Apple Theft Childhood Story in Hindi

मैं एप्पल चोर ऐसा भी नहीं था कि मुझे एप्पल खानी थी। ऐसा भी नहीं था कि मन लालची था। ऐसा भी नहीं था कि पहले कभी बिना पूछे किसी की चीज उठ...

October 29, 2013

Poem on Old Age People in English

Our Elders

Today rhythms of children, youth and elders are distorted
Youth are indulged in themselves
and old age people seems them outdated.

Nuclear families are far away
from the intimate company of elders
‘Senior citizens are a problem’
this is the thinking of our youngers.

Those who send to their elders to old age homes
Forget one day they will also get old
and their children may do the same to get rid of them.

The old age people can fire the flame
in the light of which our society can success
With the knowledge and experience of senior citizens
our country can also progress.

It’s our duty to give our elders
emotional security and respect
We should bring them in the mainstream of society
and They should not be ignored and insulted.

The old people also have to understand
that change is the law of nature.
They have to accept the changes in the
thinking of new young generation being their elders.

Monika Jain ‘Panchhi’

Old age people are our guide. They are our true pioneer. Direction they give us can change our destiny and their teachings can fill our life with happiness and peace. Elders are trees of rituals and values. In the shadow of senior citizens we can get the precious treasure of knowledge, experience and rites. So we should never ignore elderly people. Our existence is only because of our elders so we should provide them love, respect and protection. We should bring them in the mainstream of our society so that they never feel isolated and ignored. With their experience and with our new approach, creativity and hard work we can contribute in national development.

October 22, 2013

Poem on Moon (Karva Chauth) in Hindi

मेरा चाँद 

ऐ चाँद! 
क्या मेरा एक काम करोगे?
वो जो दूर चला गया है मुझसे 
क्या उसकी एक झलक मुझे ला दोगे? 

देखो न! कितने साल हो गए हैं 
उसे देखे हुए, उससे मिले हुए 
एक अरसा हो गया 
उससे लड़े और झगड़े हुए। 

आज मुझे उससे जुड़ी हर बात 
बहुत याद आ रही है 
सबके पास होगा अपना चाँद 
और मेरे हिस्से आई बस ये तनहाई है। 

तुम तो गवाह हो न 
हर उस रात के 
जब हाथों में डाले हाथ 
अँधेरी सुनसान राहों पर 
हम बेख़ौफ़ निकलते थे 
रास्ते हो जाते थे कितने छोटे 
जब प्यार के दो मुसाफिर 
हर कदम साथ-साथ चलते थे। 

वह था घोर लापरवाह
और एकदम शांत 
बिल्कुल तुम्हारे जैसा 
इसलिए लड़ाई का बहाना 
कभी-कभी मुझे ही ढूंढना होता था 
और लड़ने-झगड़ने के बाद 
बच्चों की तरह मेरा ही रोना छूटता था। 

बस वो भीगे पल 
और उसका प्यार भरा स्पर्श 
बयां करना चाहूँ 
तो भी नहीं कर सकती 
प्यार बस किया जा सकता है महसूस 
इससे ज्यादा कुछ और 
मैं कह भी तो नहीं सकती। 

याद करने लगी जो सारी बातें 
और कर दी बयां जो सारी मुलाकातें 
तो सच आज फिर से रो पडूँगी 
मचल रहा है कब से जो यादों का तूफ़ान 
बन कर झरना आज मैं बिखर ही पडूँगी। 

पढ़ेगा जब वो मेरी तड़प 
जानती हूँ आँखें उसकी भी भीग जायेगी 
और उसकी आँखों में जो आये आंसू 
तो सच मेरी जान ही निकल जायेगी। 

ऐ चाँद! बस तुम इतना कर दो 
या तो मेरा चाँद ले आओ 
या फिर आज मेरे लिए अमावस कर दो 
क्यूंकि आज की रात जो तुम्हे देखा 
तो अपना दर्द छिपा नहीं पाऊंगी 
गर ना आया मेरा चाँद 
तो सच आज मैं टूट ही जाऊंगी। 

