December 11, 2013

Women (Women's Day) Quotes in Hindi

Women Quotes

  • 05/01/2017 - मनुष्य जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम मनुष्य होने के भाव से ऊपर उठ सकें। उससे पहले स्त्री स्त्री होने के भाव से और पुरुष पुरुष होने के भाव से...लेकिन यहाँ तो अभी तक कपड़ा पुराण ही चल रहा है।  
  • 30/11/2016 - बात आज की नहीं है, सदियों से यही हो रहा है। स्त्री का मुंह बंद करवाना हो, उससे बदला लेना हो, उसके प्रति अपनी नफ़रत उगलनी हो...तथाकथित पुरुषों के पास कुछ गिने-चुने तरीके होते हैं : उसका बलात्कार कर दो, उसे बदनाम करने की धमकी दे दो या उसके चरित्र की बखिया उधेड़ डालो। लेकिन प्यारे तथाकथित पुरुषों! Who the hell you are to define our character? तुम्हारा दिया चरित्र प्रमाण पत्र अपने पास रखो और कागज़ पर बनाया हो तो रद्दी में बेचकर थोड़े छुट्टे इकट्ठे कर लो। इससे ज्यादा तो कोई कीमत नहीं ही है उसकी। 
  • 09/03/2015 - आज कुछ लड़कियों ने कुछ लड़कों की लगातार घूरने और पीछा करने की वही परंपरागत समस्या शेयर की। पेरेंट्स को इसलिए नहीं बता सकती क्योंकि पेरेंट्स को बतायेंगी तो घर से निकलना बंद या कम करवा देंगे। उन्हें जो समाधान सुझाना था वह तो सुझा दिया, पर कब से यही सोच रही हूँ कि ये घूरने वाले लड़कों की दुर्बुद्धि तो समझ आती है, पर ये उल्टी गंगा बहाकर ऐसे असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देने वाले पेरेंट्स की समझ समझ नहीं आती। चिंता और सतर्कता जायज है लेकिन लड़कियों के घूमने पर पाबंदी तो समाधान नहीं। 
  • 07/03/2015 - अच्छी-खासी, भोली-भाली, गंभीर-मासूम टाइप पोस्ट पे थर्ड ग्रेड शायरी चिपकाकर इश्क फरमाने वालों! भगवान करे तुम्हें कोई ऐसा मिले जो सुबह से शाम, शाम से रात और फिर रात से सुबह तक इतनी शायरी सुनाये, इतनी शायरी सुनाये कि तुम ये जगह-जगह शायरी चिपकाना जन्मजन्मान्तरों तक भूल जाओ। 
  • 30/11/2014 - अभी किसी का कमेंट देखा 'अब लड़कियां हमें धर्म सिखाएंगी? ' अब उस महाशय को कौन बताये कि खाने का पहला निवाला गले में उतारना भी उसे किसी लड़की ने ही सिखाया था। बल्कि नौ महीने उसका भार वहन कर इस दुनिया को देखने का मौका भी उसे किसी लड़की ने ही दिया था। पुरुष के योगदान को नकार नहीं रही। पर ऐसी सोच का क्या किया जाए? 
  • 01/06/2014 - अक्सर यह पोस्ट पढ़ने को मिलती है कि लड़कियों की तो hi, hello, hru पर भी 100-200 लाइक्स आ जाते हैं। कौन होती हैं ये लड़कियां? हमने तो नहीं देखी कभी। और होती भी है तो ये लाइक करने वाले कौन होते हैं? लड़को को ये क्यूँ लगता है कि लड़कियों को सब यूँ ही आसानी से मिल जाता हैं? एक बार पेज पर 8000+ लाइक्स देखकर एक लड़का बोला कि तुम लड़की हो इसलिए तुम्हारे इतने सारे फॉलोअर्स हैं। सच में? अरे भाई! तुम बस यही क्यों देखते हो कि लड़की है। मेहनत और गुण नहीं दिखाई देते तुम्हें? मैंने तो हमेशा यही महसूस किया है कि लड़की होना बहुत मुश्किल होता है। अगर आप अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते तो आपके लिए रास्ते बहुत मुश्किल होते हैं, बहुत ज्यादा। मेरी कभी यह तमन्ना तो नहीं रही कि काश! मैं लड़का होती, पर हाँ मैं इतना अच्छे से जानती हूँ कि अगर मैं लड़का होती तो मेरी ज़िन्दगी अभी जो है उससे बहुत आसान होती, बहुत ज्यादा आसान। 
