August 22, 2014

Poem on Love (Sacrifice) in Hindi


(1)

मेरे हिस्से की धूप तुम्हारे लिए 

देख रही हूँ कबसे 
तुम्हारे जीवन में आई 
इस नयी सुबह के सूरज को 
माँगना चाहती हूँ उससे 
मेरे हिस्से की रौशनी भी 
तुम्हारे लिए। 

और लौट जाना चाहती हूँ 
फिर से उन गुमनाम अंधेरों में 
जहाँ से एक दिन लाये थे तुम मुझे 
सपनों की धूप से खिलखिलाते सवेरों में। 

ताकि कल जब मैं ना रहूँ 
तब भी मेरे हिस्से की धूप
चहकती रहे तुम्हारे आँगन में 
और तुम्हारे सपने 
बनकर मेरी चाहत 
पलते रहे तुम्हारे जीवन में। 

तुम्हे अच्छा लगे या लगे बुरा 
पर इसमें भी मेरा ही स्वार्थ है 
तेरा मेरा ना सही
हमारे हिस्सों की धूप का तो साथ है। 

हाँ जानती हूँ कई शिकायते हैं तुम्हें  
ना जाने कब से 
और नहीं चाहते हो तुम अपने लिए 
कोई भी दुआ अब मुझसे। 

पर एक दिन मिलकर 
बताना चाहूंगी तुम्हें 
कि मैंने ऐसा क्यूँ किया?
क्यूँ बार-बार खुद को 
और तुम्हे बेवजह दर्द देकर
अपने से दूर किया। 

क्यूँ बढ़ ना पायी उन रास्तों पर 
जिन पर चलने की हमारी चाहत थी 
क्यूँ बदल डाली वो राहें 
जिन पर खिलखिलाती सी 
तेरी-मेरी मुस्कुराहाट थी। 

तब तक के लिए सीख लूंगी
तुम्हारी नफरत और शिकायतों 
के साथ जीना 
तुम्हें क्या पता? 
कितना अच्छे से आता है मुझे 
ज़िन्दगी का दर्द पीना। 

खैर! कल के सूरज के साथ 
मैं नहीं रहूंगी तुम्हारे जीवन में 
हाँ, मेरी दुआएं शामिल होंगी 
तुम्हारी राहें रोशन करने वाली 
हर एक किरण में। 

बस चाहती हूँ तुम्हारा जीवन 
सफलता का पर्याय बन जाए 
और तुम्हारी उम्मीदों का आसमां
तुम्हें बुलंद ऊंचाइयों पर ले जाए। 

प्यार की तुम्हारे जीवन में 
कुछ ऐसी बारिश हो 
बन जाए वह तुम्हारी 
जिसे पाने की 
तुमने की ख्वाहिश हो। 

उठ रहे होंगे न जाने 
कितने सवाल 
तुम्हारे भी जेहन में 
हाँ नहीं समझ पाओगे तुम 
क्या चल रहा है मेरे मन में। 

गर समझना चाहो तो बस 
इतना ही समझ लो कि 
अब ऐसे ही सपने बुनती है
तुम्हारी ये मिष्टी 
और ऐसे ही उड़ता है 
उसके मन का पंछी। 

Monika Jain ‘पंछी’
(12/2013)

(2)

ख़ामोश कुर्बानी

नफरत, व्यंग्य और तानों के शोर में 
मैंने आखिर छिपा ही ली 
मोहब्बत तुझसे बेपनाह 
दबा दिया हर वो शब्द और अहसास 
जो था तुझसे मेरे इश्क का गवाह। 

इसे अपनी जीत कहूँ 
या कहूँ अपनी करारी हार 
जिसे ना हो नींद में भी 
ख़्वाबों को छूने की इजाजत 
उसे भला क्यों होता है प्यार?

