December 8, 2015

Save Animals and Birds Essay in Hindi

(1)
 
इंसान होने का सबूत

30/05/2017 - किसी भी संप्रदाय की कुरीतियों, रूढ़ियों या पशु-पक्षियों को देवी-देवता या माता-पिता मानने से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैं किसी पार्टी विशेष की समर्थक भी नहीं। लेकिन कोई भी देश और दुनिया सिर्फ इंसानों के लिए नहीं है। पशु-पक्षियों के लिए आप न्यूनतम भी नहीं रखना चाहते। जबकि इंसान इंसान तभी होता है जब वह अपनी चेतना और बुद्धि का सदुपयोग कर शेष जीवों (इंसान शामिल) को अधिकतम संरक्षण प्रदान कर सके। बाकी तो वह पशुओं के स्तर से भी नीचे ही है। इंसानी उपलब्धियां इस प्रकृति पर कोई अहसान नहीं कर रही। हाँ, विपरीत जरुर सत्य है तो फिर गर्व की तो कोई बात है ही नहीं। जानवरों पर भोजन के साथ-साथ और भी कई तरह से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अत्याचार होते हैं...और अगर किसी देश के पास यह विकल्प हो कि वह बिना धर्म और राजनीतिक दांव-पेंचों के वहां रहने वाले पशु-पक्षियों के संरक्षण को भी सुनिश्चित कर सके तो मुझे तो यही लगता है कि इस पर सभी को मिलकर सोचना ही चाहिए और सभी बिन्दुओं को शामिल करके सोचना चाहिए। कहीं किसी बिंदु पर आकर तो सहमति बन ही सकती है। और शुरुआत व्यापक हित को देखते हुए चयनित पशुओं को लेकर भी हो तो समस्या क्या है? पर अफ़सोस है कि सत्ता और अपनी असुरक्षा से आगे इंसान कुछ सोच ही नहीं पाता। हमारी इच्छाएं/महत्वकांक्षाएं अनन्त हैं। लेकिन अपने इंसान होने का कोई तो सबूत हम इस प्रकृति और शेष जीवों को दें।

(2)

अपनी ढपली, अपना राग

हिंदुत्व श्रेष्ठ है इसलिए हिंदुत्व ही बचना चाहिए।
इस्लाम श्रेष्ठ है इसलिए इस्लाम ही बचना चाहिए।
इंसान श्रेष्ठ है इसलिए इंसान ही बचना चाहिए।
सारी मिथ्या घोषणाएं हमारी! बिल्कुल अपनी ढपली, अपना राग की तर्ज पर। और इन सारी घोषणाओं के पीछे जो चीज प्रमुखता से चलती है वह है : राजनीति, मालकियत, सत्ता, अहंकार, नियंत्रण और अपने विस्तार की भावना। लेकिन पानी पी-पीकर हमें अगर किसी चीज को कोसना है तो वह है धर्म! खैर! अमूर्त चीजों पर अपना गुस्सा निकालना हर हाल में बेहतर है। कम से कम इस क्रोध की अग्नि में कोई मारा तो नहीं जाता। बाकी इंसान कितना ज्यादा श्रेष्ठ है इसका पता भी तब ही चल सकता है जब इंसान और किसी जीवन के बिना इस धरती पर बच सके। बाकी जिसे सच में जीव हत्या से आपत्ति हो वह न तो गाय के मारे जाने का समर्थन कर सकता है और न ही गाय को मारने वाले इंसान को मार डालने का समर्थन कर सकता है। वैसे ये जबरन किसी को भी माता-पिता, भाई-बहन बनाने वाले इंसान भी किसी चमत्कार से कम नहीं। स्वार्थ को रिश्तों का जामा पहनाना कोई हमसे सीखे। जब तक गाय घोषणा नहीं कर देती कि मैं तुम्हारी माता हूँ, तब तक हमारे लिए यही बेहतर है कि हम अपनी भावनाओं को अपने नियंत्रण में रखे और उसे अपने बछड़े की माता ही बने रहने दें।

(3)

गर आप वह पंछी / पशु होते तो?