  • 02/06/2014 - कमाल है! क्या ये भी कोई रूल होता है कि लड़की लड़कों को फ्रेंड रिक्वेस्ट नहीं भेज सकती? मुझे तो जिनका भी लेखन प्रभावित करता है...मैं चाहे उन्हें जानती हूँ...चाहे नहीं जानती हूँ..ऐड कर लेती हूँ। ये तो कभी सोचती ही नहीं कि वो लड़का है या लड़की, और ये भी नहीं सोचती कि मैं लड़की हूँ। 
  • 31/05/2014 - किसी के पति का किसी और महिला से अफेयर है तो खुद पत्नी द्वारा भी सबसे पहले दोष उस दूसरी महिला को दिया जाएगा। उसे डायन, कुल्टा और न जाने क्या-क्या कहा जाएगा। वह महिला बेशक गलत है, पर सबसे पहला अपराधी तो यहाँ पर खुद उसका पति है। इसी तरह जब शादी करके ससुराल में आई कोई लड़की अगर माँ-बेटे के रिश्तों में फूट डालने का काम करती है और इसमें कामयाब भी हो जाती है, तो यहाँ माँ द्वारा सारा दोष बहु को दिया जाता है, पर यहाँ भी बेटे की गलती ज्यादा है। मेरा मानना है कि अगर अपना ही सिक्का खोटा हो तो दूसरे को दोष देना व्यर्थ है...और अगर हम खुद बुराई को पोषित करने में भागीदार हैं तो हमें हक़ नहीं बुराइयों के खिलाफ़ आवाज़ उठाने का। 
  • 11/12/2013 - कई लोग कहते हैं, आजकल लड़कियां भी कम नहीं है। सहमत हूँ...कम नहीं है, पर हर अपराध में लड़कों का प्रतिशत लड़कियों से कई गुना ज्यादा है...बहुत ज्यादा। कल ही अख़बार में एक खबर पढ़ी कि एक लड़की की सहेली के भाई ने उसकी शादी वाले दिन जब वह तैयार होने के लिए पार्लर के यहाँ गयी उस पर एसिड फेंक दिया...कारण उसका उस लड़के के शादी के प्रपोजल को एक्सेप्ट न करना। ऐसी न जाने कितनी ख़बरों से अखबार भरे पड़े हैं। मार-पीट, बलात्कार, हत्या, एसिड अटैक, इस्तेमाल करके छोड़ देना, छेड़छाड़, फब्तियां कसना और न जाने कितनी तरह से महिलाओं का उत्पीड़न मामूली सी बातें है, जिन्हें लड़कों ने अपना एकाधिकार क्षेत्र समझ रखा है। 99 % ऐसे मामले लड़कों के नाम पर है, और अगर कोई इक्की-दुक्की लड़की भी ऐसा कुछ कर देती है तो लड़कों का ईगो हर्ट हो जाता है, उनके एकाधिकार का हनन हो जाता है। इसलिए सब चिल्लाने लगते हैं कि लड़कियां भी कम नहीं है। अगर लड़कियां भी ऐसा करती हैं तो वे बिल्कुल अपराधी हैं, सजा की हकदार हैं। सब लड़के एक से नहीं होते ये भी मानती हूँ, पर कुछ भी कहने से पहले आंकड़ों पर एक नज़र जरुर डालिए। 
  • आज जब महिला पुरुष समान अधिकारों की बात हो रही है। ऐसे मैं न केवल लड़के और लड़कियों को समान रूप से आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करने की जरुरत है, बल्कि उन्हें घर और बाहर की जिम्मेदारियों के प्रति भी समान रूप से तैयार करना जरुरी है। 