Monika Jain ‘पंछी’ 

21/11/2017 - Note : This poem is a mixture of reality and imagination both. I am a quiet and sincere girl since my childhood and disputes are a rare thing for me. They occurs when there is a valid reason. Besides it I am not much familiar with karva chauth. In this poem moon and the ambience of karva chauth is just playing the role of awakening the memories of beloved for a girl. The poem has nothing to do with supporting any tradition. Again for others who follow, I am not totally against too. There is nothing wrong with fasting but we just need improvements in our traditions and festivals. Besides it, this is my old writing and leading to spirituality I am not much concerned with such emotional writings today.

Poem on Moon in English

O Moon!

O Moon!
Will you do a favor for me?
The one who is far away from me
A glimpse of him, will you bring me?

So many years have been passed
Neither I met him, nor i saw him
It’s been a long time since I fought him.
Today I am missing everything associated with him
Loneliness is killing me deep within.

You are the witness of every night
When by holding hands in hands
We used to walk on dark and deserted paths.
Long ways turned into short
When two love birds started their journey
on a completely unknown path.

He was calm and careless just like you
So the excuse of fighting always I had to find
and After having a fight I used to cry like a child.
Those wet moments and his loving touch
Even if i wish I can not express
Love can be just felt
To describe it I am completely wordless.

Today I will start crying
If I will remember all the things.
The storm of memories will shatter me
if I will begin to tell about every meeting.

When he will read my sufferings
He will also start crying
and If I will see tears in his eyes
Literally I will start dying.

O moon!
Do a little favor for me -
Either bring my moon or
Do it moonless today for me.

Because seeing you tonight
My pain, I won’t be able to hide
and If my moon won’t come
It will be impossible to survive.
It will be impossible to survive.

Monika Jain ‘Panchhi’

21/11/2017 - Note : This poem is a mixture of reality and imagination both. I am a quiet and sincere girl since my childhood and disputes are a rare thing for me. They occurs when there is a valid reason. Besides it I am not much familiar with karva chauth. In this poem moon and the ambience of karva chauth is just playing the role of awakening the memories of beloved for a girl. The poem has nothing to do with supporting any tradition. Again for others who follow, I am not totally against too. There is nothing wrong with fasting but we just need improvements in our traditions and festivals. Besides it, this is my old writing and leading to spirituality I am not much concerned with such emotional writings today.

October 12, 2013

Story on Female Foeticide in Hindi

Story on Female Foeticide in Hindi
(ललकार टुडे में प्रकाशित)

‘वंशिका! अच्छा नाम है न?’ अपनी मासूम सी बच्ची जिसने आज ही जन्म लिया था उसे अपने हाथों में उठा उसका माथा चूमते हुए दामिनी ने रश्मि से कहा।

कहते हैं जब एक औरत माँ बनती है तो उसका दूसरा जन्म होता है। वंशिका की माँ के रूप में तो दामिनी का दूसरा जन्म था ही साथ ही कुछ समय से उसकी दुनिया भी बदल चुकी थी।

अपने पति, सास-ससुर सभी को छोड़कर कुछ महीने पहले ही वह इस नए शहर में आकर बसी थी, सिर्फ और सिर्फ अपनी बेटी के लिए।

कितनी खुश थी वह जिस दिन उसे डॉक्टर से पता चला कि वह माँ बनने वाली है। ना जाने कितने सपने संजोये थे उसने अपनी पहली संतान को लेकर। पर जब उसे यह पता चला कि उसके पति और सास-ससुर चाहते हैं कि पहली संतान लड़का ही होनी चाहिए तो उसका मन एक अनजाने से भय से आतंकित हो गया।

घर वालों के दबाव में आकर उसे अपने गर्भ की जांच करानी ही पड़ी और जब उसे पता चला कि उसके गर्भ में एक लड़की पल रही है तो उसे उसके सारे सपने बिखरते नज़र आये।

उस पर बार-बार बच्चे को गिराने का दबाव डाला जाने लगा। पर इस कुकृत्य के लिए दामिनी बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। एक नन्हीं सी कली जो अभी खिली भी नहीं, जिसने दुनिया देखी भी नहीं और जो उसके शरीर का एक हिस्सा थी उसे वह अपने से कैसे अलग कर सकती थी?

