June 25, 2015

Quotes on Childhood in Hindi

Childhood Quotes

  • 12/03/2017 - दिवा - बुआ देखो! उसको होली कहते हैं। बुआ - होलिका!...उसको होलिका कहते हैं। दिवा - अच्छा...'का' भी कहते हैं।
  • 04/02/2017 - दिवा (हमारे घर की सबसे छोटी सदस्या) जब भी उससे बात होती है तब कहती है - मोनी बुआ, आप मेरे लिए नयी वाली अहा (हेयर स्टाइल) बनाना सीखकर रखना। मैं जब वहां आऊंगी तो मेरे बालों में नयी वाली अहा बनाना। जब भी किसी फेस्टिवल पर यह आती है तो मुझे अपना हेयर ड्रेसर बनाकर रखती है। :p दरअसल मुझे भी बच्चों के काम करना बेहद अच्छा लगता है। विशेष रूप से उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाना, कहानियां और लोरी सुनाना तो सबसे अच्छा। :) एक स्वर्गीय अहसास! दिवा अभी मुझे अहा बनाने वाली बुआ के रूप में ज्यादा जानती है...और सब जगह तारीफ करते हुए इस बात का जिक्र जरुर करती है...तो हुआ यूँ कि आज उसका बर्थडे है तो वह जहाँ रहती है वहां पड़ोस में अपने किसी दोस्त को इनवाइट करने गयी और उससे पूछती है - क्या तेरी बुआ को अहा बनाना आता है? :p अब उसका दोस्त कुछ बोले तो कैसे बोले? उसके तो अभी बाल ही नहीं है। :D
  • 27/03/2016 - बच्चों को कुछ समझाते समय एक अच्छा अवसर होता है खुद के कुछ सीखने और समझने का भी...वह सब जो अब तक हम सीख या बदल नहीं पाए। माता-पिता और शिक्षकों के बाद शायद बच्चे ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जीवन में। जरुरत बस खुद के और बच्चों के प्रति ईमानदारी की है।
  • 09/11/2015 - माँ क्या, बच्चे तो अपनी प्यारी, तुतलाती आवाज़ में मौसी, बुआ, दीदी कुछ भी कहे...जन्नत सा अहसास हो आता है। 
  • 27/06/2015 - बच्चे मुझे बड़ा नहीं समझते। 'चिड़िया उड़, तोता उड़' से लेकर 'ओ मीना, मीना सानी', 'अक्कड़-बक्कड़', 'कार्ड्स की मैचिंग'...सारे के सारे गेम खिलवाकर ही मानते हैं। लगता है चिड़िया उड़ खेलते-खेलते ही उडूंगी एक दिन। :p 
  • 25/06/2015 - मम्मा वाशिंग मशीन में कपड़े धो रही है और बेबी ने बड़े प्यार से रट लगा रखी है, 'मम्मा-मम्मा मुझे इसमें डाल दो।' इसे कहते हैं खतरनाक मासूमियत! मम्मा ने कभी जरुर कहा होगा, ‘रोना बंद कर! वरना अभी वाशिंग मशीन में डाल दूंगी।’ :p  
  • एक बार एक दोस्त ने कहा था - तुम्हारी सोच परिपक्व है, पर शक्ल, आवाज़, रोना, हँसना, गुस्सा, मनाना और दिल बिल्कुल बच्चों जैसा है। इसलिए जिससे भी तुम्हारी शादी होगी उसे बच्चा और वाइफ एक साथ ही मिल जाएगा। :p जोक्स अपार्ट...पर मैं भी यही चाहती हूँ कि जब तक मैं जिन्दा रहूँ, मेरा बचपन भी जिन्दा रहे। इस दुनिया की शानो-शौकत, दिखावे, बन्धनों, परम्पराओं और चमक-दमक से दूर जब भी मैं बच्चों के साथ होती हूँ तो खुद को बिलकुल आज़ाद महसूस करती हूँ। तब मैं पूरी तरह से मैं होती हूँ। मुझे बच्चों के साथ खेलना, उनसे बातें करना, उन्हें प्यार करना, उनका ख्याल रखना, उन्हें अच्छी-अच्छी बातें बताना, अपने हाथों से उन्हें खाना खिलाना, उन्हें कहानियां सुनाना, उनके साथ सालसा डांस करना...और भी बहुत कुछ...बहुत अच्छा लगता है। कुछ दोस्त पूछते हैं आपकी ज्यादातर पिक्स बच्चों के साथ क्यूँ होती है? इसका सीक्रेट है कि बच्चों के साथ मेरी पिक्स स्वाभाविक रूप से अच्छी आती है। :) आज भी, जब भी मुझे मौका मिलता है तो चाहे सड़क हो, घर हो या कोई भी जगह मैं बच्चों के साथ बचपन वाले गेम्स खेलने लग जाती हूँ। माँ! मुझे बड़ा नहीं बनना। मुझे बच्चा ही रहना है। 
  • जब तक हम अपने बच्चे की परवरिश सही ढंग से कर सकने के लिए तैयार नहीं, हमें उन्हें जन्म देने का अधिकार नहीं है। 

Monika Jain ‘पंछी’