तुझे तो शायद कभी 
अहसास भी ना हो 
मेरी खामोश कुर्बानी का 
क्योंकि दिल में झांकना 
तूने कभी सीखा ही नहीं 
जो तुझे लग रहा था कड़वा
वह था बस मीठा
तीखा कभी था ही नहीं। 

तुझे नहीं बता सकती थी 
कभी भी नहीं 
कि तेरे बिन जीया नहीं जा सकता है 
तू चल देगा कभी भी कहीं ओर 
इसे नज़रअंदाज़ भी तो नहीं किया जा सकता है। 

तेरे साथ प्यार हमेशा एक सजा रही 
तेरे बिना भी जीने की कोई वजह नहीं 
पर सजा से बेहतर है वजह का ना होना 
हर पल टूटने से कई बेहतर है
ताउम्र बिखरकर जीना। 

कड़वा, मीठा जो भी है, तेरी यादों का पिटारा 
उसे ही बना लूंगी मैं, अपने जीने का सहारा 
पर तेरे दिल में मैं हमेशा नफरत बनकर ही रहूंगी 
पीती रहूंगी अपनी खामोश कुर्बानी का दर्द 
पर तुझसे कभी कुछ भी ना कहूँगी 
तुझसे कभी कुछ भी ना कहूँगी। 

Monika Jain ‘पंछी’
(22/08/2014)

20/11/2017 - Note : These are old writings and leading to spirituality, today I am not concerned with such writings. As spiritualism is a journey from expectations to acceptance, from complaints to responsibility, from dependence to independence, from innocence to flawlessness and from ignorance to awakening. No matter, whoever is in front of us, whatever wrong he did with us, how difficult our situations are, in spiritualism there is no other.

Break Up Poems in English

(1)

Dry Rose

The rose kept in the pages of my diary
has dried as our relationship
But the fragrance coming from it is still alive
as the memories of our companionship.

How much I cried
So much I screamed
With our separation
I was never agreed.

I felt like my body was being ripped
Emptiness you left behind is still unfilled
You took away my smile, laughter and happiness
When I lost you I lost myself.

Little hopes I had inside you killed
You destroyed more than you helped to built
You left me alone and scared in the rain
What I felt I can’t explain.

Loneliness tortured me every moment
But gradually I tried to live
I didn't forget anything
But I tried my best to forgive.

Now no tears flow from my eyes
Life doesn't stop in absence of your care
I have paid a big amount for it
The smile of my lips has lost forever.

Today when I saw that dried rose
It reminded me of my broken dreams
A tear came from my eyes
That were waiting for years to stream.

Monika Jain 'Panchhi'
(09/2012)

(2)

One Day You Will Come

Do you remember the day
When we met for the last time
Don't know what you were feeling
But for me it was very tough time.

I was feeling like
My soul has been separated out from my body
and my heart was shivering
Because of this unwanted farewell ceremony.

I was gripped with an unknown fear
When you disappeared my eyes filled with tears
I was gazing endlessly upon the way
As it was difficult to accept that you have gone away.

Saying goodbye to you was a heartbreaking moment
A part of mine was being separated, I felt
I wanted to shout, cry and scream
As I was left with only broken dreams.

Endless days and sleepless nights
Without you in my life nothing is right
The wholeness I felt with you is now incomplete
With your own you took my breath.

Remembering every single moment i spend with you
Deep down in my heart so much I love you
I am still waiting with a hope in my heart
One day you will come never to be apart.

Monika Jain 'Panchhi'
(01/04/2013)

(3)

Silent Sacrifice

In the noise of your hatred, taunts and sarcasm
Finally I succeeded to hide the too much love for you
I suppressed all those words and feelings
Which were the witness of my love to you.

Tell it a victory
or say it my worst defeat
Why love happens to the person
who is not allowed to
touch the dreams even in sleep.

You may not realise ever
the silent sacrifice of mine
Because you never learned
to look into the heart
Which seemed bitter to you
was just sweet
That was never tart.

I couldn’t tell you, never
That it’s impossible to live without you
But you would move anytime, anywhere
It can’t be ignored too.

Love with you was always a punishment
There is also no reason to live without you
But absence of reason is better than punishment
To live scattered for the whole life is
better than breaking in every moment.

Bitter, sweet whatever it is your memory box
I will make it the support of my life
I would never say anything to you.
While drinking the pain of my silent sacrifice.