Monika Jain ‘पंछी’

December 1, 2013

World Aids Awareness Day Story in Hindi

अंधेरों में गुम न हो रोशनी

कुछ महीनों पहले ही इस नए शहर में शिफ्ट किया है। घर के पास ही बच्चों का एक पार्क है। शाम होते ही खेलते हुए बच्चों का शोर चिड़ियों की चहचहाहट की तरह हवा में घुल जाता है। बच्चों को इस तरह खिलखिलाकर खेलते हुए देखना मुझे बहुत सुकून देता है। अक्सर जब काम करते-करते थक जाती हूँ तो पार्क की ओर अपना रुख कर लेती हूँ। कभी बच्चों से बातें, कभी उनके साथ खेलना, कभी यूँ ही उन्हें बैठे-बैठे निहारना और अपने बचपन में खो जाना मुझमें एक नयी ही ऊर्जा भर देता है।

पर कल शाम पार्क से लौटने के बाद मन बहुत बेचैन था। तरह-तरह के सवाल मन में उठ रहे थे और बार-बार उस मासूम बच्ची का चेहरा मेरे दिल और दिमाग में उभर रहा था। करीब 7-8 साल की होगी वो। पहली बार ही उसे पार्क में देखा था।

काम करने में मन नहीं लग रहा था सो मेरे कदम पार्क की ओर बढ़ गए। पार्क में सारे बच्चे ग्रुप्स बनाकर खेल रहे थे। कोई पकड़म-पकड़ाई, कोई रुमाल झपट्टा तो कोई आँख मिचौनी। कुछ बच्चे पार्क के झूलों में झूल रहे थे, कुछ फिसल पट्टी पर फिसल रहे थे। सब अपने में मग्न थे। मैं भी उन्हें देखते-देखते टहल रही थी, तभी सहसा पार्क के एक कोने में नज़र पड़ी जहाँ एक प्यारी सी बच्ची अकेले ही मिट्टी से खेल रही थी।

उसके बार-बार आँखों पर गिरते बाल, मिट्टी से सने हाथों से उन्हें हटाने की कोशिश, बीच-बीच में खेलते हुए बच्चों को बड़ी उम्मीद भरी नजरों से देखते हुए मुस्कुरा जाना और फिर उदास होकर मिट्टी के घरौंदे बनाने में लग जाना, यह सब मुझे उसकी ओर खींच रहा था। ऐसा महसूस हुआ जैसे वह बच्चों के साथ खेलना चाह रही है पर कुछ सहमी हुई सी है।

मुझे लगा नयी बच्ची होगी, सबके साथ घुलने-मिलने में शर्मा रही होगी सो उससे दोस्ती करने और सबसे उसकी दोस्ती करवाने की सोचकर मैंने उसकी ओर रुख किया। मुझे अपनी और आता देखकर उसने खेलना एकदम से बंद कर दिया और सहमी हुई नज़रों से मुझे देखने लगी। मैंने उसके पास बैठकर ज्यों ही उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा। वह एक दम हड़बड़ाहट में उठ खड़ी हुई। उसके हाथों की मिट्टी चारों ओर बिखर गयी। मैं कुछ बोलती इससे पहले ही वह डरते हुए वहां से तेजी से दौड़ कर भाग गयी।

‘बच्चे मूडी होते हैं। अजनबी हूँ सो घबरा गयी होगी।’, यह सोचते हुए मैं वापस अपनी जगह पर आ गयी। पर ना जाने क्यूँ उसके बारे में जानने की जिज्ञासा में मैंने एक बच्चे को आवाज़ दी और अपने पास बुलाया। पार्क के कई बच्चों से दोस्ती हो गयी थी। बच्चा बुलाते ही दौड़ा-दौड़ा चला आया।

‘अभी थोड़ी देर पहले वह छोटी सी लड़की जो उस कोने में खेल रही थी, क्या तुम उसे जानते हो? मैंने उसे पहले कभी यहाँ देखा नहीं, क्या वह यहाँ नयी है? तुम लोग उसे अपने साथ क्यूँ नहीं खिला रहे थे और वह इतना डर क्यों रही थी?’ एक ही सांस में न जाने कितने सवाल पूछ डाले मैंने।

