January 30, 2013

Love (Ishq, Prem) Shayari in Hindi

Love - इश्क / प्रेम शायरी

अब ना रही मुझे किनारों की तलाश कोई
अब तो जी बस तेरे इश्क में डूब जाने को करता है।

तू मुझमें नज़र आने लगा
मैं तुझमें नज़र आने लगी
और रफ़्ता-रफ़्ता प्यार की
मदहोशी सी छाने लगी। 

दूर तक फैली सरसों की चादर 
और शीतल हवाओं के झोंके 
लगता है जैसे तू गुजरा है 
अभी-अभी मेरे गालों को छू के। 

खिलखिलाते गेंदे और ये सूरजमुखी प्यारे 
कोयल, तितलियाँ, भंवरे, डूबे हैं प्रेम में सारे 
प्रकृति का कण-कण लगता है कुछ न्यारा 
करता है मेरे जीवन में प्रेम का इशारा।

सिर्फ एक ख़्वाब सारे ख़्वाबों पर भारी है
किसी एक शख्सियत पे जमाने भर की खुशियाँ वारी है।

मैं समझकर भी नासमझ बन जाती हूँ
जो तुम समझाते हो तो जाने क्यों अच्छा लगता है। 

दिल मेरा गर मजबूर ना होता
तो तू मुझसे इतना दूर ना होता
तुझे बताती मेरा दिल कितना गहरा है
पर छोड़ अभी इस पर मजबूरियों का पहरा है। 

सजा तो मिलनी ही थी
गुनाहे इश्क हम जो कर बैठे
खूबियों को तो छोड़िये
उनकी खामियों पर भी मर बैठे।

तुम्हें कोई अनजाने में भी कुछ न कहे
बस इसलिए उसने कह दिया हकीकतों को भी फसाना।

अब तो आदत हो चुकी है
तेरी नफ़रत के साथ जीने की
तेरे गुस्से और कड़वाहट को भी
प्यार समझकर पीने की।

जो मैं कमजोर होती तो शायद नफरत कर बैठती
प्यार अक्सर मजबूत लोगों के नाम होता है
जोड़ना जहाँ सबसे मुश्किल होता है
वहीँ तोड़ना सबसे आसान काम होता है। 

हमारे रिश्ते को बचाने की मेरी एकतरफ़ा कोशिशे
ना मेरी कमजोरी थी और ना ही मेरी जरुरत
प्यार करना है आसान और निभाना है मुश्किल
तो समझो बस ये मुश्किलों से मेरी चाहत थी। 

राग मेरा छूटा ही था कि द्वेष तुम्हारा शुरू हुआ 
एक तरफ़ा रिश्ता तो देखो अब तक भी है बना हुआ।

अपनी गहराई पे इतना गुरुर न कर ऐ समंदर!
पानी है तेरा खारा, इश्क जहाँ पनप नहीं सकता।

वज़ीफ़ा सी संभालकर रखी थी तिरी मोहब्बत
होश आया और वज़ीफ़े बंट गए। 
(वज़ीफ़ा : Scholarship, Prayers)

शब्दों के गुलदस्ते अब असर नहीं करते
प्रेम है कितना, ये भांप लेती हूँ।
छोटी-छोटी सी चीजों से झलक जाता है
दिल कितना है बड़ा, ये नाप लेती हूँ। 

हमारे लिए प्यार की अपनी परिभाषा है
प्यार है तभी तो जीने की आशा है
प्यार कभी झुकता नहीं, हमेशा ऊपर उठाता है
पर किसी एक से किया प्यार, जिंदगी भर रुलाता है।

पत्थरों की दुनिया में जो अहसासों का इंसान बनेगा 
वही सबके लिए जीने की पहचान बनेगा 
क्या हुआ जो तोड़ गया ये दिल कोई पत्थर 
जो प्यार का है परिंदा 
वह बिखरे परों से भी प्यार की उड़ान भरेगा। 

