November 29, 2013

Moral Story of a Mischievous Rat in Hindi

डालू चूहे का नया जन्म
(नन्हें सम्राट में प्रकाशित)

डालू चूहा बड़ा ही शैतान था। दूसरों को परेशान करने में उसे बड़ा मजा आता था। अपने चमकीले, सफ़ेद, पैने दांतों पर उसे बड़ा घमंड था। अपने नुकीले दांतों से वह कभी किसी के कपड़े कुतर आता तो कभी खाने-पीने की चीजों की बर्बादी कर देता। चंपक वन में किसी के भी घर में कोई भी नया सामान आता और डालू को उसकी ख़बर लग जाती तो वह पहुँच जाता अपनी शरारत करने। शातिर इतना था कि कभी किसी के भी पकड़ में नहीं आता और बस हीही करके दौड़ जाता।

चंपक वन के सभी जानवर डालू चूहे की हरकतों से बहुत परेशान थे। डालू के माता-पिता भी रोज-रोज के उलाहनों से तंग आ चुके थे। वे डालू को कभी प्यार से समझाते और कभी डांटते पर उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं पड़ता। एक छोटे से चूहे ने सबकी नाक में दम कर रखा था।

शाम को चौपाल पर चर्चा चल रही थी। डालू की बात आई तो गोलू खरगोश बोला, ‘अभी कुछ ही दिन पहले डालू छुपके से मेरे कपड़ों की दूकान में आया और हजारों का नुकसान करके चला गया।’

हीरू हिरण ने कहा, ‘आज मैं अपने खेत में सिंचाई कर रहा था तब ना जाने कब डालू ने नली को बीच में से काट दिया और बहुत सारा पानी बेकार चला गया। मैं उसके पीछे दौड़ा पर हँसते-हँसते जाने कहाँ ओझल हो गया।’
‘मेरी मिठाई की दूकान में तो वह कभी भी आ धमकता है और बहुत सारी मिठाई खाकर और बर्बाद करके चला जाता है। उसे पकड़ने के लिए पिंजरा भी रखा पर शैतान कभी भी पकड़ नहीं आता।’ मोलू कछुएं ने गुस्से में कहा।

सबकी बातें सुनकर भोलू भालू परेशान हो गया। कुछ ही दिन बाद उसकी बेटी की शादी थी। पिछली बार मोंटी बन्दर की शादी में उसने सारे नए-नए कपड़े कुतर डाले थे। इस बार वह कोई गड़बड़ ना कर दे यही सोचकर भोलू भालू चिंता में पड़ गया।

गिन्नी लोमड़ी भोलू भालू की चिंता को भांप गयी। वह बोली, ‘काका ! आप परेशान ना हों। हम मिलकर जल्द ही इस समस्या का कोई हल निकाल लेंगे। डालू के माता-पिता का हम सुंदरवन के निवासियों पर बहुत अहसान है। कई बार वे शहर से आये शिकारियों के जाल को काटकर हमें मुक्त कराते हैं। इसलिए हम डालू के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाकर या उसे कड़ी सजा देकर उन्हें दुखी नहीं कर सकते पर डालू को सबक सिखाना बहुत जरुरी है और इसके लिए मैंने कुछ सोचा है।’

गिन्नी ने सभी को अपनी योजना बताई। सभी ने उसकी योजना से सहमति जताई। डालू के माता-पिता को भी इस बारे में बता दिया गया।

योजना के अनुसार दो दिन के बाद गज्जू हाथी के जन्मदिन का उत्सव मनाया जाना था। जिसके लिए एक बहुत बड़ा आकर्षक और सुन्दर केक बनाया गया। इस केक को बनाने में गोंद जैसे एक चिपकाने वाले पदार्थ का उपयोग किया गया। सभी को पता था जैसे ही डालू को खबर मिलेगी कि चंपक वन में अब तक का सबसे बड़ा और स्वादिष्ट केक बनाया जा रहा है तो वह खुद को रोक नहीं पायेगा और केक को खाने और ख़राब करने जरुर आएगा।

डालू को जब केक के बारे में पता चला तो वह पार्टी शुरू होने के कुछ देर पहले ही आयोजन स्थल पर पहुँच गया। इतना बड़ा और सुन्दर केक देखकर उसका मन ललचा गया और खुराफात भी सूझने लगी। वह केक काटने से पहले ही छुपके से केक पर चढ़ गया और उसे खाने लगा। जैसे ही उसने केक खाना शुरू किया तो कभी उसके हाथ तो कभी उसके पाँव केक में चिपकने लगे। वह एक पाँव छुड़ाता तो दूसरा चिपक जाता और दूसरा छुड़ाता तो पहला। यहाँ तक कि उसके दांत भी आपस में चिपकने लगे जिसकी वजह से वह मदद के लिए चिल्ला भी नहीं पा रहा था।