08/12/2015 - पिंजरे में तोते, चिड़िया, खरगोश, चूहे आदि रखने वाले, दिन भर उन्हें पुचकारते हुए इसी ग़लतफ़हमी में जीते रहते हैं कि वे उन्हें बहुत प्यार करते हैं, पर सच सिर्फ इतना है कि वे इन भोले-भाले जीवों के सबसे बड़े दुश्मन है, जिनके मनोरंजन की बलि चढ़ती है, इन जीवों की आज़ादी! सोचिये, अगर कोई हमें जानवरों से भरे जंगल में अकेला पिंजरे में या खुला भी छोड़ आये तो हमें कैसा लगेगा? फिर कैसे हम सोच लेते हैं कि अपनी प्रजाति से दूर अकेले वे हमारे साथ खुश रह पायेंगे? कल एक अंकल जी कहीं पर बोलते दिखे, 'इन तोतों के लिए मैंने इतना बड़ा पिंजरा इसलिए ही बनावाया है ताकि इनकी आज़ादी में कोई खलल न पड़े।' (इत्ता बड़ा अहसान :o) प्यारे अंकल जी, आकाश को नापने वाले पंछियों के लिए कोई कितना बड़ा पिंजरा बनवा सकता है भला? पंछी पिंजरे में रहने को होते तो उनके पंख क्यों होते? कैदखाना स्वर्ण महल हो तब भी एक बंदिशों से रहित झोपड़ी से बदतर होता है...महसूस करके देखिये। परिंदों की आज़ादी पर यह फैसला लेने का हक़ आपको किसने दिया? उनकी आज़ादी का निर्णय उन पर ही छोड़ दीजिये न!...और भी बहुत कुछ है कहने को...पर बस आप एक पल को सोचिये - गर आप वह पंछी होते तो?

इसी तरह से ये पालतू कुत्ते को घुमाने वालों को उनके गले में पट्टा और रस्सी क्यों बांधनी पड़ती है? मतलब क्या इतने दिनों में भी वह उनके साथ यूँ ही चलना नहीं सीख पाता? और अगर नहीं सीख पाता तो इसका सीधा मतलब यह है कि वह ऐसे चलना ही नहीं चाहता। वैसे आज कोई बहुत ज्यादा पशु प्रेम नहीं उमड़ रहा है और न ही कोई व्यंग्य लेखन का इरादा है। बस अभी-अभी एक कपल को देख रही थी जो अपने कुत्ते को साथ घुमाने लाये थे और हर 5 सेकंड में उस कुत्ते के इधर-उधर डोलने और बीच-बीच में रुकने की वजह से उन्हें भी ऐसा ही करना पड़ रहा था। समझ नहीं आ रहा था उन्होंने कुत्ते को बाँधा हुआ है या कुत्ते ने उन्हें बाँधा हुआ है। खैर! प्रेम में कोई परेशानी नहीं होती लेकिन अच्छा लगता अगर बिना पट्टा और रस्सी बांधे इस तरह की परवाह और प्रेम देखने को मिलता।

Monika Jain ‘पंछी’

