March 13, 2015

Jealousy (Jealous People) Quotes in Hindi

Jealousy Quotes 

  • 04/01/2017 - ईर्ष्या, द्वेष, हिंसा जैसी मूल वृत्तियाँ प्रच्छन्न नहीं रह सकती। ये छिपाए नहीं छिप सकती। कहीं न कहीं, कैसे न कैसे, किसी न किसी रूप में प्रकट हो ही जाती है। इनका दमन करना कोई समाधान नहीं, इनसे ऊपर उठना ही समाधान है। 
  • 12/03/2016 - कोई अपने स्तर से ऊपर उठता प्रतीत हो तो उसे भावनात्मक शब्दों, आलोचनात्मक और व्यंग्यात्मक बाणों से फिर से अपने ही स्तर तक खींच लाने का प्रयास! ईर्ष्या, स्वार्थ और अहंकार ऐसे ही होते है न? और परीक्षा? वह भी तो ऐसी ही होती है। 
  • 11/01/2016 - जब हमारी श्रेष्ठता किसी को नीचा दिखाने से सम्बंधित हो जाती है तो वह श्रेष्ठता नहीं वरन कुंठा होती है। 
  • 13/03/2015 - व्यक्तित्व का ऐसा कोई प्रारूप नहीं जिसे सारी दुनिया स्वीकार कर ले। महावीर, बुद्ध जैसे महामानव तक लोगों की ईर्ष्या, क्रोध से नहीं बच पाए तो हम किस खेत की मूली हैं? जिस दुनिया में मासूम, निरपराध, पूरी तरह से निर्दोष अजन्में बच्चे तक को नहीं बक्शा जाता...उस दुनिया में यह अपेक्षा करना कि कोई हमसे नफरत नहीं करेगा, कोई हमें चोट नहीं पहुँचायेगा...पूरी तरह से बेमानी है। तो फिर रास्ता क्या है? रास्ता सिर्फ इतना है कि हम सही रास्ते पर दृढ़ता से चलते रहें। लोग जीना दुश्वार करेंगे, हमें नुकसान भी पहुँचायेंगे, हमारी आलोचना होगी, हमें अस्वीकार भी किया जाएगा...और इन सबके फलस्वरूप निराशा और उदासी हम पर हावी होगी। लेकिन इन्हें हावी होने देने से पहले एक पल हमें सोचना है कि...हम तो वही कर रहे हैं जो वो लोग चाहते हैं। और फिर उन लोगों के बारे में सोचना है जो हमसे हर हाल में प्यार करते हैं। लोग न भी हो तो वह शक्ति है जिसने हमें बनाया है फिर चाहे उसे ईश्वर कहा जाए या प्रकृति...और यहीं से हमें अपनी सकारात्मक ऊर्जा के ओरा को इतना असरदार बनाना है कि उसे किसी की ईर्ष्या या नफरत छू भी ना पाए। 
  • कुछ लोगों को अपनी गुरुता का अभिमान बहुत ज्यादा होता है। इन मायनों में कि जैसे उन्होंने कभी किसी को कुछ बता दिया तो इसका मतलब यह हुआ कि उस इंसान को जो कुछ भी आता है या उनके आने से पहले भी जो आता था, वह सब उनकी ही देन है। खैर, ऐसा कोई आपवादिक सच हो तब भी अभिमान का कोई कारण बनता ही नहीं। क्योंकि जिसने दिया है उसे भी कहीं से मिला ही है। सामने वाले के स्नेह, सम्मान, विनम्रता और लगाव से सिक्त व प्रभावित श्रेय/कृतज्ञता को वे पहचान नहीं पाते...और उनकी गुरुता का अभिमान और भी बढ़ जाता है। कभी-कभी स्नेह की डोर टूट जाने पर अंतत: यह अभिमान ईर्ष्या का रूप ले लेता है। 
  • जो सारी दुनिया की ईर्ष्या से बचने की कवायद करता रहा, वह उससे ही ईर्ष्या कर बैठा जिसने उससे प्रेम किया था। 
  • सिर्फ सीक्रेट क्रश ही नहीं होते...होती है सीक्रेट एन्मिटी भी। बस वह ज्यादा देर तक सीक्रेट रह नहीं पाती। 