घर में रोज कलह होने लगी। उसने अपने पति अनिल और सास-ससुर को समझाने की बहुत कोशिश की पर उन पर कोई असर ना पड़ा और उन्होंने अपना फैसला सुना दिया, ‘तुम्हें घर और बच्ची दोनों में से किसी एक को चुनना होगा। अगर तुम्हें इस घर में रहना है तो बच्चा गिरवाना होगा वरना यह घर छोड़कर जाना होगा।’

दामिनी के पैरों तले जमीन खिसक गयी। दामिनी के माता-पिता नहीं थे। मायके में बस उसके दो बड़े भाई और उनके बीवी-बच्चे थे। उसने अपने मायके में बात की तो वहां से भी यही सलाह मिली, ‘जैसा ससुराल वाले कहते हैं वैसा ही कर। जिसने जन्म ही नहीं लिया उसके लिए तू अपने पति को कैसे छोड़ सकती है? बच्चे तो और भी हो जायेंगे पर शादी कोई बच्चों का खेल नहीं है जो तू इतना बड़ा फैसला अकेले ले ले।’

मायके से भी निराश दामिनी के लिए अब कोई भी फैसला करना बहुत मुश्किल था। पर किसी भी कीमत पर वह एक मासूम बच्ची की जान नहीं ले सकती थी। उसने अपनी बचपन की पक्की सहेली रश्मि से बात की और उसी के शहर में अपने रहने का इंतजाम करवाया और अपनी सारी हिम्मत जुटाकर कपड़ों से भरा सूटकेस और अपने जमा कुछ पैसे लेकर निकल पड़ी एक नए शहर के लिए।

अपनी सहेली के घर के पास ही एक छोटे से कमरे में उसने अपनी नयी दुनिया बसाई। दामिनी पढ़ी लिखी थी। वहीँ उसने एक स्कूल ज्वाइन कर लिया और किसी तरह अपना नया जीवन शुरू किया। आसान तो कुछ भी नहीं था पर अपनी हिम्मत और रश्मि से मिली मदद के बल पर उसने सारी मुश्किलों को पार किया और कुछ महीने बाद एक बहुत ही सुन्दर फूल सी बच्ची को जन्म दिया।

दामिनी वंशिका को प्यार से वंशु कहकर बुलाती थी। एक छोटी सी बच्ची के साथ जॉब और घर के सारे काम बहुत मुश्किल थे पर दामिनी को कुछ अच्छे लोगों का साथ मिला और मुश्किलों से उसकी लड़ाई जारी रही। दामिनी ने वंशिका की पढ़ाई-लिखाई और पालन-पोषण में कोई कसर नहीं छोड़ी। वंशिका भी अपनी माँ से बहुत प्यार करती थी। दामिनी सिर्फ उसकी माँ ही नहीं बल्कि उसकी सबसे अच्छी दोस्त भी थी, जिससे वह अपने स्कूल, दोस्तों सबकी बातें शेयर करती थी।

वंशिका को अपने पिता का सच नहीं पता था। उसे यही बताया गया कि एक हादसे में उसके पिता और दादा-दादी की मौत हो गयी। क्योंकि दामिनी नहीं चाहती थी कि अपने पिता का सच जानकर वंशिका का दिल टूट जाए और वह अपने पिता से नफरत करने लगे।

उधर दामिनी के जाने के एक साल के भीतर ही उसके पति अनिल ने दूसरी शादी कर ली। नयी पत्नी से दो जुड़वा बेटे हुए आकाश और विकास।