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December 1, 2015

Funny Quotes in Hindi

Funny Quotes

  • 13/06/2017 - हँसना हो तो अपनी पुरानी पोस्ट्स पढ़ें।...मसलन 31 जनवरी, 2014 को किसी के सवाल का जवाब मैं कुछ यूँ दे रही थी - जब कुछ लोग अपनी बुराई (घोर वाली) तक नहीं छोड़ते तो मैं भला अपनी अच्छाई कैसे छोड़ दूँ? (What a Logic!)
  • 08/06/2017 - बहुत ज्यादा...मतलब बहुत ही ज्यादा बोलने वाली पत्नियों के पति बचा-कुचा बोलना भी भूल जाते हैं। सॉरी टू नारीवाद! 
  • 02/06/2017 - कीड़े-मकोड़ों से प्यार करने का पुरस्कार कभी-कभी रात नीचे वाले फ्लोर में माँ-पापा के सो जाने के बाद, ऊपर वाले फ्लोर में बड़े ही ख़तरनाक, विचित्रोगरीब, खूंखार, रहस्यमयी, एकदम अज़नबी, दो इत्ते लम्बे दंशों के साथ आये बड़े जहरीले कीड़े के रूप में भी प्राप्त हो सकता है। फ़िलहाल मैं सुरक्षित हूँ। उसे भी रूम से बाहर बालकनी से टाटा कह दिया है। थोड़ा सा अजीब लग रहा है। लेकिन शुभ रात्रि। 
  • 27/05/2017 - सपने में लाइट न हो तो भी कितनी दिक्कत हो जाती है। कुछ भी नज़र नहीं आता। इसी के चलते कल रात मैं एक शहर में खो गयी थी। 
  • 26/05/2017 - कुछ लोगों को देखकर लगता है कि अगर इनका साम्राज्य या शासन होता तो ये हँसने पर ही टैक्स लगा देते या फिर डांट-डपट कर चुपचाप एक कोने में बैठा देते। मतलब इत्ते खड़ूस। 
  • 22/05/2017 - बन्दे ने तो पोस्ट में Better Half लिखा था। मैं उसे Battle Half पढ़ गयी।
  • 17/05/2017 - कोई ज्यादा 'हम्म-हम्म' करता हो और उसका 'हम्म-हम्म' करना छुड़वाना हो तो उससे भी ज्यादा 'हम्म-हम्म' करने लगो और उसे शुरू में कारण भी बता दो। उसका छूट जाएगा। बस बाद में खुद का छोड़ना मत भूल जाना। 
  • 16/05/2017 - कभी-कभी घूरने वाले/वाली को घूर कर भी उसकी घ्रूरता को कम किया जा सकता है।
  • 12/05/2017 - तुम मुझे फूल दो...मैं तुम्हें गमला दूँगी।
  • 09/05/2017 - दुनिया कभी-कभी फर्जीवाड़ा लगती है।
  • 02/05/2017 - एक बहुत सुन्दर सा गिरगिट कई दिनों से गृह प्रवेश की फ़िराक में लग रहा है। वैसे गिरगिट छिपकली से ज्यादा मासूम लग रहा है। 
  • 01/05/2017 - टमाटर रागियों का बस चले तो दही की करी में भी टमाटर डलवा दे और टमाटर द्वेषियों का बस चले तो टमाटर की सब्जी में भी टमाटर न डाले।
  • 27/04/2017 - अच्छा लगता है जब सारी रोटियां गोलगप्पा बन जाती है।
  • 13/04/2017 - गालों पर प्यार करने की इतनी आदत है कि गाय के बच्चे के भी गाल खोजने लग जाती हूँ। 
  • 21/03/2017 - जीवन में कुछ भी हो सकता है। मसलन यह भी कि रात नींद में आप पानी पीने को उठो और जग से गिलास में पानी डालो और पानी गिलास के बजाय बिस्तर पर गिर जाए या भयंकर सर्दी की रात में पानी गिलास में लेने के बाद आप जग को वापस अपनी जगह रखने की बजाय हवा में ही रख दो और तब आपको यह पता चले कि नींद उड़ना किसे कहते हैं। 
  • 29/12/2016 - बच्चे के रूप में करीब-करीब ईश्वर ही जन्म लेता है। फिर माता-पिता और समाज उसे बिगाड़ने का कार्य करते हैं। 