Monika Jain ‘पंछी’

March 9, 2015

Misunderstanding Quotes in Hindi

Misunderstanding Quotes

  • 06/02/2017 - कुछ लोग बंद आँखों से भी पढ़ लेते हैं और कुछ खुली आँखों से भी नहीं पढ़ पाते।
  • 11/11/2016 - कुछ लोग कुत्ता पालते हैं, कुछ बिल्ली पालते हैं और कुछ सिर्फ गलतफहमियां। 
  • 21/12/2016 - मेरे जीवन की सबसे बड़ी ट्रैजेडी यह है कि जब भी मैंने प्रेम में कुछ कहा, किया या लिखा...तो या तो वह बहुत हाई लेवल की बात लगी या फिर कोई बात ही नहीं लगी और लगी तो पता नहीं क्या-क्या लगी।
  • 10/09/2016 - जिनसे भी आपका 36 का आँकड़ा हो उन्हें पढ़ना तत्काल बंद कर देना चाहिए। क्योंकि वे कुछ भी सोचकर लिखेंगे, किसी भी सन्दर्भ में लिखेंगे, अपने विचारों की चक्की में घुमा-घुमाकर आप उस लिखे हुए को अपने विरुद्ध बना ही लेंगे। 36 के आँकड़े वालों से संवाद तो होते नहीं, इसलिए गलतफहमियां बढ़ने के अतिरिक्त और कोई आसार भी नहीं होते।
  • 17/04/2016 - भाषा की सीमायें जो नहीं समझते...उनके पास तर्काभासों का ढेर होता है। और यहाँ भाषा की सीमा का आशय केवल भाषा की शिष्टता व मर्यादा से नहीं, कुछ भी अभिव्यक्त कर पाने में भाषा की कमियों से भी है। ऐसे में मुख्य बात होती है भावार्थ तक पहुँच पाना।
  • 27/03/2016 - तुम कुछ भी कहो...कोई उतना ही समझेगा, जितना वह समझ सकता है और समझना चाहता है।
  • 01/11/2015 - ओशो के विचारों की ओशो के ही भक्तों द्वारा धज्जियां उड़ते देखना अच्छा नहीं लगता। खैर! ओशो ही क्या यह बात तो हर विचारक के साथ है। पर जब ओशो कहते हैं अपनी सारी कमियों, बुराइयों, वासनाओं, इच्छाओं, अपराधों को स्वीकारने की बात...तो इसका आशय यह नहीं होता कि कोई अपनी बुराइयों या कमियों के प्रति इतना मुग्ध हो जाए कि उससे छुटकारा पाने की सारी जिम्मेदारी परमात्मा पर डालकर खुद चैन से डूबा रहे। स्वीकार करना सुधार करने की दिशा में पहला कदम है। जब तक हम अपने मन में यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हम चोरी करते हैं, जब तक हम यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हम झूठ बोलते हैं, जब तक हम यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हम क्रोध करते हैं, शोषण या अन्याय करते हैं तब तक हम इन्हें दूर करने या सुधार करने की दिशा में सोच भी कैसे पायेंगे? समर्थक या अनुयायी बनना ज्यादातर लोगों के लिए सबसे आसान काम है। जिसका समर्थन किया जा रहा है उसे समझ पाना बड़ा मुश्किल।
  • 08/06/2015 - बड़ी समस्या है...कुछ भी कहना या लिखना जितना अच्छा साबित हो सकता है, उतना ही ख़तरनाक भी। भाषा की सीमाएँ नहीं कर पाती मंतव्य को पूरी तरह स्पष्ट और फिर कई बार होने लगते हैं अर्थ के अनर्थ। 
  • 18/05/2015 - कौन ज्यादा अभागा? जिसे समझा नहीं गया वह या फिर जो समझ नहीं पाया वह?
  • 09/03/2015 - उफ़! ये अकाउंट डीएक्टिवेट करो, तो दस लोग सोचने लगते हैं कि हमें ब्लॉक कर दिया। इतने दिन से पढ़ रहे हैं पर इतना सा नहीं जानते?...और मुझ पर भरोसा नहीं तो न सही, कम से कम खुद पर तो भरोसा हो।