बच्चा थोड़ा सकपकाया हुआ बोला, ‘ रोssशनी, क्या आप रोशनी के बारे में पूछ रहे हो दीदी? वह जो मिट्टी में खेल रही थी? मैंने सहमति में सर हिला दिया और कहा, ‘हाँ! मैं उसके पास भी गयी पर वह भाग कर चली गयी।’

बच्चा घबराया हुआ सा बोला, ‘दीदी! आपको उसके पास नहीं जाना चाहिए था। मम्मी कहती है, उसे कोई भयंकर बीमारी है। हम उसके साथ खेलेंगे तो वह हमें भी बीमार कर देगी, इसलिए हममें से कोई भी उसके पास नहीं जाता। कल भी वह हमारे ग्रुप के पास आ गयी थी तो हमने उसे भगा दिया। आप भी उसके पास मत जाया करो।’ यह कहकर बच्चा तो दौड़ कर चला गया और अपने ग्रुप में शामिल होकर फिर से खेलने लगा पर मेरे दिल और दिमाग में न जाने कितने सवाल छोड़ गया।

मैं एकदम निश्चेत सी बैठे कभी उस ग्रुप को तो कभी उस कोने को देखती रही जहाँ अब रोशनी की जगह बस अँधेरा ही अँधेरा नज़र आ रहा था।

मैंने आसपास के लोगों से मालूम किया तो पता चला उसके मम्मी, पापा और उसे एड्स है। सब लोग उसके परिवार से दूर रहते हैं। यहाँ तक कि उन पर कॉलोनी को खाली करने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

मेरे मन में बहुत से सवाल उठे, ‘इतनी सी बच्ची जो बिल्कुल निर्दोष है उसे इतनी भयानक बीमारी? ऊपर से इस तथाकथित पढ़े लिखे समाज की अज्ञानता और संकीर्णता से भरी यह मानसिकता जो पीढ़ी दर पीढ़ी थोपी जा रही है। आखिर क्यों?’

मैंने तुरंत निश्चय किया कि उस परिवार की मदद करुँगी और एड्स को लेकर जो भी भ्रम और भ्रांतियां लोगों के दिमाग में हैं, उसे दूर करुँगी। उन्हें बताऊँगी कि एड्स छूने से नहीं होता। साथ-साथ उठने-बैठने, खाना खाने, एक दूसरे के कपड़े इस्तेमाल करने से भी एड्स नहीं फैलता। बल्कि एड्स के मरीज के प्रति नम्र व्यवहार जरुरी है ताकि उसकी हिम्मत और हौंसला बना रहे और वह भी एक आम जीवन जी सके। रोशनी की किरणें उसके जीवन में सदा बिखरी रहे और कभी अँधेरा न हो।

Monika Jain ‘पंछी’
(01/12/2013)

World Aids Day is held on the 1st december every year. Let we unite to fight against aids and show our support towards people suffering from aids.

World HIV Aids Awareness Day Poem in English


Why this Cruelty?

A little girl was playing alone in a garden
I went to her attracted by her innocence
But she was scared with my presence. 

I caressed her head with affection 
But she got up suddenly and ran away in fear 
'Children are moody' 
considering this I returned from there.

From a group of kids playing in the garden 
a child came to me 
Pointing towards that little girl 
he told me - 

Sister! never touch that girl 
She is suffering from aids 
Playing with that girl is not
permitted by our parents.

After saying this 
that child ran to play again 
But his statement left 
so many questions in my brain.

Who made no mistake 
Why this cruelty with that innocent?
and Why this narrow mindedness of society 
to this extent?

Monika Jain 'Panchhi'
(01/12/2013) 

The above poem shows the ignorance and narrow mentality of our society, where HIV positive people are seen by hatred and they are neglected, abandoned and ignored. It’s a foolish behavior. As HIV is not transmitted by casual contacts like touching, holding and shaking hands, hugging, kissing, working and playing together, coughing, sneezing, spitting, sharing food, clothes, toilets etc. 

HIV is transmitted through unprotected sex with an infected partner, from an infected mom to her unborn child, from transfusion of HIV infected blood and blood products and from infected needles and syringes.

Aids infected people need more care and affection. So we should treat them friendly and We should bring them in the mainstream of our society so that they never feel isolated and ignored and can bravely fight with this disease.