धीरे-धीरे सभी मेहमान आने लगे। डालू बस धीमी सी आवाज़ में चींचीं कर पा रहा था, पर जान बूझकर कोई भी उस ओर ध्यान नहीं दे रहा था। सभी आपस में बातचीत करने में व्यस्त थे। एक ओर भूख-प्यास और दूसरी ओर केक से बाहर ना निकल पाने के कारण उसका रोना छूट रहा था। उसे अपने माता-पिता और सभी की दी गयी सलाहें और सीखे याद आ रही थी। सब उससे कहते थे जो दूसरों का बुरा करता है उसके साथ भी बुरा होता है...पर उसने कभी किसी की भी नहीं सुनी। वह मन ही मन पछता रहा था और भगवान् से प्रार्थना कर रहा था, ‘हे ईश्वर! बस इस बार मुझे बचा लो। आज के बाद मैं किसी को परेशान करने का ख्याल भी अपने दिमाग में नहीं आने दूंगा।’

कुछ देर बाद डालू चूहे की दबी-दबी आवाजें सुनकर उसके माता-पिता और सभी जानवर केक के पास आये। डालू बार-बार हाथ जोड़कर मदद की गुहार कर रहा था। वह ठीक से कुछ बोल नहीं पा रहा था पर उसका पछतावा उसकी बातों में साफ़-साफ़ झलक रहा था।

डालू का हुलिया देखकर वहां खड़े सभी जानवरों के बच्चे उस पर हंस रहे थे।

डालू के माता-पिता ने कहा, ‘यही तुम्हारी सजा है। अब तुम यही रहो और अपने नुकीले दांतों और फुर्तीले शरीर पर घमंड करते रहो।’

डालू को अपने किये पर बहुत अफ़सोस हो रहा था। उसका सर शर्म से नीचे झुका हुआ था। कुछ जानवरों से देखा ना गया और उन्होंने एक लकड़ी के डंडे की सहायता से डालू को केक से बाहर निकाला। इसके बाद थोड़ा गुनगुना पानी मंगवाया गया और डालू को उससे नहलाया गया। वह बिल्कुल साफ़ हो गया और अब वह चल भी पा रहा था और बोल भी।

वह दौड़ा-दौड़ा अपने मम्मी-पापा के पास गया और उनसे लिपट कर रो पड़ा। उसने सभी से काम पकड़कर अपने किये की माफ़ी मांगी और वादा किया कि अब वह किसी को भी कभी भी परेशान नहीं करेगा और सबकी मदद करेगा।

यह कहकर वह पार्टी में आये सभी मेहमानों को नाश्ता और चाय सर्व करने लगा। डालू में आये बदलाव को देखकर उसके माता-पिता और सुंदरवन के सभी वासी बहुत खुश थे। गज्जू हाथी ने जल्दी से नया केक मंगवाया और कहा, ‘आज तो डालू का भी नया जन्म है इसलिए हम दोनों मिलकर केक काटेंगे।’ गज्जू हाथी ने डालू को अपनी सूंड पर बैठा लिया और फिर दोनों ने मिलकर केक काटा। इसके बाद सबने केक खाया और मिलकर डांस किया। अँधेरा होने पर सभी ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर चले गए।

Monika Jain ‘पंछी’
(29/11/2013)

November 19, 2013

Poem on Indian Army Soldiers in English


Salute to The Soldiers

Defender of borders
I salute to the Indian soldiers.

Words can never describe
What a soldier and his sacrifice.

They put on hold their dreams and lives
They die so that we can survive.

They are the most disciplined persons
On them depend the security and stability of our nation.

They are the true sons of our country
Who fight to protect us from all the enemies.

They are the real heroes of the nation
Serving the motherland is their only passion.

Whether it’s the blood freezing cold or the scorching sun’s rays
They are protecting us without any holidays.

Whether the icy wind or the storms
They face all the challenges like the rocks.

They are pride of our nation
Their life is a source of inspiration.

Away from the mother, kids and wife
They are fulfilling their duty for the sake of our life.

We are grateful to the mothers
Who give birth to these soldiers.

We are obliged to the wives and kids
Who sacrifice their rights for the national deeds.

Monika Jain ‘Panchhi’
(19/11/2013)

India has one of the best armies in the world. Soldiers are the pride of our nation. They are the backbone of our country. They defend the country with their life and blood. Their life is very difficult and hard just like a bed of thorns. They fight to the last in order to save the motherland. The sacrifice of the Indian soldiers and their family members is incomparable.

The above poem is dedicated to the indian army soldiers and their family members. I know words can never describe the courage, bravery and sacrifice of our Indian army. It’s just a salute to all the soldiers. Jai Hind!