  • 08/12/2014 - भला हो जाता सारी दुनिया का अगर लोग शब्दों को पकड़ने के बजाय, उनके मर्म को समझ लेते।
  • 04/10/2014 - आप सुबह के बाद सीधा रात में ऑनलाइन आते हैं। कभी-कभी हो सकता है आप कई दिनों बाद भी आयें। इस बीच आपके पास फेसबुक पर मैसेज आते हैं। ऑनलाइन आने के बाद आप तुरंत उनका रिप्लाई करते हैं और तभी आपको ये पता चलता है कि आपको तो रिप्लाई न किये जाने की वजह से पहले ही अनफ्रेंड कर दिया गया है। अजीब लगता है, जब वो लोग ऐसा करते हैं, जिनके प्रति आपके मन में सम्मान है, जो अच्छे इंसान है और जिनके पोस्ट्स आप नियमित पढ़ते हैं। आभासी दुनिया में गलतफहमियाँ होने के चांसेस और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं, लेकिन दूसरों पर ना सही खुद पर इतना भरोसा होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति बेवजह हमें इग्नोर क्यों करेगा? यहाँ तक कि मैसेज सीन हो जाने के बाद रिप्लाई न आने पर भी हममें इतनी समझदारी होनी चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति किसी जरुरी काम में फँसा हो सकता है, नेट डिसकनेक्ट हो सकता है, वह तसल्ली से फ्री होकर बात करना चाहता हो, या फिर कोई भी और वजह हो सकती है। कई बार हम जो पोस्ट्स लिखते हैं, उनको खुद पर लेकर भी कई लोग ग़लतफ़हमी का शिकार हो जाते हैं। कई बार कमेंट का रिप्लाई ना दे पाने की स्थिति में भी ऐसा होता है और भी कई कारण होते हैं। बेहतर है गलतफहमियों को सीधा संवाद कर दूर कर लिया जाए और जहाँ तक मेरी बात है तो बेवजह मैं किसी को इग्नोर नहीं करती (छिछोरों को छोड़कर) और अच्छे लोगों को तो बिल्कुल भी नहीं। फिर भी आपको मुझ पर ना सही कम से कम खुद पर तो भरोसा होना चाहिए। 
  • फेसबुक के कुछ नेगेटिव इफेक्ट्स में से एक जो मुझे सबसे बुरा लगता है, वह है गलतफहमियों को बढ़ावा देना। जितने भी सालों से फेसबुक पर हूँ एक चीज कई बार महसूस की है कि पोस्ट क्या सोचकर लिखी जाती है लेकिन क्या समझकर ले ली जाती है। सिर्फ एक सामान्य विचार को कई बार व्यक्तिगत आक्षेप समझकर ले लिया जाता है। यह अनुभव सभी लोगों का होगा? जहाँ तक मेरा सवाल है व्यक्तिगत टिपण्णी करने वाली पोस्ट सामान्यत: मैं नहीं करती, जो भी लिखती हूँ वह लम्बे समय का ऑब्जरवेशन या अनुभव होता है, जो इत्तेफाक़न कभी-कभी उस समय भी शब्द रूप में आ जाता है जब वैसी ही कोई बात फिर दोहराई गयी हो। लेकिन नफरत, द्वेष या किसी को नीचा दिखाना उसका उद्देश्य बिल्कुल नहीं होता। व्यक्तियों से कोई समस्या सामान्यतया नहीं होती इसलिए ही अनफ्रेंड या ब्लॉक करने की जरुरत भी बहुत कम पड़ती है। लेकिन यह गलतफहमियों को बढ़ावा मिलते देखना और आपसी मनमुटाव और द्वेष का बढ़ना एक अच्छा संकेत नहीं है। विचारों को बस विचारों की तरह लीजिये। उनसे प्रभावित होते हैं तो उन्हें अपनाइए, और पसंद न आये तो अपने विचार बताइये या इग्नोर कीजिये, लेकिन गलतफहमियां मत पालिए। फेसबुक अगर नफरत बढ़ाने का कारण बनता है तो फिर इसके होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसे प्रेम बढ़ाने का साधन बनाइये, नफरत फ़ैलाने का नहीं। 
  • जिसने नासमझने की ठानी हो, उसे समझाना भी तो नासमझी ही है।