तेरी कैद से आज़ाद होकर जाना
प्यार दर्द नहीं एक खुशनुमा अहसास है
तू कहीं भी नहीं है अब
पर प्यार हर पल मेरे आसपास है।

प्यार जो खुद से हो जाए तो
दर्द यूँ सहने की जरुरत ही क्यों हो। 

जानती हूँ आसान नहीं है सबको चाह पाना
पर कोशिश करने में कोई बुराई तो नहीं। 

पहले चुभती थी तेरी बातें, फिर तुझसे भी इश्क हो गया।
अब
तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार...बेशुमार। 

आशिकी और मोहब्बत ना सही
पर एक शब्द हम बेहतर जानते हैं
उसे हम प्यार कहते हैं
जो हम सबसे करना जानते हैं।

जाने किस-किस और क्या-क्या से गुजर कर पहुँचे है हम यहाँ
प्रेम हमने हर रोज बढ़ते अंगारों पर चलकर सीखा है।

बुझकर भी उजाला कर जाऊं 
यही तो बस अब चाहत है 
और इसी चाहत में सुनती हूँ
दिल में अब भी आहट है। 

Monika Jain ‘पंछी’

16/10/2017 - नोट : पुराना (वह भी अलग-अलग समय का) लेखन है। (शिकायत या दुःख भरी शायरी के सन्दर्भ में) कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जीवन के संघर्षों में दुःख बहुत कुछ और ही होता है, लेकिन अभिव्यक्त किसी और ही रूप में होता है। कुछ रचनाएँ अब सिर्फ संकलन के उद्देश्य से ही इस ब्लॉग पर है। क्योंकि वर्तमान में इनमें से कुछ रचनाओं से वैचारिक स्तर पर खुद को सम्बद्ध नहीं पाती। 

January 22, 2013

Poem on Exams in Hindi


परीक्षा 

बचपन में स्कूल की परीक्षा कईयों को बहुत सताती थी 
एग्जाम के नाम से ही उनकी कंपकंपी छूट जाती थी।

अब जब असल जिंदगी में कदम रखा है 
तो सोचती हूँ -

स्कूल की परीक्षाएं कितनी आसान थी 
जिंदगी की मुश्किलों से बिल्कुल अनजान थी। 

होते थे कुछ सलेक्टेड चेप्टर्स 
याद ना करने पर सुनने होते थे बस लेक्चर्स।

हर क्वेश्चन का लिखा हुआ जवाब होता था 
हमारा काम बस उन्हें याद करना होता था।

मार्क्स अच्छे आने पर शाबासी मिलती थी 
फेल हो जाने पर बस डांट ही तो पड़ती थी।

पर जिंदगी की ये परीक्षा कितनी बड़ी है 
कभी ना खत्म हो वो मुश्किलें खड़ी हैं।

यहाँ ना तो कोई फिक्स सिलेबस होता है 
ना एग्जाम की तारीख का अता-पता होता है।

रोज-रोज नए सवाल होते हैं 
जिनके नहीं कोई जवाब होते हैं।

काश! जिंदगी की परीक्षा भी उतनी ही आसान होती 
तीन घंटे का पेपर और छूटी मेरी जान होती। 

Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

Poem on Blindness (Blind Love) in Hindi

धृतराष्ट्र 

महाभारत का धृतराष्ट्र तो 
आँखों से अँधा था 
पर मैंने देखे हैं 
आँखों वाले भी कई धृतराष्ट्र
जिनकी आँखों पर बंधी है 
अंधे प्रेम की पट्टी 
जिन्हें नहीं दिखाई देता 
अपने सामने होता अन्याय 
जो मूँद लेते हैं आँखें 
अनीति के समर्थन में
जिनके कान नहीं सुन पाते 
न्याय के लिए उठती आवाजों को 
जो मूक बन कर फेर देते हैं पानी 
दुखियों की आशाओं पर 
जो नहीं समझना चाहते
सच और झूठ का भेद 
और इतना ही नहीं 
ये धृतराष्ट्र गरजते भी हैं तो 
सिर्फ अपने अंधे प्रेम के खातिर

Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

Poem on Women's Day in Hindi


(1)

मुट्ठी भर आज़ादी

माँ! क्या ऐसा कोई आसमां नहीं होता?
जहाँ से रोज भर लाऊं मैं मुट्ठी भर आज़ादी।

आज़ादी उन घूरती नजरों से
जो मुझे बेपरवाह नहीं चलने देती रास्तों पर।

आज़ादी उन तानों, लतीफों और तारीफों के कशीदों से
जो मुझे बार बार अहसास कराती है रूह से ज्यादा एक जिस्म भर होने का।

आज़ादी उस रोक-टोक और हजारों सलाह-मशविरों से
जिनमें घर से बाहर मेरा निकलना तय होता है घड़ी की दो सुइयों से।

आज़ादी उस खौफ़ से, जो बढ़ता ही जाता है
रोज अख़बार के पन्ने पलटते-पलटते सुनाई देने वाली चीखों से।

आज़ादी उस सोच से, जिसमें इज्जत को जोड़ा जाता है
मात्र लड़की के शरीर के एक अंग से।

आज़ादी उस दकियानूसी ख़याल से
जिसमें इज्जत नहीं जाती दोषी की बल्कि जाती है निर्दोष की।

आज़ादी आज़ादी के उस कोरे भ्रम से, जिसमें नारी मुक्ति की परिभाषा
गढ़ी जा रही है केवल देह प्रदर्शन और वस्त्र मुक्ति से।

आज़ादी उस होड़ से जो स्त्री पुरुष को एक दूसरे का पूरक न बना
पेश कर रही है एक दूसरे के प्रतिद्वंदी के रूप में।

माँ! मुझे रोज लानी है मुट्ठी भर आज़ादी
ताकि बना सकूँ यहाँ भी एक दिन मैं ऐसा आसमां
मेरी सोच, मेरे विचार, मेरी क्षमताएं और मेरा विश्वास
खुल कर सांस ले सके जहाँ।
 
Monika Jain ‘पंछी’
(06/2014)

(2)

नारी की आज़ादी

जिस देश में अजन्मी बिटिया को
कोख में मारा जाता हो
जिस देश में दहेज़ का दानव
बहु को लील जाता हो
उस देश में दुर्गा पूजा की
बातें बेमानी लगती है
नारी की आज़ादी बस इक
झूठी कहानी लगती है।

जिस देश में लड़की का
सड़कों पर चलना भी दुश्वार हुआ
गिद्ध लगाये बैठे दृष्टि
बार - बार बलात्कार हुआ
उस देश में दुर्गा पूजा की
बातें बेमानी लगती है
नारी की आज़ादी बस इक
झूठी कहानी लगती है।

सत्ता के ठेकेदार जहाँ
खुद भारत माँ के भक्षक हो
पुलिस के पहरेदार जहाँ
खुद चोरों के ही रक्षक हो
उस देश में दुर्गा पूजा की
बातें बेमानी लगती है
नारी की आज़ादी बस इक
झूठी कहानी लगती है।

Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

January 6, 2013

Shayari on Life (Zindagi) in Hindi

ज़िन्दगी शायरी 

बार-हा होता रहा वह हैरान 
एक ख़याल और अगले ही पल नुमायान। 

(बार-हा ~ Many Times, नुमायान ~ Visible)

जिनके सहारे सुकूं से हैं बैठे
जाने वो सहारे कहाँ छूट जाए।

ज़िंदगी के कुछ खास लम्हें
जो बिताये थे तुमने और हमने 
बन चुका है अब यादों का एक पिटारा 
जो खुलता है कभी ख़ुशी कभी गम में। 

प्यार बनकर आया था जो ज़िन्दगी में 
वादा किया रहूँगा साँसे है जब तक 
उसी दिये ने जलाये हैं मेरे हाथ 
जिसे हाथों से बचाती रही हूँ अब तक। 