समय बीतता गया और बच्चे बड़े हो गए।

वंशिका ने PMT की परीक्षा पास की और मेडिकल कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी कर वह डॉक्टर बन गयी। वंशिका की पोस्टिंग उसी शहर में हुई जहाँ उसके पिता रहते थे। दामिनी को जब पता चला तो अतीत की सारी स्मृतियाँ उसकी आँखों के सामने छाने लगी। वह घबरा भी गयी पर बेटी के करियर का सवाल था सो अपनी भावनाओं पर काबू कर वह बेटी के साथ उसी शहर चली आई जहाँ से कभी शादी के बाद उसने अपना नया जीवन शुरू किया था।

उधर अनिल की दूसरी पत्नी निशा की कुछ साल पहले एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी। आकाश और विकास दोनों ने अमेरिका में एम.बी.ए. किया और वहीँ की लड़कियों से शादी कर वहीँ सेटल हो गए। इधर दामिनी का पति अनिल अपने बूढ़े माता-पिता के साथ अकेला रह गया।

अनिल की तबियत बहुत ख़राब रहने लगी। जांच कराने पर पता चला उसे ब्लड कैंसर है। जिन बेटों की चाह में उसने अपनी पहली पत्नी को घर से निकाल दिया उन्हीं को उसकी कोई परवाह नहीं थी। अकेलापन उसे सालने लगा और वह अपराध बोध से भर गया पर अब पछताने के अलावा उसके पास कुछ था भी नहीं। मरने से पहले उसकी बस एक ही ख्वाहिश थी दामिनी और अपनी बेटी से माफ़ी मांगना।

एक दिन वंशिका जब अपने घर से हॉस्पिटल के लिए रवाना हो रही थी तो उसने देखा पास ही में एक आदमी चक्कर खा कर गिर गया और बेहोश हो गया। लोगों की मदद से वह उसे अपने घर तक लायी। माँ से पानी मंगवाया और उस आदमी की जांच करने लगी। माँ वंशिका को पानी का गिलास देकर ज्यों ही वापस मुड़ी अचानक उसके कदम रुक गए। उसने उस आदमी को ध्यान से देखा। वह और कोई नहीं बल्कि उसका पति अनिल ही था। वह एकदम स्तब्ध रह गयी। अनिल को भी होश आ गया था। उसके सामने दामिनी खड़ी थी। उसने अपनी आँखों को मसला और फिर से उसे देखा। जब उसने दामिनी को पहचान लिया तो वह अपनी भावनाओं पर काबू ना कर सका और फूट फूट कर रोने लगा। वह हाथ जोड़कर बोला, ‘दामिनी! प्लीज मुझे माफ़ कर दो। मैं तुम्हारा बहुत बड़ा अपराधी हूँ पर हो सके तो मुझे माफ़ कर दो।’

वंशिका को कुछ समझ नहीं आया तो उसने माँ से पूछा, ‘माँ क्या आप इन्हें जानती हो?’

वंशिका के माँ कहते ही अनिल ने अपने आंसू पौंछे और एक बार वंशिका को और फिर सवाल भरी निगाह से दामिनी की ओर देखा। दामिनी ने सहमति में सर हिला दिया।

अनिल को खांसी चलने लगी। वंशिका पानी का गिलास लेकर अनिल को पानी पिलाने लगी। पानी पीकर अनिल ने बड़े प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा और पूछा, ‘बेटा! तुम्हारा नाम क्या है?