 Monika Jain ‘पंछी’

March 2, 2015

Happy Birthday Wishes in Hindi

सुनों! रंग क्या कहते हैं 

तुमको हमारी उमर लग जाए : सफेद रंग है नयी शुरुआत का रंग! एक कैनवास जिस पर नयी इबारत लिखी जानी है। आज आपके जीवन का भी एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। दुनिया से निर्लिप्त रहने, कुछ भी पकड़कर ना रखने और सब कुछ बाहर की ओर बिखेरने का प्रतीक यह रंग आपके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करे। शांति, शुद्धता, विद्या, नीति, सात्विकता और पवित्रता का प्रतीक यह रंग आपके जीवन में रौशनी और खुलेपन का विस्तार करे। सुरक्षा और धैर्य का प्रतीक यह रंग आपको सभी विपदाओं से बचाये। सकारात्मकता, संतुलन, संवेदनशीलता, ईमानदारी, आत्मनियंत्रण, आत्मविश्वास, सादगी, बराबरी, पारदर्शिता, संयम और स्वतंत्रता का प्रतीक यह रंग आपको केवल दीर्घायु ही नहीं बल्कि अमरत्व प्रदान करे। 

मुरादें हों पूरी सजे हर तमन्ना : शक्ति, ऊर्जा, स्फूर्ति, कम्पन, उत्साह, महत्वकांक्षा और उल्लास का प्रतीक यह लाल रंग आपको उगते सूरज की तरह सिरमोर बनाये। प्रेम, रोमांच और आकर्षण का प्रतीक यह रंग आपके जीवन को सच्चे प्रेम से सुवासित करे। यह रंग आपके जीवन में आनंद का संचार करे। आपके आभामंडल को शक्तिशाली बनाये। सिन्दूर, रोली और कुमकुम का यह रंग आपके जीवन में शुभ और मंगल का संचार करे। शौर्य, साहस और विजय का प्रतीक यह रंग आपके गौरव, तेजस्विता और यश में उत्तरोतर वृद्धि करे। सजीवता का प्रतीक यह रंग आपकी प्राण शक्ति का नित पोषण करे। आपकी सभी शुभेच्छाएं पूरी हों। विवाह के प्रतीक इस रंग के सकारात्मक प्रभाव से आपके जीवन में मनचाहे साथी का आगमन हो। 

मोहब्बत की दुनिया के तुम चाँद बनना : पीला रंग अर्थात बासंती रंग, उत्सव का रंग, प्रेम का रंग, ख़ुशी का रंग! आपको जीवन में ऐसा प्रेम मिले जो मुक्ति के आकाश में जन्मा हो, जिसमें स्वतंत्रता की सांस हो, विश्वास का प्रकाश हो, करुणा की धार हो। ऐसा प्रेम जो आपकी बातों, ख़्वाबों और मुस्कुराहटों में जीवन भर सके। ऊर्जा का संवाहक यह पीला रंग आपके जीवन में हमेशा गर्माहट का अहसास बनाये रखे। सूझबूझ, सुकून और जिज्ञासा से संपन्न रखे। सादगी, निर्मलता, सात्विकता, उदारता और उत्फुल्लता का प्रसार करे। यह रंग आपकी रचनात्मकता, सकारात्मकता, स्वाभिमान, आत्मविश्वास और स्थिरता में वृद्धि करे। मित्रता का प्रतीक यह रंग आपको सदा सच्चे मित्रों से संपन्न रखे। हल्दी का यह रंग आपके जीवन में सुख-सौभाग्य और समृद्धि लाये। पीले रंग से सम्बद्ध वृहस्पति गृह और वसंत पंचमी पर पूजित माँ सरस्वती आपके ज्ञान में उत्तरोतर विकास करे। आपके ऐश्वर्य, कीर्ति, भव्यता, सुख, आरोग्यता और योग्यता में नित वृद्धि हो। 