मेरे जीवन में अँधेरा लाने की चाह में 
वह अपने हिस्से की रौशनी घटाता चला गया। 

जो मर ही जाते तो मोहब्बत मोहब्बत कहाँ होती
जीना ही तो इस गुनाह की सजा होती है। 

आवाज़ तो नहीं हुई पर कुछ टूटा था अभी
दिल को जो था अजीज कुछ छूटा था अभी
दर्द तो हुआ था पर मुस्कुरा गयी मैं
देखो ज़िन्दगी! मौत को फिर हरा गयी मैं। 

किसी ने कहा जिंदगी आपके होठों पे मुस्कुराती है
मैंने कहा जो मौत भी मुस्कुराये तो कुछ बात हो
चुन-चुन के मुस्कुराना तो हम सबने है सीखा
जो मुस्कुराहट एक प्रवाह हो तो कुछ बात हो। 

मौत के बाद के जीवन से अनजान है
इसलिए ये मौत लगती बड़ी सस्ती है। 

कण-कण में स्पंदित है जीवन 
मरता कभी न कोई 
रक्त भले ही शेष न हो 
अशेष रहा है कोई। 

इस कदर मुसलसल है सारा जहाँ हमारा
चोट मुझ तक भी पहुंची थी तूने जो उसे मारा।

(मुसलसल ~ Linked)

मैं तो थी खुद अपनी ही गुनाहगार
कोई सजा देता तो क्या देता? 

मेरी ज़िन्दगी को तुम अगर जान जाते 
तो बेवफ़ाई ज़िन्दगी की पहचान पाते। 

मौज-ए-हवादिस इस कदर अब आम हो गयी
मुअम्मा ज़िन्दगी में सुबह से शाम हो गयी।

(मौज-ए-हवादिस ~ Wave of Calamities, मुअम्मा ~ Riddle)

पंछी से भी पूछ लें जरा आसमां के किस्से
कितने पंख असल में आये हैं उसके हिस्से।

कुछ ख्वाहिशों की तकदीर में कोई सहर नहीं 
तो किस बात का है इंतजार मुझको ख़बर नहीं। 

न मंजिल, न अरमां, ना ख़्वाब अब कोई 
जो दिल को दे सुकूँ, बस किये जा रहे हैं 
चलती है मेरी साँसे, कोई वजह तो होगी 
उस वजह की वजह से जिए जा रहे हैं। 

न जीतने की ख़ुशी, न हारने का गम
खेल कुछ ऐसा हो रहा है अब। 

पहरों की परवाह कभी करते नहीं 
जिन्हें जीने की हो आरज़ू वे कभी डरते नहीं। 

जिंदगी क्या सिर्फ एक रंग से बनती-बिगड़ती है 
इन्द्रधनुष है ये जिंदगी
न जाने कितने रंगों पे चलती है। 

जिसे बसना समझते हो वह हो सकता है उजड़ना 
और क्या पता जो उजड़ रहा वह असल में जिंदगी हो।

जिंदगी को फिर से जिंदगी बना लो 
रूह के उतरे रंग आज फिर से खिला लो। 

ख़ुश रंग तो अभी बाकी है बहुत
मुझमें पूरी एक दुनिया बसती है। 

दुनिया है हद यहाँ हदें ही सिखाई जाती है
पर हदों के भीतर ही एक राह बेहदी तक जाती है।

साज़-ए-दिल से जुड़ा है साज़-ए-जाँ का रास्ता 
इश्क जिसमें बचा रहा, जीना उसे ही तो आया। 

(साज़-ए-दिल ~ musical instrument of heart, साज़-ए-जाँ ~ musical instrument of life)

शुकराना हमारा सबको कबूल हो
राह-ए-ज़िन्दगी में बोए आम या बबूल हो। 

Monika Jain ‘पंछी’ 