‘वंशिका!’ और इस शब्द के साथ ही अनिल की आँखें झुक गयी और फिर से अविरल आंसू बह पड़े।

Monika Jain ‘पंछी’

October 10, 2013

Poem on Old Age People in Hindi


आज बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के
लय ताल बिगड़े हुए हैं 
युवा और बच्चे हैं अपने में मग्न 
और बुजुर्ग उन्हें आउटडेटेड लग रहे हैं। 

एकल परिवारों ने बुजुर्गों के 
आत्मीय सानिध्य को 
कर दिया है दूर 
बुजुर्ग हैं एक आफत 
यह सोचती है आज की पीढ़ी 
होकर मगरूर। 

बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज 
उनसे छुटकारा पाने वाले 
भूल जाते हैं 
होंगे वे भी एक दिन बूढ़े 
जो आज हो रहे हैं 
जवानी में मतवाले। 

नहीं है उन्हें भान कि
बुजुर्ग जला सकते हैं वह मशाल 
जिसकी रौशनी में समाज 
तरक्की कर सकता है 
बुजुर्गों के ज्ञान और अनुभव से 
हमारा देश आगे बढ़ सकता है। 

बुजुर्ग संस्कारों का वृक्ष हैं 
अनुभव और ज्ञान में वे दक्ष हैं
उनकी छाया में हम पायेंगे 
अनमोल खजाना 
भूल कर भी अपने बड़ो से 
दूर ना जाना। 

बुजुर्ग हमारे मार्गदर्शक है 
वे ही हमारे पथ प्रदर्शक है
उनसे मिली दिशा 
बहुत कुछ बदल सकती है 
बजुर्गों की सीख, हमारा जीवन 
खुशियों से भर सकती है। 

हमारा कर्त्तव्य है बुजुर्गो को दें 
भावनात्मक सुरक्षा और सम्मान 
उन्हें जोड़े समाज की मुख्य धारा से 
और ना करें उनकी उपेक्षा व अपमान। 

बुजुर्गों को भी समझना होगा 
बदलाव है प्रकृति का नियम 
कोई मनमानी नहीं 
आज की पीढ़ी में होते 
बदलाव को अस्वीकृति
बुद्धिमानी नहीं। 

गर ना समझे वे तो भी 
एक बात पर देना तुम सब ध्यान 
हमारा अस्तित्व है हमारे बड़ो से 
सो उनको प्यार, सुरक्षा और देकर सम्मान 
कर रहे हैं हम अपना ही उत्थान। 

Monika Jain ‘पंछी’

25/10/2017 : नोट : पुरानी कविता है, बच्चों के लिए है और उस समय की समझ और बुजुर्गों के प्रति कुछ बुरी घटनाओं और बर्ताव को देखकर लिखी गयी है। निष्पक्ष रूप से अभी यह कह सकती हूँ कि न तो बुजुर्ग होना सही का प्रमाण है और ना ही युवा होना। जन्म दे देने से कोई महान नहीं बनता और ना ही हमारा अस्तित्व कोई उपलब्धि जैसी चीज है। इसके अलावा सही और गलत समझ, परिस्थितियों और समय पर निर्भर करते हैं। कई मामलों में बुजुर्ग गलत हो सकते हैं और कई मामलों में युवा भी। हाँ, लेकिन हम सब आपस में जुड़े हुए हैं, सभी में कमियां हैं। ऐसे में जहाँ तक और जितना संभव हो सभी के प्रति समझ और संवेदनशीलता जरुरी है। जहाँ अपवाद स्वरुप थोड़े सख्त रवैये की जरुरत हो वहां वह भी हो, लेकिन उसका भी आधार कोरा निजी स्वार्थ न होकर समझ और संवेदनशीलता हो यह बेहद जरुरी है। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़ों का बदलना मुश्किल होता है, लेकिन छोटी उम्र में खुद में बदलाव उतने ही आसान होते हैं, इसलिए कई मामलों में वृद्ध लोगों से बदलने की अपेक्षा नहीं रखी जा सकती है। बेहतर यह है कि हम खुद को सुधारें ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर माहौल मिले।

Poem on Women Empowerment in Hindi


आज़ादी का हक़

मैं शादी में विश्वास करती हूँ 
पर शादी की प्रमाणिकता के लिए 
अपनी मांग में सिन्दूर 
गले में मंगलसूत्र
हाथों में चूड़ियाँ 
पाँव में पायल और 
बिछिया पहनने में नहीं।