Monika Jain ‘Panchhi’
(22/08/2014)

26/11/2017 - Note : These are my old writings and leading to spirituality, today I am not concerned with such writings. As spiritualism is a journey from expectations to acceptance, from complaints to responsibility, from dependence to independence, from innocence to flawlessness and from ignorance to awakening. No matter, whoever is in front of us, whatever wrong he did with us, how difficult our situations are, in spiritualism there is no other.

August 17, 2014

Quotes on Hypocrisy in Hindi

Hypocrisy Quotes

  • 25/05/2017 - एक महिला हैं। महीने भर का झूठ, छल, कपट, गाली-गलौच, दादागिरी, लड़ाई-झगड़ा...etc...etc...सब करके हर महीने गंगा में डुबकी लगा आती हैं। भारत के अलावा पाप धोने की यह सुविधा और कहाँ-कहाँ है? (मने बस पूछ रहे हैं।)
  • 12/04/2017 - यहाँ हमारे शहर में हिन्दुओं और मुस्लिमों के हर धार्मिक जलसे और जुलूस में कोई न कोई हत्या, मारपीट, दंगा या झगड़ा होता ही है और पूरे शहर की सामान्य गति में बाधा। हालाँकि यह पूर्ण समाधान नहीं लेकिन फिर भी बहुत जरुरी लगता है सभी धर्मों (सभी मतलब सभी) के सड़कों पर प्रदर्शन पर रोक। बस तथाकथित धार्मिक लोग यह समझ पाए।
  • 22/03/2016 - आज 'विश्व जल दिवस' है। मैंने सोचा आज जल संरक्षण पर एक कविता लिखूं, पर फिर सोचा आज लिखने वाले बहुत से हैं। मैं किसी और दिन लिखूंगी। जब हम आज के दिन कही बातें भूल जायेंगे। 
  • 21/02/2016 - पता है हमारी सबसे बड़ी समस्या क्या है? पाखण्ड, दोहरा आचरण। अब इससे बड़ा इसका और क्या सबूत हो कि आरक्षण मांगने वालों से ही सुरक्षा और बचाव की जरुरत पड़ जाए। 
  • 26/05/2015 - बड़ी विसंगति है भई! लोग सड़क पर खून से लथपथ इंसान को अनदेखा कर आगे बढ़ सकते हैं। मदद के लिए चिल्ला रही लड़की को अनदेखा कर आगे बढ़ सकते हैं।...और भी न जाने कितनी जरुरी चीजों को अनदेखा कर आगे बढ़ सकते हैं। पर बात जब उनकी जाति, धर्म या संप्रदाय पर किसी टीका टिपण्णी की आती है तो वे तलवारें हाथ में लेकर आलोचकों का सर कलम करने तक का हुनर रखते हैं। तब सारा भय जाने कहाँ काफूर हो जाता है। सच सिर्फ इतना है कि आधी से ज्यादा दुनिया सिर्फ प्रतीकों, दिखावे, ढोंग और आडम्बरों से प्यार करने वाली है। हम जिन्दा नहीं जिन्दा होने का दिखावा करने वाले लोग हैं। 
  • 09/01/2015 - आप किस बात की प्रतिस्प्रधा कर रहे हैं? मेरे धर्म में तुम्हारे धर्म से कम पाखण्ड और कट्टरता है इसका? या फिर मेरे धर्म में तुम्हारे धर्म के बनिस्पत कम खून बहाया जाता है इसका? महानुभावों! धर्म कभी भी बुराइयों और पाखंडों के बल पर बेहतर या कमतर सिद्ध नहीं किये जा सकते। बेहतरी हमेशा अच्छाई के बल पर ही सिद्ध होती है, बुराई के तुलनात्मक अध्ययन से नहीं। वैसे सच तो यह है कि जिसमें बुराई या पाखण्ड का अंश मात्र भी हो, वह धर्म ही कैसा? हँसी बस इसी बात पर आ रही है कि इस तगड़ी प्रतिस्पर्धा की भावना ने बेचारे धर्म का क्या हाल बनाकर रख दिया है। वैसे बात हँसने की नहीं रोने की है। क्योंकि हैवानीयत में भी जो होड़ होने लगी है आजकल, उसकी कितनी बड़ी कीमत समूची मानवता को चुकानी पड़ेगी, इस बात का अंदाज़ा नहीं हमें अभी। 