  • 21/12/2016 - कुछ लोगों को आपकी पोस्ट्स इतनी पसंद आती है, इतनी पसंद आती है, इतनी पसंद आती है कि वे उसे अपनी ही बना लेते हैं। उनके लिए यह स्वीकार करना संभव ही नहीं होता कि यह उन्होंने नहीं लिखी है।
  • 07/11/2016 - न सोयेंगे और न सोने देंगे वाले प्राणियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है।
  • 27/09/2016 - एक ज़माने में मैं इतनी बुद्धू थी (अभी भी कम नहीं) कि एक दोस्त ने मेरे मजे लेने के लिए मुझसे कहा, 'हमारे यहाँ पर बेस्ट फ्रेंड को मुर्गीचोर कहा जाता है।' मैंने थोड़ा संदेह जताया तो उसने कहा, 'चाहो तो किसी और से पूछ लो।' और मैं आराम से वहीँ पर रहने वाले एक कॉमन फ्रेंड से पूछ भी आई कि क्या आपके यहाँ बेस्ट फ्रेंड को मुर्गीचोर कहते हैं? 
  • 04/09/2016 - हमारी शिक्षा प्रणाली इतनी बोरिंग है कि बच्चे यह तक कहते पाए जाते हैं कि काश! बाढ़ आ जाए तो स्कूल ही नहीं जाना पड़ेगा। 
  • 30/08/2016 - अपने घर में मैं नास्तिक समझी जाती हूँ। मेरी जन्मकुंडली में लिखा है मैं बहुत बड़ी धर्मात्मा बनूँगी और यहाँ फेसबुक पर शायद आध्यात्मिक समझते हैं मित्र। और फिर मैंने इनमें से कुछ भी बनना कैंसिल कर दिया। 
  • 21/08/2016 - मित्र के सालों पुराने नंबर पर कॉल करने...जो कुछ सालों तक बंद रहकर अब किसी ख़तरनाक लड़की का नंबर हो चुका हो। जहाँ सामने वाली आपको कोई और लड़की (रिमझिम) समझ रही है (जिससे उसका 36 का आँकड़ा है शायद) और आप उसे मित्र की पत्नी समझकर बहुत सहजता से बात कर रहे हैं। तब इस ख़तरनाक ग़लतफ़हमी के बीच कुछ अज़ब वार्तालाप के साथ-साथ उसका कहना, 'देखो! तुम इतनी ज्यादा स्वीट मत बनो।'...मुझे रह-रहकर अभी तक हंसी आ रही है। अच्छी-खासी आवाज़ का इस तरह से कचरा भी हो सकता है। मन कर रहा था उसे कह दूँ, मैं स्वीट बन नहीं रही...आलरेडी स्वीट हूँ। 
  • 18/08/2016 - बच्चों का स्वागत और बच्चों द्वारा स्वागत आज भी दरवाजे के पीछे छिपकर 'हो' से ही होता है। 
  • 07/04/2016 - डिअर स्माइली! तुम अलग-अलग स्क्रीन पर अलग-अलग से मत दिखा करो। 
  • 19/02/2016 - काहें का 'फ्रीडम 251'! सबको तो गुलाम बना छोड़ा है। इत्ते तो अभी शक्ल भी नहीं देखी ढंग से। अफवाहों का बाज़ार भी गर्म है। वैसे टेंशन न लो कोई। कुछ ठीक न रहा तब भी बच्चों के खेलने के काम तो आ ही जाएगा।
  • 11/01/2016 - 'स्टेप हेयर कट' के लिए माँ कहती है - चूहों ने बाल कुतर दिए हो जैसे।
  • 07/12/2015 - किचन एक्सपेरिमेंट के नाम पर किसी ने कहा, 'आप आलू-मुर्गा बना लो।' हमने कहा, 'आलू हम बना लेंगे, आप मुर्गा (सजा वाला) बन जाना।' 
  • 01/12/2015 - जिन्हें शब्दों से अति प्रेम हो या फिर जिनके लिए चर्चा सिर्फ हार या जीत का प्रश्न हो उनके साथ चर्चा में पड़ना मतलब ’आ बैल मुझे मार!’ 
  • हमारी फ्रेंडलिस्ट में रहते हुए भी कुछ लोग हमें इतना रेगुलर नहीं पढ़ते जितना ब्लॉक लिस्ट में जाने के बाद पढ़ने लगते हैं।
 
Monika Jain ‘पंछी’

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