सितारों से ऊंचा हो रुतबा तुम्हारा : जीवन के सारे अंधियारों को धता बताते हुए आप सफलता की असीम ऊंचाइयों को छुएँ। सागर की गहराई से बीनने हो मोती, चाहे करने हो अनन्त आकाश पर अपने हस्ताक्षर, करना हो ब्रह्माण्ड के रहस्यों का उद्घाटन, चाहे भरना हो कई मुस्कुराहटों में जीवन या फिर लिखनी हो अपने हाथों से अपनी तकदीर, आप हमेशा आगे बढ़ते रहें और सफलता पल, प्रतिपल, अहर्निश आपके साथ रहे। आपको आपकी शक्ति, बुद्धि, क्षमता, कुशलता, प्रखरता, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और स्वाभिमान की लौ से प्रकाशित सम्पूर्णता का आकाश मिले। आपकी सफलता की राह में कोई भी विघ्न ना टिक पाये, पर्वत के पाँव उखड़ जाए और पत्थर भी पानी बन जाये। आपको कभी भी रास्ते तलाशने ना पड़े, बल्कि आप रास्ते तराशते हुए जन-जन के मार्गदर्शक बनें। 

बहारों की मंजिल पे हँसना हँसाना : ज़िंदगी आपकी मुस्कुराहटों में मुस्कुराने लगे। आपके उत्साह की किरणें समूचे वातावरण को सजीव और मुखरित बना दे। हरी दूब पर मोतियों सी चमकने वाली ये ओस की बूँदें आपकी मुस्कुराहट बनकर सदा यूँ ही खिलखिलाती रहे। खिले फूलों की महक सदा आपके जीवन को सुवासित करती रहे। ताजगी का प्रतीक यह हरा रंग आपकी आँखों को सुकून दे और आपके ह्रदय को शीतलता प्रदान करे। प्यार, एकता और सामंजस्य का यह रंग आपके जीवन में सदैव खुशहाली बनाये रखे। प्रकृति की हरियाली आपके जीवन में सदैव बनी रहे। हर पल मीठा हो और मीठी हो हर याद भी। जीवन, आशा, विकास, स्वास्थ्य, समृद्धि, कर्मशीलता, सक्रियता, हास्य और सौभाग्य का प्रतीक यह रंग अपनी सकारात्मक छटा सदा आपके जीवन में बिखेरता रहे। 

ख़ुशी में हमारी भी आवाज़ सुनना : नारंगी रंग, नये सवेरे का रंग! सूरज की किरणें आपके जीवन पथ को रोशन करे। सूर्य के सातों रंग, पंछियों के कलरव, पानी की कल-कल और मुक्त मधुर हवा के संग आपकी उड़ान आपके सभी सपनों को पूरा करे। आज्ञा चक्र का यह रंग जो ज्ञान प्राप्ति का सूचक है, आपके ज्ञान में उत्तरोतर वृद्धि करे। धार्मिकता, दार्शनिकता और साधना का द्योतक व परिपक्वता का प्रतीक यह रंग आपमें नवीनतम व श्रेष्ठतम दृष्टि विकसित करे। 

ख़ुदा दिलजलों की नज़र से बचाए : विशालता का परिचायक, सब कुछ अपने भीतर समाहित करने वाला यह नीला रंग आपके शत्रुओं को भी अपना बना ले। मन को शांत रखने वाला यह रंग आपके प्रति किसी के भी मन में उठने वाले विकारों को पूर्णत: शांत करे। आपके प्रति उनमें स्नेह, शांति, विश्वास, त्याग और समर्पण की भावना में वृद्धि करे। समुद्र और आकाश का यह रंग आपके जीवन में बुद्धि, ज्ञान, साहस, अन्वेषण और रचनात्मकता को समृद्ध करे। अंतर्ज्ञान, प्रेरणा और आध्यामिक विकास में सहयोगी बने। स्वच्छता और निर्मलता का प्रतीक जल का यह रंग आपको गति और जीवनदायिनी शक्तियां प्रदान करे। उदारता, सौन्दर्य, प्रेम, त्याग, कोमलता, अनुराग और चरित्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला यह रंग आपको सभी के बीच एक श्रेष्ठ चरित्र के रूप में स्थापित करे। 

Monika Jain ‘पंछी’ 
(03/2015)