January 1, 2013

किसान ~ Poem on Farmer in Hindi

किसान 

मिट्टी से सोना उपजाता 
कहलाता जो अन्न का दाता 
धूप, ठंड हो चाहे बारिश 
जिसको कोई रोक ना पाता। 

बादल जिसकी किस्मत लिखता 
आढ़तिया है जिसको ठगता 
फिर भी सबका पेट वो भरता
कड़ी धूप नित मेहनत करता। 

चाहे बरसाता रवि अनल 
चाहे जलता हो भूतल 
टप-टप बहता रहे पसीना 
पर चलता वह अविरल। 

चाहे हो अच्छी कभी फसल 
उसको लाभ ना मिलता 
पर ना जाने किस आशा में 
हर रोज धूप में जलता। 

कभी बाढ़ और कभी अकाल 
आते हैं उसे सताने 
पर किस्मत का मारा वह 
बस मेहनत करना जाने। 

कर्ज में पैदा होता है 
और कर्ज में ही मर जाता है 
माँ धरती का सच्चा बेटा 
कितने दुःख सह जाता है। 

सबको जीवन देने वाले 
के घर में भी अन्न के लाले 
यह विडंबना कैसी है 
अब तू ही बता, ओ ऊपर वाले। 

Monika Jain ‘पंछी’ 
(01/03/2013)

Indian economy is an agriculture economy. So farmers play the important role in our country. He works hard in his fields whole the day without caring of summer, winter, rain etc. His life is full of difficulties and problems. It is said ‘He is born in debt, lives in debt and dies in debt.’ His crops are on the mercy of rain. Sometimes flood and sometimes drought destroy all his hard work. For the overall development of our nation the economic development of farmers and agriculture is very much needed. When farmers will prosper our country will prosper. So It is the duty of our government to give utmost attention to the problems of our farmers. 

Essay on Happy New Year Resolution in English

Essay on Happy New Year Resolution in English
Ushering in New Year…

Every year goes by with its own share of highlights, problems, solutions and events. Most of us get so caught up in our daily lives, in our regular routines, that we do not realize how similar each year becomes to the other. Be it our education, our families, our friends or our jobs, we often end up ignoring the bigger things in life. We often forget to make a difference, and we are almost always too busy to do so.

This year, however, we can make it a different year by going out and making a difference by ourselves. Issues such as poverty, climate change and pollution are not really beyond our control. We can all make small changes, and each person’s contribution is very valuable. Every person taking initiative will be changing a small part of the life as we know it.

We often feel the need to feed the street children and to distribute clothes and other necessities to them, only on special occasions. Instead, saving up a little bit of money being spent on luxury buys can be given to a particular needy person out on the streets, or the contribution can go to a good NGO which is trustworthy.

We can start trying to be conscious about littering the streets by always making sure that we throw our trash into the dustbins. We can also start trying to convince other people to do the same. Even convincing family members and close friends will make a huge difference.

We can start teaching the under-privileged children. Teaching even one child can make a huge difference in his/her life. That child will be able to read and write in basic english, which will give him/her a job which can keep her off the streets.

There are so many such things which do not take much effort to do, but which can create change. These changes might look very small initially, but every large place is large only because it has many small places contained within it, and these small changes will slowly spread if one is persistent enough.

There are a lot of issues which need to be rectified in our country. Apart from the inequality between genders, there is also widespread poverty, immense pollution, and a lot of political disturbance. It is the initiative of courageous individuals which can help remove these issues from our society today. It requires a lot of courage, it requires a lot of dedication, and it also requires the willpower to help others. Even if we cannot change the world altogether, starting off this year with baby-steps such as keeping your neighborhood clean, or teaching basic english to a single underprivileged street-urchin can have an impact. And as these changes start bearing fruit, more changes will follow. All that we really need to have is hope, and the dedication to make a difference in this world. This is a far better way of starting off the New Year, than by sitting and complaining about the problems all around us.

Guest post by www.glad2bawoman.com
(01/01/2013)

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