September 2, 2013

Essay on Forgiveness in Hindi

क्षमा

क्षमा कर देने और क्षमा मांगने, दोनों के ही लिए एक साहसी, संवेदनशील, साफ़ और बड़े दिल की जरुरत होती है। क्षमा मांगना कायरता की निशानी बिल्कुल भी नहीं है बल्कि यह तो अहंकार का नाश है। दूसरी ओर क्षमा कर देना भी बड़प्पन, सकारात्मकता और महानता को ही दर्शाता है। देखा जाए तो दोनों ही चीजे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हमें ही फायदा पहुंचाती है। न किसी से नफरत, द्वेष और ईर्ष्या रखकर हम खुश रह सकते हैं और ना ही कोई हमें नफरत करे यह बात हमें अच्छी लगती है।

अपनी गलतियों को स्वीकारने और किसी को माफ़ कर देने के लिए दिन विशेष की जरुरत नहीं होती, पर हाँ, दिन विशेष हमें ठहरकर सोचने का समय देता है। जीवन की भागदौड़ में जो कुछ छूटता जा रहा है, उसे सहेजने का अवसर देता है। लेकिन अक्सर महज औपचारिकताओं में यह दिन भी निकल जाता है। संवत्सरी की संध्या से शुरू हुआ सिलसिला अगले 1-2 दिनों में खत्म हो जाता है, और हम वहीँ के वहीँ रह जाते हैं, फिर से ढेर सारी गलतियाँ करने की तैयारी के साथ।

अगर किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है तो वह है आत्मविश्लेषण की, खुद में झाँकने की, अपनी गलतियों को पहचानने की, उन्हें स्वीकार करने की और इस संकल्प के साथ क्षमा मांगने की कि भविष्य में ये गलतियाँ नहीं दोहराई जायेगी। हम जैसा व्यवहार दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार सबके साथ करें, यह बदलाव ही इस दिन की सार्थकता है।

अगर हमने गलती की है तो उसे स्वीकार करने और क्षमा मांगने से हमें कतराना नहीं चाहिए। क्षमा का उम्र से भी कोई लेना देना नहीं होता। अगर आप ऐसा सोचते हैं कि आप बड़े हैं इसलिए आप क्षमा नहीं मांगेंगे तो ये आपकी छोटी सोच और अहंकार को दर्शाता है। जो सच में बड़े होते हैं वहीँ क्षमा मांग सकते हैं और क्षमा कर भी सकते हैं। क्षमा आत्मग्लानि से मुक्ति दिलाती है, टूटे रिश्तों को जोड़ती है, अहंकार का नाश करती है और हमारे जीवन में सकारात्मकता की वृद्धि करती है।

कोई भी पूर्ण दोषमुक्त नहीं होता। हर व्यक्ति में कोई ना कोई कमी होती है, और छोटी-मोटी गलतियाँ सभी से होती है। अगर हमें हमारी गलतियों के लिए हमारे माता-पिता, शिक्षकों ने माफ़ ना किया होता तो? इसलिए इंसान की गलतियों और कमियों को देखने की बजाय उसकी अच्छाइयों को देखना जरुरी है। अगर हम छोटी-छोटी बातों पर मन में बैरभाव लेकर बैठ जायेंगे तो सबसे ज्यादा नुकसान हमारा ही होगा।

किसी को क्षमा करके हम सबसे बड़ा उपकार खुद पर करते हैं, क्योंकि हमारे अन्दर पल रही नफ़रत, द्वेष और घृणा दूसरे को तनिक भी क्षति नहीं पहूँचाती बल्कि हमारे स्वयं के लिए विष का कार्य जरुर करती है। जब तक हम क्षमा नहीं करते तब तक हम नकारात्मक विचारों का बोझ अपने दिल और दिमाग पर ढ़ोते रहते हैं। क्षमा करना स्वयं को इस बेवज़ह के बोझ से मुक्ति प्रदान करना है। क्षमा करने से क्षमा पाने की तुलना में ज्यादा ख़ुशी और हल्कापन महसूस होता है।

खुद को अक्सर माफ़ नहीं कर पाती इसलिए आज क्षमा दिवस के अवसर पर सबसे पहले मेरी क्षमा खुद से है। उन सभी गलतियों के लिए मैं खुद को माफ़ करना चाहती हूँ, जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मुझे, मेरे व्यक्तित्व और मेरे चरित्र को क्षति पहुँचाई हो, इस संकल्प के साथ कि भविष्य में उनका दोहराव नहीं होगा। इसके पश्चात् मैं इस सृष्टि के समस्त जीवों से क्षमा याचना करती हूँ, जिन्हें भी मेरे शब्दों, मेरे व्यवहार या मेरे किसी भी कार्य से ठेस पहुंची हो। साथ ही जिन्होंने भी मेरा दिल दुखाया है, उन सबके प्रति मन में उपजे नकारात्मक विचारों का त्याग करने की मैं सच्चे दिल से पूरी कोशिश करुँगी। क्षमत क्षमापना! मिच्छामी दुक्कड़म्!

Monika Jain 'पंछी'
(09/2013)

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September 1, 2013

Poem on Forgiveness in English

Let's Forgive Each Other

Forgiveness blossom flowers of love
Forgiveness melt prong of hate
The effect of forgiveness is such that
Enemies hug each other and become friends.

As much as this word is beautiful
its presence is equally fine
Forgiveness cleans
every single corner of our mind.

To apologize and to forgive
makes a complete personality
Ego doesn't stay
in the presence of sorry.

By not forgiving others mistake
we are doing injustice with ourself
We are moving with a heavy burden
remaining the offender of ourself.

So on the day of forgiveness
Let’s come together and forgive each other
Filth that is loaded in our heart
Let’s make it perfectly clear.

Monika Jain ‘Panchhi’
(09/2013)

To forgive and to ask for forgiveness, both need a courageous, sensitive, clean and a big heart. To apologize is not the sign of cowardice. In fact it destroys our ego. On the other hand to forgive is also the sign of nobility and greatness. Directly or indirectly both these things benefit us. The biggest favor by forgiving someone we do on ourselves. Because the hate, malice and envy dwells within us do not harm others but it definitely work as a poison for us. Forgiveness releases us from the captivity of these negative thoughts and their unnecessary burden. The thing which is most needed for us is to introspect, to become introvert, to recognize our mistakes, to accept them and to ask for forgiveness with a resolution that these mistakes will not be repeated in future. Behaviour we expect from others should be our behavior towards others. Feel free to add your views about this poem on forgiveness.