April 30, 2015

Mother's Letter to Daughter on Indoor Outdoor Games in Hindi

Mother's Letter to Daughter Son on Indoor Outdoor Games in Hindi
 
माँ की पाती : इंडोर आउटडोर गेम्स
(बालहंस में प्रकाशित)

प्यारी पंख,

कल तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे मामा तुम्हारे लिए वीडियो गेम लेकर आये। कल से तुम उसे देखकर चहक रही हो और अपने सारे दोस्तों से अपनी यह ख़ुशी बाँट रही हो। तुम्हें ख़ुश देखकर मैं भी बहुत ख़ुश हूँ। तुम्हारी यह चहक हमेशा बनी रहे। पर मेरी बच्ची, कुछ जरुरी बातें हैं जो तुम्हारे इन कंप्यूटर और वीडियो गेम्स की दुनिया में दाखिल होने से पहले तुम्हें बताना चाहती हूँ।

खेल हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा जरुर होते हैं, लेकिन इस बात का हमेशा ख़याल रखना कि वे हमारे जीवन पर नकारात्मक रूप से हावी ना होने पाएँ। और इनमें भी तुम जो रस्सी, बैडमिंटन, रेसिंग, साइकिलिंग जैसे आउटडोर गेम्स खेलती हो न, उन्हें हमेशा इन कंप्यूटर, मोबाइल और वीडियो गेम्स पर प्राथमिकता देना।

बेटू, तुम्हें याद है तुम्हारे निशांत भैया? तुम्हारी सुम्मी आंटी और संजय अंकल के बेटे। पिछली बार जब अंकल-आंटी घर आये थे तो कितने परेशान थे। क्या बता रहे थे कि निशांत पूरे दिन बस टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स से चिपका रहता है। दोस्त खेलने को बुलाते हैं तब भी उसके थोड़ी देर में आ रहा हूँ...थोड़ी देर में आ रहा हूँ...कहते-कहते रात हो जाती है पर उसके वो ‘एलियन आइसोलेशन’ और ‘ब्लू एस्टेट’ जैसे मार-धाड़ से भरे गेम्स खत्म नहीं होते। ना उसे खाना खाने का होश रहता और ना पानी पीने का।

मेरी प्यारी बच्ची, मैं जानती हूँ तुम तो बहुत समझदार हो। फिर भी इस बात का हमेशा ख़याल रखना है तुम्हें कि कोई भी ऐसा खेल बिल्कुल नहीं खेलना है, ना ही ऐसा कोई कार्टून शो देखना है जो हिंसा, खून-खराबे या मारपीट से भरा हो। बेटा, ऐसे गेम्स और कार्टून शो दिमाग पर बहुत बुरा असर डालते हैं। तुम देखती हो ना निशांत को...कितना चिड़चिड़ा हो गया है वह। कई बार स्कूल में मार-पीट तक कर आता है। पढ़ाई में भी उसकी परफॉरमेंस अच्छी नहीं रही है।

तो मेरी बच्ची, तुम्हें हमेशा ऐसे गेम्स खेलने हैं जो तुम्हें सकारात्मक, मजबूत और रचनात्मक बनाये और तुम्हारी मानसिक और बौद्धिक क्षमता का विकास करे। हम जल्द ही तुम्हारे लिए ऐसे पॉजिटिव गेम्स की लिस्ट बनायेंगे, जिन्हें तुम अपने खाली समय में खेल सको। बाकी अगली बार जब हम निशांत के घर जायेंगे तो उसे भी अच्छे से समझायेंगे कि वह ऐसे वायलेंट गेम्स से दूर रहे और सब बच्चों के साथ मिलजुल कर खेला करे।

बेटा, सबके साथ मिलकर खेलने से हम जाने-अनजाने ही बहुत सी अच्छी बातें सीख जाते हैं। एक दूसरे की मदद करना, एकता, अनुशासन, सहनशीलता, आत्मनियंत्रण जैसे कई सारे अच्छे गुण हैं जो हमें आउटडोर गेम्स सिखाते हैं और हमारा शारीरिक-मानसिक विकास भी करते हैं। एक अच्छे स्वास्थ्य के लिए और एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए सबके साथ मिलजुल कर खेलना बहुत उपयोगी होता है।

मेरे जॉब की वजह से हर रोज तुम्हें कुछ घंटे घर पर अकेले रहना पड़ता है। मुझे हमेशा चिंता लगी रहती है कि कहीं मेरी बच्ची अकेला तो महसूस नहीं कर रही होगी। ऐसे में मैं चाहती हूँ कि तुम एक समझदार बेटी की भूमिका निभाओ और अपने खाली समय का उपयोग अच्छे रचनात्मक कामों में करो। और मेरी पंख ये करेगी इसका मुझे पूरा विश्वास है।

तुम्हारी माँ ‘पंछी’
(30/04/2015)

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