  • 04/09/2014 - समस्या धर्म ग्रंथों की नहीं, समस्या धर्म के मठाधीशों की है। धर्म ग्रन्थ तो पढ़ते ही कितने लोग हैं? पर ये धर्म के मठाधीश अपने व्यक्तिगत हितों और स्वार्थों के लिए और अपनी-अपनी दुकानें चलाने के लिए कैसे भी हो, बस स्थायी ग्राहक चाहते हैं। मुक्ति इन मठाधीशों से मिलनी चाहिए। वैसे कोई बुरा माने चाहे अच्छा, पर मुझे तो ज्यादातर साधु-संतों-मौलवी-पादरियों (?) के चेहरे से ही शैतानियत टपकती नज़र आती है। 
  • 17/08/2014 - वैसे ये व्रत और उपवास त्याग के लिए होते हैं या भोग के लिए? आलू के चिप्स, साबूदाने की खिचड़ी, आलू, लौकी और सिंघाड़े का हलवा, कुट्टू और राजगिरी के आटे की पूरियाँ, आलू की सब्जी, फ्रूट्स, जूस, मेवे और भी न जाने क्या क्या...:p ऐसे तो ताउम्र व्रत और उपवास किये जा सकते हैं। :)
  • सोच रही थी कि लोगों ने जिन-जिन महापुरुषों को अपनी-अपनी संपत्ति बना रखा है, अगर वे महापुरुष उनके वर्तमान व्यक्तिगत जीवन में निकट सम्बन्धी होते या आसपास ही होते तो उनके उनसे कैसे सम्बन्ध या उनके प्रति कैसे विचार होते? :p 
  • सहानुभूति भी अक्सर वही पाता है जिसे सहानुभूति बटोरने की कला आती है। 
  • ख़ुशी होती है जब संकीर्णता कम होती दिखती है। पर कभी-कभी इस ख़ुशी पर तेज तमाचा भी पड़ता है, जब पता चलता है कि संकीर्णता खत्म नहीं हो रही, बस उसने आधुनिकता और दिखावे का नया लबादा ओढ़ लिया है। गहराई में जाने पर आधुनिक-खुले विचारों का खोखलापन कहीं-कहीं साफ़ नज़र आ जाता है। बहुत जरुरी है, इस खोखलेपन का भरा जाना। 
  • कई लोग गर्व से कहते है कि वे विस्तृत सोच वाले हैं, पर एक कटु सत्य यह है कि इन ज्यादातर विस्तृत सोच वाले लोगों के दिमाग में विस्तृत सोच की संकीर्ण परिभाषा होती है। 
  • उसे नहीं पता था कि अच्छी किताबें सिर्फ मनोरंजन के लिए और अच्छे व्यक्तित्व सिर्फ पूजा के लिए होते हैं, अनुसरण के लिए नहीं। उसे नहीं पता था कि बड़ी-बड़ी बातें सिर्फ लिखने के लिए होती है, अमल करने के लिए नहीं। उसे नहीं पता था कि ऊपर से नीचे तक गहनों से लदी मूर्तियों के सामने फल और पकवानों से सजी थालियाँ लेकर पूजा करना हंसी का पात्र नहीं बनाता लेकिन आदर्शों, नैतिकता और मानवीय मूल्यों की बातें करना बना देता है। उसे नहीं पता था कि मूर्तियों के रूप में जिन आदर्शों की पूजा की जाती है, उन्हीं आदर्शों को वास्तविकता का जामा पहनाने वालों को मौत के घाट तक उतार दिया जाता है। सच! उसे नहीं पता था कि उसे कुछ भी नहीं पता।
  • प्रकृति का दैवीकरण, ईश्वर की कल्पना, उसके प्रति आस्था...यह बहुत बड़ी समस्या नहीं है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब कोई जाने-अनजाने इस आस्था को उल्टा-सीधा कुछ भी कर लेने का लाइसेंस समझने लगता है। धर्म और आस्था अहंकार (जो सभी बुराईयों की जड़ है) के मिट जाने के लिए है, अहंकार को संरक्षण देने के लिए नहीं है। इन्हें प्रदूषित होते देखना अच्छा नहीं लगता। 