ये शृंगार के लिए पहने जाए 
इसमें मुझे आपत्ति नहीं 
पर शादी के नाम पर 
इन्हें थोपा जाए 
ये मुझे मंजूर नहीं।

बेटी को जायदाद में 
बराबर का हक़ मिले 
इसमें मेरा विश्वास है 
पर शादी के नाम पर 
होने वाले लेनदेन और 
दहेज़ में नहीं।

जीवनसाथी के प्रति 
सम्मान को मैं जरुरी मानती हूँ 
पर अपने पति को 
नाम से ना बुला सकने के 
रिवाज को नहीं।

पति की लम्बी उम्र 
कौन नहीं चाहेगी?
पर इसके लिए 
परंपरा के तौर पर किये जाने वाले 
व्रत और उपवास में 
मेरी मान्यता नहीं। 

परिधान में शालीनता की बात 
मैं अवश्य मानती हूँ 
पर शादी के बाद ससुराल में 
साड़ी ही पहनी जाये 
ये बिल्कुल भी नहीं।

संयुक्त परिवार
आपस में प्यार 
हर रिश्ते को दिल से अपनाना 
अपने उचित कर्तव्यों को निभाना 
प्रेम और समर्पण की भावना 
परिवार को एक सुत्र में बांधना 
इन सबमें विश्वास करती हूँ 
पर बेवजह के अन्याय 
और परम्पराओं को ढोने में नहीं। 

क्योंकि में आज़ादी का हक़ चाहती हूँ 
बहु नहीं, मैं एक बेटी बनना चाहती हूँ।

Monika Jain 'पंछी'


मैं हूँ एक लुप्तप्राय प्रजाति 

हाँ, मैं हूँ एक लुप्तप्राय प्रजाति 
जिसकी सुरक्षा और सशक्तिकरण की 
बातें हो रही है, देश भर में।

जिसे इंसाफ़ दिलाने के लिए 
बन रहे हैं महिला कोर्ट 
जिसके अस्तित्त्व की रक्षा के लिए 
गढ़े जा रहे हैं कानून के नए समीकरण।

लेकिन सच तो सिर्फ इतना है कि 
चुनौती बन गया है मेरे लिए 
जन्म से पहले ही सुरक्षित रह पाना।

मैं पूछना चाहती हूँ 
इस पुरुष प्रधान समाज से 
क्या अपनी सभ्यता के विकास के लिए 
वो बना पाएंगे ऐसे कारखाने 
जहाँ खत्म हो जाती है 
जरुरत एक औरत की।

Monika Jain 'पंछी'

October 9, 2013

Poem on Discipline in Hindi


स्वयं पर स्वयं का शासन 
कहलाता है अनुशासन। 

यह कोई पराधीनता नहीं 
ना ही है कोई बंधन
यह है नियमों का अनुसरण 
बनता है जिससे आदर्श जीवन। 

अनुशासन चेतना का परिष्करण है 
अनुशासन सिद्धांतों का अनुकरण है 
अनुशासन सुसंस्कार है 
सफल जीवन का यही आधार है। 

अच्छे विद्यालय ही 
अनुशासन के निर्माता है 
सुसंस्कृत परिवार में ही बालक 
अनुशासन पाता है। 

अनुशासित विद्यार्थी 
बढ़ाते हैं देश का मान 
जो दिखाते हैं अनुशासनहीनता 
नहीं पाते कहीं भी सम्मान। 

समाज में बढती अव्यवस्था 
अनुशासनहीनता का परिणाम है 
नियमों को जो करते हैं दरकिनार 
बुद्धिमान नहीं वे नादान है। 

अनुशासन राष्ट्र हित में जरुरी है 
ना सोचो कि यह कोई मजबूरी है 
कर्तव्यों का पालन हमारी जिम्मेदारी है 
अनुशासित रहना ही सच्ची समझदारी है। 

