना चाहती हूँ, शर्मसार होने के अलावा हमारी और क्या-क्या भूमिका होनी चाहिए? 
  • 23/01/2014 - बलात्कार! बलात्कार! बलात्कार! आखिर कब तक सुनना पड़ेगा ये शब्द?...कब तक? जिस शब्द को सुनकर, देखकर और पढ़कर ही रूह काँप उठती है, उसे अंजाम देने वाले दरिन्दे कौनसी दुनिया से आते हैं? अब तो उन्हें कोई अपशब्द कहना उन शब्दों का भी अपमान लगता है। जिस तरह से ये बलात्कार शब्द हमारे जीवन में अन्य सामान्य से शब्दों की तरह घुलता जा रहा है...बहुत डर लगता है। कहाँ जा रहा है हमारा समाज? कोई तो अंत हो ऐसी घटनाओं का? कभी तो ऐसा दिन आये जब ये शब्द सुनने को ना मिले...कभी तो? 
  • 18/12/2012 - हर बलात्कार की घटना पूरी नारी जाति की स्वतंत्रता और सहजता के घेरे को छोटे से छोटा करती जाती है और कहीं न कहीं हमारी मासूमियत का खात्मा भी। खुद का कहूँ तो कुछ समय पहले तक रात के 9-10 बजे भी अकेले घर से बाहर निकलने में कोई हिचक नहीं होती थी। परीक्षा के समय रात के 2-3-4 बजे भी छत पर अकेले पढ़ लेती थी। घर से दूर अनजाने शहर में कई जगह अकेले चले जाती थी। माँ-पापा के जरुरी काम से बाहर जाने कई बार अकेले घर पर रह चुकी हूँ। आवश्यक होने पर लड़कों से भरी क्लास में अकेले पढ़ चुकी हूँ। बाहरी दुनिया से इतनी अनजान कि कोई कुछ पूछे तो उसका सीधा-सीधा और सही जवाब देना ही आता था। कुछ छिटपुट घटनाएँ होती रही लेकिन उन्होंने तब तक कोई डर पैदा नहीं किया था। लेकिन अब जैसी घटनाएँ सुनने में आ रही है...कभी-कभी वह भी सोचना पड़ता है जो कभी नहीं सोचना चाहती थी। क्या स्त्री होना कोई अपराध है? या फिर समाज की नज़रों से परिभाषित तथाकथित स्त्री के तमगे को भूलकर एक इंसान की तरह जीने की ख्वाहिश कोई जुर्म? 
  • 29/12/2012 - मौत दामिनी की नहीं हुई है, मौत हुई है इंसानियत की। वह इंसानियत जो आज हर गली, हर चौराहे, हर नुक्कड़, हर घर और हर दिल में दम तोड़ती नज़र आ रही है। मैंने कई बार पढ़ा है कि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है और मानव जीवन बहुत दुर्लभ है जो 84 हजार योनियों में भटकने के बाद मिलता है। लेकिन यदि यह तथाकथित सभ्य मानव समाज ऐसा है तो नहीं चाहिए ऐसा दुर्लभ मानव जन्म! दामिनी के साथ जो हुआ वह तो वीभत्स था ही...लेकिन मेरी सोच और समझ से बाहर है वे बलात्कार की घटनायें जो अभी भी बदस्तूर जारी है। पिता का बेटी के साथ दुष्कर्म, पड़ोसी का पड़ोसी के साथ दुष्कर्म, 6 महीने की बच्ची का बलात्कार ...क्या हो गया है लोगों को? दो पल की भूख के लिए किसी की जिंदगी नर्क से भी बद्दतर बना देने में नहीं हिचकते। एक छोटी मासूम सी बच्ची जिसे देखकर सिर्फ ममता उमड़नी चाहिए उसे भी अपनी दरिंदगी का शिकार बना देने वाले लोग कौनसी दुनिया के हैं?
  • 17/12/2012 - कल से देहली गैंग रेप पर कई पोस्ट्स पढ़ चुकी हूँ। हर बार कुछ भी पढ़ने के बाद बहुत कुछ होता है जो दिल से बाहर निकलना चाहता है, पर शब्दों के मामले में इतना असहाय खुद को कभी भी महसूस नहीं किया। किस अधिकार से कुछ भी कहूँ जबकि जानती हूँ कि कहने के अलावा क्या कर पाऊँगी मैं? अगर मेरा लिखा नहीं बदल सकता दूषित मानसिकताओं को तो ऐसा लिखना निरर्थक ही है न? 

Monika Jain ‘पंछी’

To stop rape is an issue that demands complete change of the system. Let’s start with our home and surrounding. 

December 1, 2012

Poem on Blood Donation in English

(1)

Make Few More Blood Relations

To do a good deed
For someone who is in need
Donate your blood
It’s a great work indeed.

It’s priceless
It’s painless
Providing blood to a bloodless
is sign of kindness.

Donating blood is a gift from us
in the name of humanity
Blood donation is a noble act
It’s also a one way of
losing unwanted weight.

Donating blood is a satisfying feat
Our few pints of blood
can save some few lives
Our little time can give a person
second chance to survive.

Blood donation is not hazardous
It proves to be a healthy habit
It reduces the risk of heart diseases
By donating blood regularly
one can remain fit.

It transcend you above all barriers of
caste, creed and religion
It gives your life a true meaning
and It makes few more blood relations.

Monika Jain ‘Panchhi’
(12/2012)

(2)

Feel Good

Mom!
Don't be angry
It's something to feel proud
Your son doesn't give blood
In fact he takes blessings of many mothers around.

Mom!
There is nothing to worry about
Please try to realize
There is no weakness because of blood donation
In fact it saves someone's life.

Mom!
Our body is able to generate
the amount of donated blood
just within the next 24 hours
and This new blood spread
new energy and new power.

In every three months
We can donate blood
You can also try mom
It will really make you feel good.

Monika Jain 'Panchi'
(Translation of a Poem)
(12/2012)