Monika Jain ‘पंछी’

August 14, 2014

Poem on Dance in Hindi


नृत्यमय 

कभी-कभी कहता है मन मयूरा 
थिरकती रहूँ मैं एक ताल पर 
अपनी आखिरी सांस तक। 

क्योंकि, मैं चाहती हूँ 
सदा के लिए खो जाना 
और इतना डूब जाना 
कि ये बाहरी दुनिया की घुटन 
मेरी साँसों को छू भी ना पाए। 

मैं चाहती हूँ 
उस दुनिया में पहुँच जाना 
जहाँ मेरी मुद्राएँ 
रचती है मेरा संसार 
और जहाँ थिरकते क़दमों से 
होती हुई मुस्कुराहट 
बस जाती है मेरे होठों पर 
और कराती है मुझे 
पूर्णता का अहसास। 

जहाँ आज़ादी का स्पर्श 
भर देता है रोम-रोम को 
अनोखे आनंद और उल्लास से 
बिन पंखों के भी होती है जहाँ उड़ान 
अदम्य उत्साह और विश्वास से। 

नृत्य अहसास है 
बहती हुई नदी से उगते हुए सूरज का 
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण 
चहुँ ओर से 
हवाओं का स्पर्श पाने वाली 
आत्मा के उत्कर्ष का। 

जब थिरकते हैं कदम 
तो मेरे संग झूमते हैं 
फूल, पत्तियाँ और बहारें भी 
मेरी खुशियों के गवाह बनते हैं 
पर्वत, चाँद और सितारे भी। 

लगता है जैसे 
सारी वसुधा हो गयी हो 
नृत्यमय! 
प्रत्येक कण, क्षण और जीवन 
झूम रहा है कुछ ऐसे 
कि नहीं पता अब मुझे 
क्या होता है भय। 

Monika Jain ‘पंछी’
(14/08/2014)

Dancing is beautiful, exciting and inspiring. It allows us to express what we are. It gives the feeling of perfection, freedom, immense pleasure, peace and satisfaction. It helps us to discover ourselves. It help us to pick, when we feel bad. While dancing we forget all our problems and stresses. It makes us feel connected, lively and energetic. When we dance we feel like flying bird. So to be free, to forget and to express let’s dance. :) 

Poem on Dance in English

(1)

I Wanna Dance

I wanna dance till my last breath...
By drowning in dance
I want to be lost forever
So the suffocation of external world
couldn’t touch my breath ever.

I wanna reach in the world
Where my impressions make my universe
Where the smile
passing through my dancing steps
settles on my lips.

Where the touch of freedom
fills the pore of my body with joy and gladness
Without wings where I fly with
indomitable spirit and confidence.

Dancing is the feeling of rising sun
from a flowing river
Getting the touch of winds
from all the directions
north, east, west and south
It’s the exaltation of soul.

Dancing gives me
the feeling of completeness
Mountains, moon and stars...
All become
the witness of my happiness.

It seems like the whole earth is
fascinating with dance
Flowers, leaves, butterflies
even each particle, moment and living being
are enjoying my dance.

Monika Jain 'Panchhi'
(14/08/2014)

(2)

Love with Dance

The word dance is undefined
It's the expression of heart not of mind.

Dance is the language of soul
It is one of your best pal.

Dance take us in a totally new world
Where we can fly like a bird.

The world of dance is so beautiful
It makes the life very colorful.

You will forget all your pain
Peace and happiness you will gain.

Everyone should take this chance
and You will fall in love with dance.

Monika Jain 'Panchhi'
(05/2012)

Dancing is the way to express and explore ourselves. To feel the perfection, freedom, pleasure, peace and satisfaction, everyone should dance.