अनुशासन सफलता की धुरी है 
प्रशासन, स्कूल, समाज और परिवार 
सबकी सफलता के लिए 
अनुशासन जरुरी है। 

अनुशासन परिवार, समाज और राष्ट्र की आवश्यकता है 
बिना अनुशासन कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता है 
अनुशासन से ही समस्यायों का समाधान है 
अनुशासन में ही विकसित होता ज्ञान है। 

अनुशासन जीवन का प्राण है 
सफलता के लिए अनुशासन रामबाण है
अनुशासन पशुता से ऊपर उठाता है 
अनुशासन ही मानव को मानव बनाता है। 

Monika Jain ‘पंछी’ 

In short, discipline is controlling our mind. Self discipline in every field of life helps us to get good health, true happiness, peace, success and enlightenment. It has a great role in students life. The best place to learn discipline is our schools. Children are same as raw pitcher. Discipline helps to give them good shape and turned them into good and responsible citizens, who help in building a good and developed nation. 

Poem on Discipline in English


Discipline means a good awareness of 
our duties and obligations
Discipline is necessary for the 
growth and development of our nation.

Discipline plays an important role
 in every walk of life
Discipline is the refinement of 
our inner and conscience.

Whether It’s academic, sports or 
any other field
There are countless benefits that
 a disciplined approach can yield.

Today’s students are tomorrow's leaders
It’s the discipline that is 
backbone of their character.

Discipline demands 
self control, dedication and patience
It’s the discipline that makes the learning 
effective, lasting and efficient.

Disciplined life gives us 
health and happiness
It’s the discipline that always 
leads to success.

Discipline is the essential quality
 that picks up over brutality
It’s the discipline that adds color and charm to 
everyone’s personality.

Discipline works everywhere
Whether it’s our body, universe or 
any other sphere.

. The earth and the moon revolve around the sun
 in a disciplined way
As a result after every twelve hours 
we can see night and day.

Discipline is the law of nature
and It is also necessary for the
whole social structure.

Increasing chaos in society is the 
result of indiscipline
To have a happy, peaceful and prosperous life 
we have to inculcate discipline

Without discipline society will become 
devil’s paradise
It’s the discipline that determines
 what is wrong and what is right.

Discipline is the bridge between 
goals and accomplishment
It’s the discipline that directs work
 making it fruitful and excellent.

Self discipline is the best way to achieve 
complete discipline
It’s the ability to conquer oneself 
and getting true independence.

Monika Jain ‘Panchhi’

October 1, 2013

Poem on Diwali in English

The Festival of Lights

We have brighten up our home with so many lamps
All the darkness of this moonless night is turned away in an instant.

To welcome Maa Lakshmi we have made all the arrangements
With sweets, nuts and fruits we have filled our worship plates.

We are burning so many firecrackers
and Emptying the plates of sweets and desserts.

We are wishing our friends with a great delight
and This way we have celebrated the another festival of lights.

But there are thousands of homes where there is no light
There are so many eyes without any dreams of flight.

Merely by lightning our homes the motive of diwali is not achieved
Deepawali is the sign of triumph of good over evil,
By only worshipping Maa Lakshmi our duties are not fulfilled.

Let’s Brighten up this diwali our own inner and conscience
and Remove the darkness of people who are living miserable life.

Let’s make their diwali so bright
and Celebrate in true sense this festival of light.

Monika Jain ‘Panchhi’

‘Diwali’ the festival of lights is one of the most important festival of Hindus celebrated all over the India. Each and every festival comes with a great message imbibed in it. The festivals should not be celebrated just for the sake of celebration. We should try to celebrate every festival in its true sense. So let’s this Deepawali we bring light in the life of people who are helpless, poor and living their life in darkness, who don’t have enough money to buy even a single lamp and a single piece of sweets. It’s not only our duty, in fact it’s our right too, to make this diwali more joyous and bright. Wish you all a very Happy Diwali.