March 1, 2015

Learning Quotes in Hindi

Learning Quotes
 
  • 24/12/2016 - लिखने का सलीका सीखने से पहले बहुत जरुरी है कि सीखें हम पढ़ने का सलीका।
  • 19/09/2016 - जितना आसान है शब्दकोष बन जाना...उतना ही मुश्किल है शब्दों की आत्मा तक पहुँच पाना। 
  • 19/06/2016 - कुछ खामोशियाँ सबक होती है। 
  • 24/04/2016 - सीखना हो ऐसा...कि अतीत बन जाए कहानी किसी और की।
  • 26/07/2015 - पोस्ट का अर्थ उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम में जाने लगे तो मैं उसे हटाना बेहतर समझती हूँ. क्योंकि सौ सही सन्देश ना पहुँचे तो ठीक है पर अनजाने में भी किसी को एक गलत सन्देश या शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए।
  • 24/06/2015 - मेरा भाषा ज्ञान अंडा है। पढाई के सारे वर्ष गणित, विज्ञान, सांख्यिकी, फाइनेंस, अकाउंट्स और ऐसे ही विषयों के सवाल हल करते और करवाते हुए बर्बाद हो गए। (किसी ने यह तक कह दिया कि तुम अपने बच्चों का नाम IMSA और Derivatives ही रखना ) साहित्य किस चिड़िया का नाम है यह नहीं पता था। ऐसे में कोई कहता है कि तुम अच्छा लिखती हो और अगर वह थोड़ा भी सच कहता है तो मेरा निष्कर्ष बस यही है कि भावनाएं भाषा पर भारी है। बाकी मैं लिखना सीख रही हूँ और आप लोग मुझे सिखा रहे हो। वैसे मेरी ड्रीम डॉटर का नाम पंख है। :p
  • 01/03/2015 - सीखना बहुत आसान होता है। चुटकियों का काम। कैसे? अगर कोई किसी की बात नहीं सुनता, बस अपनी सुनाता है तो बुरा लगता है ना? तो उससे सीखना होता है दूसरों की बात सुनना। अगर कोई आपको इग्नोर करता है, परवाह नहीं करता, तो हर्ट होता है न! तो उससे सीखना होता है दूसरों को समझना और उनकी परवाह करना। अगर कोई हमेशा लड़ाई-झगड़ा करे, हर बात पर भड़के, तो सर दर्द होता है न! तो उससे सीखना होता है शांत रहना। अगर कोई हमेशा पैसों के पीछे भागता रहे, कभी अपनों पर ध्यान ना दे, तो इरीटेशन होती है न! तो उससे सीखना होता है ज़िन्दगी के हर पल को एन्जॉय करना। मैं बुरे इंसान से हमेशा सीखती हूँ अच्छा बनना। सो सिंपल!
  • हमें अपनी जिम्मेदारी पर पढ़ना सीखना होगा। लेखक की भी जिम्मेदारियां हैं लेकिन लेखक को हमेशा दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हर कोई यहाँ सीख रहा है।...और सीखने की प्रक्रिया में विरोधाभासों का होना एक सामान्य सी बात है। ऐसा व्यक्ति ढूँढना असंभव के निकट है जिसमें कोई विरोधाभास ना हो। यह दुनिया ही विरोधाभासों और द्वंदों पर खड़ी है। इसके अलावा कई बार विरोधाभास इसलिए भी नजर आते हैं क्योंकि हम बातों का सन्दर्भ नहीं पकड़ पाते। दूसरी ओर भाषा की सीमा अर्थ के अनर्थ कर देती है। इसलिए किसी पर निर्भर हुए बिना पढ़ना और सीखना जरुरी है। सहयोगी बहुत से मिलेंगे लेकिन कोई ऐसा जो सब कुछ सिखा दे वह सिर्फ हम खुद ही हो सकते हैं और कोई नहीं। सकारात्मक तरीका यही है : सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय। 
  • किस्से-कहानियाँ जाने क्यों ज्यादा अच्छे लगते ही नहीं...पूरा पढ़कर भी पढूंगी बस उतना ही जो तुम कहना चाहते हो। 
  • सिखाने का उन्माद इतना अधिक न हो कि कोई सीखने से विद्रोह कर बैठे। बहुत कुछ सीखने की जरुरत होती है सिखाने वाले को। जैसे सिखाने की इच्छा अति बलवती हो तो सबसे पहले तो यह अति छोड़ना ही सीख लेना चाहिए।

Monika Jain ‘पंछी’